इस भाग में आप आयकर कानून के तहत हानियों को शुरू करने और आगे ले जाने से सम्बंन्धित विभिन्न प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अस्वीकरण:

इस दस्तोवज में मौजूद विषय केवल जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य जनता तक सूचना को जल्द और आसानी से पहुंचाना है और इसे कानूनी दस्तोवजों के तौर पर नही समझा जाना चाहिए।

 

जनता को सलाह दी जाती है कि विषय का सत्यापन सरकारी अधिनियमों/नियमों/अधिसूचनाओं आदि से करें।

 

 

“इस दस्तावेज़ में वित्त अधिनियम, 2026 द्वारा संशोधित आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधान शामिल हैं।”

 

 

 

आयकर कानून के अन्तर्गत घाटे का समायोजन तथा अग्रेनयन

 

 

छूटयोग्य आय के साधन से होने वाले घाटे को करयोग्य आय के विरुद्ध समंजित नहीं किया जा सकता ।

यदि एक स्रोतविशेष से आय पर कर से छूट है, तो ऐसे स्रोत से होने वाले घाटे को किसी ऐसी आय के विरुद्ध पृथकीकरण नहीं किया जा सकता जो कि कर के योग्य है ।

उदाहरणार्थ, कृषि-सम्बन्धी आय कर से छूटयोग्य है, यदि किसी व्यक्ति को कृषि-सम्बन्धी गतिविधि में हानि उठानी पड़ती है तो ऐसी हानि किसी अन्य करयोग्य आय के विरुद्ध समंजित नहीं की जा सकती ।

अन्त:स्रोत समायोजन का अर्थ

यदि किसी वर्ष करदाता को आय की किसी मद-विशेष के तहत किसी स्रोत से हानि हुई है, तो वह ऐसी हानि को उसी मद में किसी दूसरे स्रोत से आय के विरुद्ध समंजित कर सकता है ।

आय के किसी मद-विशेष के तहत स्रोत से होने वाली हानि को आय के उसी मद के तहत किसी दूसरे स्रोत से आय के विरुद्ध समंजित किये जाने की प्रक्रिया को अन्त:स्रोत समायोजन कहा जाता है । उदाहरण के लिए, व्यापार क से हुई हानि, व्यापार ख से हुए लाभ को समंजित कर सकती है ।

हानि का अन्त:स्रोत समायोजन करते समय ध्यान में रखे जाने योग्य बाध्यताएँ

हानि का अन्त:स्रोत समायोजन करते समय निम्नलिखित बाध्यताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिये:

1) किसी सट्टा व्यापार से होने वाले घाटे को सट्टा व्यापार के अलावा किसी अन्य आय के विरुद्ध समायोजित नहीं किया जा सकता । हालाँकि किसी गैर-सट्टा व्यापार से होने वाली हानि को किसी सट्टा व्यापर के विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है ।

2) दीर्घावधि पूंजी हानि को दीर्घावधि पूंजी लाभ के अलावा किसी अन्य आय के विरुद्ध समायोजित नहीं किया जा सकता । हालाँकि अल्पावधि पूंजी हानि को दीर्घावधि पूंजी लाभ या अल्पावधि पूंजी लाभ के विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है ।

3) कोई भी हानि इनके विरुद्ध समायोजित नहीं की जा सकती – लॉटरियों, वर्गपहेलियों, दौड़ों (घुड़दौड़ सहित), ताश के खेल और किसी भी प्रकार के किसी अन्य खेल या किसी भी रूप या प्रकृति की शर्तों की जीत ।

4) घुड़ दौड़ के स्वामित्व या रखरखाव के कारोबार से होने वाली हानि को किसी अन्य आय के विरुद्ध समायोजित नहीं किया जा सकता सिवाय दौड़ के घोड़ों के स्वामित्व या रखरखाव के कारोबार से आय के ।

5) भाग 35कघ के तहत निर्दिष्ट व्यापार से होने वाली हानि को किसी अन्य आय के विरुद्ध समायोजित नहीं किय जा सकता सिवाय निर्दिष्ट व्यापार से होने वाली आय को छोड़कर (भाग 35कघ कुछ निर्दिष्ट व्यापारों में लागू है जैसे कि कोल्ड चेन सुविधा की स्थापना, कृषि-उत्पादों के भण्डारण के लिए वेयर-हाउसिंग सुविधा की स्थापना एवं प्रचालन, तथा गृहनिर्माण परियोजनाओं का निर्माण, इत्यादि ।

अन्त:-मद समायोजन का अर्थ

अन्त:स्रोत समायोजन, (यदि कोई हो), को करने के बाद अगला चरण है अन्त:मद समायोजन करने का । यदि किसी वर्ष में कर दाता को आय की किसी मद में हानि उठानी पड़ी है, तथा किसी अन्य मद में आय हुई है, तो वह आय की एक मद में हानि को दूसरी मद में आय से समंजित कर सकता है । उदाहरणार्थ, मकान-सम्पत्ति की मद में होने वाली हानि को वेतन आय के विरुद्ध समंजित किया जाना ।

हानि का अन्त:मद समायोजन करते समय ध्यान में रखे जाने योग्य बाध्यताएँ

अन्त:मद समायोजन करने से पहले निम्नलिखित बन्धनों को ध्यान में रखा जाना चाहिये :

1) अन्त:मद समायोजन करने से पहले करदाता को अन्त:स्रोत समायोजन करना चाहिए,

2) सट्टा कारोबार से होने वाली हानि को किसी अन्य आय के विरुद्ध समायोजित नहीं किया जा सकता । हालाँकि किसी गैर-सट्टा कारोबार से होने वाली आय को सट्टा कारोबार से आय के विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है।

3) पूंजी लाभ के तहत हानि को किसी अन्य आय की मद के तहत आय से समायोजित नहीं किया जा सकता ।

4) कोई भी हानि इनसे होने वाली आयों से समायोजित नहीं की जा सकती – लॉटरियों, वर्गपहेलियों, दौड़ों घुड़दौड़ सहित, ताश के खेल, या किसी भी प्रकार के किसी अन्य खेल या जुऐ या किसी भी रूप या प्रकार की शर्त की जीत ।

5) घुड़ दौड़ के स्वामित्व या रखरखाव के कारोबार से होने वाली हानि को किसी अन्य आय के विरुद्ध समायोजित नहीं किया जा सकता ।

6) भाग 35कघ के तहत निर्दिष्ट व्यापार से होने वाली हानि को किसी अन्य आय के विरुद्ध समायोजित नहीं किया जा सकता (भाग 35कघ कुछ निर्दिष्ट व्यापारों में लागू है जैसे एक कोल्ड चेन सुविधा की स्थापना, कृषि-उत्पादों के भण्डारण के लिए वेअरहाउसिंग सुविधा की स्थापना तथा प्रचालन, गृह-निर्माण परियोजनाओं का निर्माण, इत्यादि) ।

7) व्यापार या व्यवसाय से हानि को "वेतन" मद के तहत आरोपणीय आय के विरुद्ध समायोजित नहीं किया जा सकता ।

8) प्रभावी निर्धारण वर्ष 2018-19 से, शीर्षक "गृह संपत्ति" के अंतर्गत हानि को किसी निर्धारण वर्ष के लिए रू. 2,00,000 की सीमा तक ही किसी अन्य मुख्य आय के समक्ष ही समायोजित किया जाने की अनुमति होगी

9) हालांकि, अनवशोघित हानि धारा 71ख के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार बाद के वर्षों में समायोजित करने के लिए अग्रेषित की जाएगी (गृह संपत्ति के अग्रेषण से संबंधित प्रावधानों पर बाद में चर्चा की जाएगी)

असमायोजित हानि का अगले साल में समायोजन के लिए अग्रेनयन

कई बार ऐसा हो सकता है कि अन्त:स्रोत तथा अन्त:मद समायोजन करने के बाद भी हानि असमायोजित बची रहती है । ऐसी असमायोजित हानि को परवर्ती वर्ष (या वर्षों) की आय के विरुद्ध समायोजन के लिए अग्रेनीत किया जा सकता है । आयकर कानून में आय की विभिन्न मदों के तहत हानि के अग्रेनयन के लिए पृथक प्रावधान गढ़े गये हैं ।

आयकर कानून के तहत सट्टा व्यापार से हानि से इतर व्यापार हानि के समायोजित एवं अग्रेनयन के सम्बन्ध में प्रावधान

यदि व्यापार/व्यवसाय की हानि (सट्टा व्यापार से इतर) उस वर्ष में पूरी तरह से समायोजित नहीं की जा सकती है जिसमें कि वह हुई हो, तो असमायोजित हानि को अगले वर्ष में समायोजित करने के लिए अग्रेनीत किया जा सकता है । आगे के वर्षों में ऐसी हानि केवल ऐसी करारोपित आय के विरुद्ध समायोजित की जा सकती है जो कि मद "व्यापार या व्यवसाय के लाभ एवं प्राप्तियाँ" के अन्तर्गत हो ।

मद "व्यापार या व्यवसाय के लाभ तथा प्राप्तियाँ" के अन्तर्गत हानि को केवल तभी अग्रेनीत किया जा सकता है यदि वर्ष के आय/हानि का रिटर्न, रिटर्न जमा करने की अन्तिम तिथि को (जैसा कि भाग 139(1) में निर्धारित है) या उससे पहले जमा कर दिया गया हो ।

ऐसी हानि को जिस वर्ष में हानि हुई है उसके ठीक बाद के आठ सालों तक अग्रेनीत किया जा सकता है ।

उपर्युक्त प्रावधान अनवशोषित डेप्रिसिएशन के मामले में लागू नहीं हैं (अनवशोषित मूल्यह्रास से सम्बन्धित प्रावधानों पर बाद में चर्चा की गयी है )।

भाग 35कघ के तहत निर्दिष्ट व्यापार से होने वाली हानि को किसी अन्य आय के विरुद्ध समायोजित नहीं किया जा सकता, सिवाय निर्दिष्ट व्यापार से होने वाली हानि के (भाग 35कघ कुछ निश्चित निर्दिष्ट व्यापारों पर लागू है जैसे कोल्ड चेन सुविधा की स्थापना, कृषि-उत्पादों के भण्डारण के लिए वेअरहाउसिंग सुविधा की स्थापना तथा प्रचालन, गृहनिर्माण परियोजनाओं का विकास एवं निर्माण, इत्यादि । ऐसी हानि को निर्दिष्ट व्यापार से होने वाली आय के विरुद्ध समायोजित करने के लिए कितने भी वर्षों तक अग्रेनीत किया जा सकता है ।

धारा कघ के अंतर्गत निर्दिष्ट व्यापार से आय को अग्रेषित किया जा सकता है यदि वर्ष, जिसमें हानि उत्पन्न हुई, की आय/हानि की विवरणी को प्रस्तुत करने की नियत तिथि को अथवा उससे पहले व्युत्पन्न होती है जैसा धारा 139(1) के अंतर्गत निर्धारित है।

घुड़ दौड़ के स्वामित्व एवं रखरखाव के व्यापार से होने वाली हानि को दौड़ के घोड़ों के स्वामित्व एवं रखरखाव से होने वाली आय के अलावा किसी आय के विरुद्द समायोजित नहीं किया जा सकता । ऐसी हानि केवल 4 वर्ष की अवधि के लिए अग्रेनीत की जा सकती है ।

यदि सट्टा व्यापार से होने वाली हानि को उस वर्ष में पूरी तरह से समायोजित नहीं किया जा सकता हो जिसमें कि वह उठाई गई है, तब असमायोजित हानि को अगले साल समायोजन के लिए अग्रेनीत किया जा सकता है । आगे के वर्षों में ऐसी हानि केवल सट्टा व्यापार (जो कि वही या कोई दूसरा सट्टा व्यापार हो सकता है) से आय के विरुद्ध समायोजित की जा सकती है ।

सट्टा व्यापार से हानि को केवल तभी अग्रेनीत किया जा सकता है यदि उस वर्ष की आयध्हानि का रिटर्न जिसमें हानि उठायी गयी हो, रिटर्न भरने की अन्तिम तिथि को या उससे पहले (जैसा कि भाग 139(1) में निर्धारित है) भर दिया गया हो ।

ऐसी हानि जिस वर्ष में हानि उठायी गयी है उसके ठीक बाद के चार सालों के लिए अग्रेनीत की जा सकती है ।

उपर्युक्त प्रावधान सट्टा व्यापर के अनवशोषित मूल्यह्रास के मामले में लागू नहीं हैं (अनवशोषित मूल्यह्रास से सम्बन्धित प्रावधानों की चर्चा बाद में की गयी है )।

आयकर कानून के तहत मकान-सम्पत्ति-हानि के समायोजित एवं अग्रेनयन के लिए प्रावधान

यदि "मकान-सम्पत्ति से आय" की मद के तहत हानि को उस वर्ष में पूरी तरह से समायोजित नहीं किया जा सकता जिसमें कि वह उठायी गयी है, तब असमायोजित हानि को अगले वर्ष अग्रेनीत किया जा सकता है ।

अगले वर्षों में ऐसी हानि केवल "मकान-सम्पत्ति से आय" मद के तहत आरोपणीय आय के विरुद्ध समायोजित की जा सकती है ।

ऐसी हानि जिस वर्ष में हानि उठायी गयी है उसके ठीक बाद के आठ वर्षों के लिए अग्रेनीत की जा सकती है ।

"मकान-सम्पत्ति से हानि" की मद के तहत हानि को तब भी अग्रेनीत किया जा सकता है जबकि उस वर्ष का आय/हानि का रिटर्न जिसमें की हानि उठायी गयी हो, रिटर्न भरने की अन्तिम तिथि को या उससे पहले (जैसा कि भाग 139(1) में निर्धारित है ) नहीं भरा गया हो ।

आयकर कानून के तहत पूंजी हानि के समायोजित एवं अग्रेनयन के लिए प्रावधान

यदि "पूंजीगत प्राप्तियाँ" मद के तहत वर्ष के दौरान उठायी गयी हानि उसी वर्ष में समायोजित नहीं की जा सकती है, तब असमायोजित पूंजीगत हानि को अगले साल के लिए अग्रेनीत किया जा सकता है ।

आगे के वर्षों में, ऐसी हानि केवल "पूंजीगत प्राप्तियाँ" मद के अन्तर्गत करारोपणीय आय के विरुद्ध समायोजित की जा सकती है, यद्यपि दीर्घावधि पूंजीगत हानि को केवल दीर्घावधि पूंजीगत प्राप्तियों के विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है । अल्पावधि पूंजीगत हानि को दीर्घावधि पूंजीगत प्राप्तियों तथा अल्पावधि पूंजीगत प्राप्तियों के विरुद्ध भी समायोजित किया जा सकता है ।

ऐसी हानि को जिस वर्ष में हानि उठायी गयी है उसके ठीक बाद के आठ वर्षों के लिए अग्रेनीत किया जा सकता है

ऐसी हानि को केवल तभी अग्रेनीत किया जा सकता है जब उस वर्ष की आय/हानि का रिटर्न जिसमें कि हानि उठायी गयी है रिटर्न भरने की अन्तिम तिथि को या उससे पहले (जैसा कि भाग 139(1) में निर्धारित है) भर दिया गया है ।

अनवशोषित मूल्यह्रास, वैज्ञानिक अनुसन्धान पर अनवशोषित पूंजी व्यय तथा कर्मचारियों के बीच परिवार-नियोजन के प्रचार पर अनवशोषित पूंजी व्यय का अर्थ

कई दूसरी कटौतियों के अलावा, "व्यापार या व्यवसाय से लाभ एवं प्राप्तियाँ" की मद के तहत करारोपणीय आय की गणना के समय किसी व्यक्ति को अनवशोषित मूल्यह्रास, वैज्ञानिक अनुसन्धान पर अनवशोषित पूंजी व्यय तथा कम्पनी द्वारा अपने कर्मचारियों के बीच परिवार-नियोजन के प्रचार पर किये गये अनवशोषित पूंजी व्यय के आधार पर कटौती का दावा करने की अनुमति है ।

यदि उस वर्ष की आय जिसमें कि ये व्यय किये गये हैं इन व्ययों से कम रह जाती है, तब अनवशोषित व्ययों को अगले साल के लिए अनवशोषित मूल्यह्रास, वैज्ञानिक अनुसन्धान पर अनवशोषित पूंजी व्यय तथा कर्मचारियों के बीच परिवार-नियोजन के प्रचार पर अनवशोषित पूंजी व्यय के रूप में अग्रेनीत किया जा सकता है ।

बेहतर समझ के लिए उदाहरण

श्री किरन की व्यापार आय (आयकर कानून के प्रावधानों के तहत परिकलित), मूल्यह्रास के आधार पर कटौती करने से पहले 84,000 रु. है । भाग 32 के प्रावधानों के अनुसार मूल्यह्रास 1,00,000 रु. है । इस स्थिति में अनवशोषित मूल्यह्रास की राशि कितनी होगी ? ''

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यह प्रेक्षित किया जा सकता है कि भाग 32 के तहत मूल्यह्रास के आधार पर कटौती का दावा करने से पहल व्यापार आय 84,000 रु. है तथा भाग 32 के अनुसार अनुमति-प्राप्त मूल्यह्रास 1,00,000 रु. है, इस प्रकार 1,00,000 रु. के मूल्यह्रास के आधार पर कटौती का दावा करने के बाद, 16,000 रु. की हानि होगी ।

यह हानि मूल्यह्रास के आधार पर है, और, अत:, 16,000 रु. की हानि को अनवशोषित मूल्यह्रास कहा जायेगा ।

आयकर कानून के तहत अनवशोषित मूल्यह्रास, वैज्ञानिक अनुसन्धान पर अनवशोषित पूंजी व्यय तथा कर्मचारियों के बीच परिवार-नियोजन के प्रचार पर अनवशोषित पूंजी व्यय के समायोजित से सम्बन्धित प्रावधान

मूल्यह्रास सबसे पहले ''व्यापार या व्यवसाय के लाभ व प्राप्तियों'' शीर्षक के तहत कर हेतु देययोग्य आय से काटी जाती है। यदि ऐसा मूल्यह्रास पिछले वर्ष में कर हेतु देययोग्य ऐसी राशि के समक्ष पूर्ण रूप से समायोजित नही होती है तो अप्रत्यक्ष भाग आने वाले वर्ष के लिए मूल्यह्रास की राशि में जोड़ा जाएगा तथा उस वर्ष (उक्त निर्दिष्टानुसार अन्य भत्तों को भी समान व्यवहार किया जाएगा) के मूल्यह्रास के भाग के तौर पर समझा जाएगा। हालांकि समायोजन की स्थिति में वरीयता का निम्नलिखित आदेश लागू होगा

1) पहले समायोजन वर्तमान वैज्ञानिक अनुसन्धान व्यय, परिवार नियोजन व्यय तथा वर्तमान मूल्यह्रास के लिए किये जा सकते हैं ।

2) दूसरा समायोजन अग्रेनीत व्यापार हानि के लिए किया जाना है ।

3) तीसरा समायोजन अनवशोषित मूल्यह्रास, वैज्ञानिक अनुसन्धान या परिवार नियोजन पर अनवशोषित पूंजी व्यय के लिए किया जाना है ।

व्यापार के गठन में परिवर्तन के मामले में हानि का अग्रेनयन

सामान्यत:, हानि उठाने वाले व्यक्ति को ही हानि को अगले वर्षों में समायोजित करने के लिए अग्रेनीत करने की योग्यता रहती है । यद्यपि व्यापार के पुनर्गठन के कुछ मामलों में, जैसे कि समामेलन, डीमर्जर प्रोप्राइटरी फर्म के कम्पनी में परिवर्तन या साझेदारी फर्म के कम्पनी में परिवर्तन, इत्यादि, पुनर्गठित इकाई को अपनी पूर्ववर्ती इकाई की असमायोजित हानि को अग्रेनीत करने की योग्यता रहती है (दिया है कि इस सम्बन्ध में निर्दिष्ट शर्तें सन्तुष्ट होती हों )।

एक साझेदारी फर्म से किसी साझेदार के सेवानिवृत्त होने के मामले में हानि के अग्रेनयन के सम्बन्ध में प्रावधान

भाग 78 में एक साझेदारी फर्म में किसी साझेदार के सेवानिवृत्त होने या उसकी मृत्यु होने के कारण साझेदारी फर्म के गठन में परिवर्तन होने के मामले में हानि के अग्रेनयन एवं समायोजित से सम्बन्धित प्रावधान शामिल हैं (अर्थात् जबकि साझेदार सेवानिवृत्ति या मृत्यु के कारण फर्म से बाहर चला जाता है) । ऐसे मामले में, हानि का अंश जोकि बाहर जाने वाले साझेदार के कारण हो, फर्म के द्वारा अग्रेनीत नहीं किया जा सकता ।

भाग 78 की बाध्यताएँ केवल हानि के मामले में लागू हैं तथा अनवशोषित मूल्यह्रास, वैज्ञानिक अनुसन्धान पर अनवशोषित पूंजीगत व्यय या परिवार नियोजन व्यय के समायोजन के मामले में लागू नहीं हैं ।

ऐसी कम्पनी जिसमें जनता का पर्याप्त मात्रा में हित न जुड़ा हो उसके मामले में हानि के समायोजित एवं अग्रेनयन के सम्बन्ध में विशेष प्रावधान

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 79 (जैसा वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा संशोधित है) को हानियों के समायोजन और अग्रेषण के लिए मुहैया कराया गया है जहां शेयरधारण में परिवर्तन निम्न्लिखित कंपनियों के मामले में पिछले वर्ष में हुआ हो

कंपनी के मामले में, उस कंपनी के तौर पर जिसमें जनता का वास्तविक हित न हो लेकिन धारा 80-झकग में संदर्भित योग्य स्टार्ट अप के तौर पर नहीं, पिछले वर्ष जिसमें शेयरधारण में परिवर्तन हुआ हो, से पहले के किसी वर्ष में हुई हानि को पिछले वर्ष की आय के समक्ष अग्रेषित और समायोजित किया जाएगा जबतक पिछले वर्ष के अंतिम दिन कम से कम 51 प्रतिशत वोटिंग अधिकार रखने वाली कंपनी के शेयर उस व्यक्ति द्वारा लाभकारी रूप से हो जो वर्ष या वर्षों जिसमें हानि हुई, के अंतिम दिन को वोटिंग अधिकार के कम से कम 51 प्रतिशत कंपनी द्वारा लाभकारी रूप से रखे हो।

2) एक कंपनी के मामले में, एक ऐसी कंपनी होने के नाते जिसमें जनता की पर्याप्त रुचि नहीं है और धारा 80-झकग में संदर्भित एक योग्य स्टार्ट-अप है, पिछले वर्ष से पहले किसी भी वर्ष में हुई हानि जिसमें शेयरधारिता में परिवर्तन हुआ है जगह, को आगे ले जाने और सेट ऑफ करने की अनुमति केवल तभी दी जाएगी जब कंपनी के सभी शेयरधारक जिनके पास पिछले वर्ष के अंतिम दिन वोटिंग पावर रखने वाले शेयर थे, जिसमें नुकसान हुआ था, शेयर जारी रखें चालू वर्ष। इसके अलावा, नुकसान उस वर्ष से शुरू होने वाली 10 वर्षों की अवधि के दौरान किया जाना चाहिए जिसमें कंपनी निगमित हुई।

हालांकि, एक योग्य स्टार्ट-अप के मामले में व्यापार करने में आसानी करने के लिए, वित्त (सं.2) अधिनियम, 2019 द्वारा धारा 79 को संशोधित किया गया है ताकि नजदीकी योग्य स्टार्ट-अप द्वारा, हुई हानि को उक्त निर्दिष्ट दो शर्तों यानी 51 प्रतिशत शेयरधारित का जारी रहना या 100 प्रतिशत मूल शेयरधारकों की निरंतरता जारी रहे (प्रभावी निर्धारण वर्ष 2021-22) में से किसी एक के पूरा होने पर पिछले वर्ष की आय के समक्ष अग्रेषित और समायोजित की जाएगी

आगे, हानि वर्ष जिसमें कंपनी निगमित हुई से प्रारंभ करते हुए 7 वर्षों की अवधि के दौरान होनी चाहिए। हालांकि, धारा 79 के प्रावधान निम्नलिखित मामलो में लागू नहीं होंगे। अन्य शब्दों में, समायोजन और अग्रेषण पर कोई प्रतिबध नहीं होगा यदि

क) शेयरधारण में परिवर्तन शेयरधारक की मृत्यु के परिणामस्वरूप या उपहार देने के लिए शेयरधारक के किसी रिश्तेदार को उपहार के रूप में शेयर के स्थानांतरण के कारण हुआ हो

ख) निर्धारिती विदेशी कंपनी की सहायक है और विदेशी धारण कंपनी इस शर्त के अनुसार अन्य विदेशी कंपनी के साथ विलय या समामेलित हो गई हो कि समामेलन या विघटित विदेशी कंपनी परिणामी विदेशी कंपनी के 51 प्रतिशत हितधारक परिणामी विदेशी कंपनी या समामेलन कंपनी के हितधारक होने के तौर पर रहे

ग) क्षेत्राधिकारी प्रधान आयकर आयुक्त या आयकर आयुक्त को सुनवाई का उचित अवसर दिए जाने के बाद दिवालियापन और ऋणशोधन क्षमता कोड, 2016 के अंतर्गत अनुमोदित समाधान योजना के अनुसार पिछले वर्ष में शेयरधारित में परिवर्तन हुए हों

घ) एक कंपनी और इसकी सहायक और ऐसी सहायक की सहायक कंपनियां, जहां

i नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी), केंद्र सरकार द्वारा दी गई याचिका पर, ने ऐसी कंपनी के निदेशक मंडल को निरस्त कर दिया है और नए निदेशकों को चुन लिया है।

ii शेयरधारित में परिवर्तन एनसीएलटी द्वारा स्वीकृत योजना के समाधान के अनुसार पिछले वर्ष में हुआ हो

ङ) धारा 47 के खंड (viiकग) और (viiकघ) के स्पष्टीकरण में संदर्भित स्थानांतरण के कारण पिछले वर्ष के दौरान शेयरधारिता में परिवर्तन हुआ है।

सामरिक विनिवेश के कारण शेयरधारिता में परिवर्तन

निर्धारण वर्ष 2022-23 से प्रभावी, वित्त अधिनियम, 2022 ने एक और स्थिति पेश की है जिसमें धारा 79 के प्रावधान लागू नहीं होंगे। यह प्रदान किया गया है कि धारा 79 एक पूर्ववर्ती सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी (पीएसयू) पर लागू नहीं होगी, बशर्ते कि ऐसे पूर्व पीएसयू की अंतिम होल्डिंग कंपनी, रणनीतिक विनिवेश के पूरा होने के तुरंत बाद, सीधे या इसके माध्यम से जारी रहे। सहायक या सहायक, कुल मिलाकर ऐसे पीएसयू की मतदान शक्ति का कम से कम 51%।

हालांकि, यह छूट पिछले वर्ष से लागू नहीं होगी जिसमें अंतिम होल्डिंग कंपनी, सीधे या अपनी सहायक या सहायक कंपनियों के माध्यम से, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी की मतदान शक्ति का 51% हिस्सा रखती है। यदि छूट किसी पिछले वर्ष में लागू नहीं होती है, तो धारा 79 के प्रावधान ऐसे पिछले वर्ष और बाद के पिछले वर्षों के लिए लागू होंगे।

पूर्ववर्ती सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी का वही अर्थ होगा जो धारा 72ए(1) के खंड (घ) के स्पष्टीकरण के खंड (ii) में दिया गया है।

तलाशी के दौरान पता चली अघोषित आय के खिलाफ नुकसान का कोई समायोजन नहीं

वित्त अधिनियम, 2022 ने खोज, माँग और सर्वेक्षण के परिणामस्वरूप होने वाले नुकसान के समायोजन को प्रतिबंधित करने के लिए आयकर अधिनियम में एक नई धारा 79ए शामिल की है। यह प्रदान किया गया है कि यदि किसी निर्धारिती के किसी पिछले वर्ष की कुल आय में निम्नलिखित के परिणामस्वरूप पाई गई कोई अघोषित आय शामिल है:

(क) धारा 132 के तहत शुरू की गई खोज; या

(ख) धारा 132 क के तहत की गई एक मांग; या

(ग) धारा 133ए(2क) के अलावा धारा 133क के तहत किया गया एक सर्वेक्षण।

फिर, ऐसे पिछले वर्ष के लिए निर्धारिती की कुल आय की गणना करते समय किसी भी नुकसान का कोई समायोजन, चाहे अग्रेषित हो या अन्यथा, या अनवशोषित मूल्यह्रास, ऐसी अघोषित आय के विरुद्ध अनुमति नहीं दी जाएगी।

अघोषित आय का अर्थ

इस प्रावधान के लिए, 'अघोषित आय' का अर्थ है:

(क) किसी भी पैसे, बुलियन, आभूषण या अन्य मूल्यवान लेख या चीज या खाते की किताबों में किसी भी प्रविष्टि या अन्य दस्तावेजों या लेनदेन के तहत खोज के दौरान पाए गए पिछले वर्ष की कोई भी आय, या तो पूर्ण या आंशिक रूप से प्रतिनिधित्व करती है। धारा 132 या धारा 132क के तहत एक मांग या धारा 133क (2क) के अलावा धारा 133क के तहत एक सर्वेक्षण, जिसमें:

• ऐसे पिछले वर्ष से संबंधित सामान्य पाठ्यक्रम में बनाए गए खाते की पुस्तकों या अन्य दस्तावेजों में खोज या मांग या सर्वेक्षण की तिथि पर या उससे पहले दर्ज नहीं किया गया है; या

• खोज या मांग या सर्वेक्षण, जैसा भी मामला हो, की तारीख से पहले आयुक्त को खुलासा नहीं किया गया है।

पिछले वर्ष की कोई भी आय, या तो पूरी तरह से या आंशिक रूप से, खाते की किताबों में दर्ज किए गए व्यय के संबंध में या पिछले वर्ष से संबंधित सामान्य प्रक्रिया में बनाए गए अन्य दस्तावेजों के संबंध में किसी भी प्रविष्टि द्वारा दर्शाई गई है, जो गलत पाई गई है और जो नहीं होगी ऐसा पाया गया है, अगर खोज शुरू नहीं की गई थी या सर्वेक्षण नहीं किया गया था या मांग नहीं की गई थी।

धारा 79क के प्रावधान निर्धारण वर्ष 2022-23 से प्रभावी हैं।

 

दीर्घ अवधि पूंजीगत लाभ पर एमसीक्यू

 

प्रश्न 1. यदि विशेष स्रोत से आय कर द्वारा छूट योग्य होती है तो ऐसे स्रोत से हानि किसी अन्य आय जो कर हेतु करयोग्य हैं के समक्ष अलग नहीं की जा सकती

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

यदि विशेष स्रोत से आय कर द्वारा छूट योग्य होती है तो ऐसे स्रोत से हानि किसी अन्य आय जो कर हेतु करयोग्य हैं के समक्ष अलग नहीं की जा सकती

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 2. उसी आय के शीर्षक के अंतर्गत अन्य स्रोतों से आय के समक्ष आय के विशेष शीर्षक के अंतर्गत स्रोत से हानि के समायोजन की प्रक्रिया को.............कहा जाता है

(क) अंत: शीर्षक समायोजन (ख) आंतर शीर्षक समायोजन

(ग) हानि का पृथकीकरण (घ) आय का एकत्रीकरण

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

उसी आय के शीर्षक के अंतर्गत अन्य स्रोतों से आय के समक्ष आय के विशेष शीर्षक के अंतर्गत स्रोत से हानि के समायोजन की प्रक्रिया को अंत: शीर्षक समायोजन कहा जाता है

इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 3. हानि का आंतर शीर्षक समायोजन करते समय अल्प अवधि पूंजीगत हानि दीर्घ कालीन पूंजीगत लाभ के समक्ष पृथक नही की जा सकती

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

हानि का आंतर शीर्षक समायोजन करते समय अल्प अवधि पूंजीगत हानि दीर्घ कालीन पूंजीगत लाभ साथ ही साथ अल्प अवधि पूंजीगत लाभ के समक्ष पृथक की जा सकती

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 4. अंतरा-शीर्षक समायोजन करते समय, व्यापार मालिक द्वारा हानि तथा घुड दौड़ अनुरक्षण केवल......................के समक्ष पृथक किया जा सकता है

(क) लॉटरी जीतने से आय

(ख) वर्ग पहेली जीतने से आय

(ग) व्यापार अधिग्रहण तथा घुड दौड अनुरक्षण से आय

(घ) कार्ड गेम से आय

सही उत्तर : (ग)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

व्यापार अधिग्रहण तथा घुड दौड अनुरक्षण से हानि व्यापार अधिग्रहण तथा घुड दौड अनुरक्षण से आय को छोड़कर किसी आय के समक्ष पृथक नही की जा सकती

इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है

प्रश्न 5. हानि का अंत:शीर्षक समायोजन करते समय, व्यापार तथा पेशे द्वारा हानि "वेतन" शीर्षक के अंतर्गत कर हेतु देययोग्य आय के समक्ष पृथक नही की जा सकता है

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

हानि का अंत:शीर्षक समायोजन करते समय, व्यापार तथा पेशे (अनवशोषित मूल्यह्रास सहित) द्वारा हानि "वेतन" शीर्षक के अंतर्गत कर हेतु देययोग्य आय के समक्ष पृथक नहीं की जा सकता है

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है तथा इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 6. "व्यापार अथवा पेशे से लाभ व प्राप्ति" शीर्षक के तहत हानि अग्रषित की जा सकती है भले ही वर्ष की आय/हानि के रिटर्न जिस वर्ष में धारा 139(1) के अंतर्गत निर्धारितानुसार रिटर्न की प्रस्तुति की नियत तिथि को अथवा इससे पूर्व प्रस्तुति न की हो

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

"व्यापार अथवा पेशे से लाभ व प्राप्ति" शीर्षक के तहत हानि अग्रषित की जा सकती हैं भले ही वर्ष की आय/हानि के रिटर्न जिस वर्ष में धारा 139(1) के अंतर्गत निर्धारितानुसार रिटर्न की प्रस्तुति की नियत तिथि को अथवा इससे पूर्व प्रस्तुति न की हो

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 7. "गृह संपत्ति से आय" शीर्षक के तहत हानि उस वर्ष में अग्रषित नही किया जा सकता है जिसमें ऐसी हानि हुई हो, तब असमायोजित हानि उस वर्ष के तुरंत उत्तरगामी वर्ष जिसमें हानि हुई हो से ...................वर्ष के लिए अग्रषित किया जा सकता है

(क) 2 (ख) 5

(ग) 8 (घ) 10

सही उत्तर : (ग)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

प्रभावी निर्धारण वर्ष 2018-19 से, शीर्षक ष्गृह संपत्तिष् के अंतर्गत हानि किसी निर्धारण वर्ष के लिए रू. 2,00,000 की सीमा तक ही किसी अन्य मुख्य आय के समक्ष समायोजित किए जाने की अनुमति है

इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है

गलत उत्तर पर टिप्पणी : विकल्प (ग) सही विकल्प है क्योंकि यह सही प्रावधान प्रदान करता हैं, गलत प्रावधान देने वाले सभी अन्य विकल्प अर्थात् विकल्प (क), (ख) तथा (घ) सही नही हैं

प्रश्न 8. धारा 78 हेतु बाध्यता केवल लाभ के मामले में लागू है तथा अनवशोषित मूल्यह्रास, वैज्ञानिक अनुसंधान अनवशोषित पूंजीगत व्यय अथवा परिवार नियोजन व्यय पर के समायोजन की स्थिति में लागू नही हैं

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 78 में साझेदार (अर्थात् जब साझेदार सेवानिवृत्ति अथवा मृत्यु के कारण बाहर होता है) की मृत्यु अथवा सेवानिवृत्ति हेतु नियम साझेदार फर्म के संविधान में संशोधन की स्थिति में हानि का पृथकीकरण तथा अग्रसण से संबंधित प्रावधान सन्निहित हैं। यदि शेयरों की हानि साझेदार के बाहर जाने के कारण होती है तो फर्म द्वारा अग्रेषण नही होगा। धारा 78 की बाध्यता केवल हानि की स्थिति में लागू होगी तथा अनवशोषित मूल्यह्रास, वैज्ञानिक अनुसंधान अनवशोषित पूंजीगत व्यय अथवा परिवार नियोजन व्यय पर के समायोजन की स्थिति में लागू नही हैं

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है तथा इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 9. कंपनी के मामले में, एक कंपनी, जिसमें जनता का वास्तविक हित नहीं है, के तौर पर लेकिन धारा 80-झकग में संदर्भित योग्य स्टार्ट अप के तौर पर नहीं, यदि व्यक्ति ने वर्ष जिसमें हानि हुई, के अंतिम दिन (यानी 31 मार्च) तक वोटिंग अधिकार का .............. लाभकारी रूप से रखा हो और वर्ष जिसमें कंपनी हानियों को अग्रोषित करना चाहती हो, के अंतिम दिन (यानी 31 मार्च) से अलग हो तो कंपनी ऐसे अग्रेषित हानि को समायोजित नहीं कर सकती।

(क) 20 प्रतिशत (ख) 25 प्रतिशत

(ग) 50 प्रतिशत (घ) 51 प्रतिशत

सही उत्तर : (घ)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

कंपनी की स्थिति में जिसमें लोगों का अधिक हित न हो (अर्थात् नजदीकी धारित कंपनी), यदि लाभार्थी व्यक्ति उस वर्ष में जिसमें हानि हुई थी के अंतिम दिन (अर्थात् 31 मार्च) तथा जिस वर्ष में कंपनी हानि को पृथक अग्रषित विभिन्न हैं की अंतिम दिन (अर्थात् 31 मार्च) के अनुसार वोटिंग पावर का 51 प्रतिशत रखता है तो कंपनी ऐसी हानि को पृथक कर अग्रषित नहीं कर सकती

इसलिए विकल्प (घ) सही विकल्प है