संबद्ध व्यक्ति और अनुकूलक पक्षकार के संबंध में व्यवहार
संबद्ध व्यक्ति और अनुकूलक पक्षकार के संबंध में व्यवहार
99. इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, यह अवधारित करने में कि क्या कोर्इ कर फायदा विद्यमान है,–
(i) ऐसे पक्षकारों को, जो एक-दूसरे के संबंध में संबद्ध पक्षकार हैं, एक ही व्यक्ति माना जा सकेगा;
(ii) किसी अनुकूलक पक्षकार की अनदेखी की जा सकेगी;
(iii) ऐसे अनुकूलक पक्षकार और किसी अन्य पक्षकार को एक ही व्यक्ति माना जा सकेगा;
(iv) ठहराव पर किसी निगमित ढांचे की अनदेखी करके विचार किया जा सकेगा या उस पर ध्यान दिया जा सकेगा।
[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

