अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव का परिणाम
अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव का परिणाम
98. (1) यदि किसी ठहराव को अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव के रूप में घोषित किया जाता है तो ठहराव के कर संबंधी परिणामों का, जिनके अंतर्गत कर फायदे या किसी कर संधि के अधीन किसी फायदे का प्रत्याख्यान किया जाना भी है, ऐसी रीति में, जो मामले की उन परिस्थितियों में उपयुक्त समझी जाए, जिसके अंतर्गत निम्नलिखित रूप में भी, किन्तु जो उन तक सीमित न हो, अवधारण किया जाएगा, अर्थात् :–
(क) भागत: या संपूर्णत: अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव में के किसी उपाय पर ध्यान न देना, उन्हें संयोजित या पुन:विशेषित करना;
(ख) अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव को इस प्रकार मानना, मानो उसे किया अथवा कार्यान्वित ही नहीं किया गया था ;
(ग) किसी अनुकूलक पक्षकार पर ध्यान न देना या किसी अनुकूलक पक्षकार और किसी अन्य पक्षकार को एक ही पक्षकार के रूप में मानना ;
(घ) ऐसे व्यक्तियों को, जो एक-दूसरे के संबंध में संबद्ध व्यक्ति हैं, किसी रकम के कर निरूपण को अवधारित करने के प्रयोजनों के लिए एक ही व्यक्ति मानना ;
(ड़) ठहराव के पक्षकारों के बीच–
(i) किसी पूंजीगत प्रकृति या राजस्व की प्रकृति के किसी प्रोद्भवन या प्राप्ति; या
(ii) किसी व्यय, कटौती, राहत या रिबेट,
का पुन:विनिधान करना; या
(च) (i) ठहराव के किसी पक्षकार के निवास स्थान को; या
(ii) किसी आस्ति या संव्यवहार की अवस्थिति को,
ठहराव के अधीन यथा उपबंधित निवास-स्थान, किसी आस्ति के अवस्थान या संव्यवहार के अवस्थान से भिन्न किसी स्थान पर मानना; या
(छ) किसी निगमित संरचना को ध्यान में रखे बिना किसी ठहराव पर विचार करना या उसकी अवेक्षा करना।
(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए,–
(i) किसी इक्विटी को ऋण या उसके विपर्ययेन माना जा सकेगा;
(ii) पूंजीगत प्रकृति के किसी प्रोद्भवन या प्राप्ति को राजस्व की प्रकृति का या उसके विपर्ययेन माना जा सकेगा; या
(iii) किसी व्यय, कटौती, राहत या रिबेट को पुन:विशेषित किया जा सकेगा।

