अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव
अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव
96. (1) किसी अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव से ऐसा ठहराव अभिप्रेत है, जिसका मुख्य प्रयोजन कर फायदा अभिप्राप्त करने का है और,–
(क) इससे ऐसे अधिकारों या बाध्यताओं का सृजन होता है, जो सामान्यतया असन्निकट रूप से कार्य करने वाले व्यक्तियों के बीच सृजित नहीं होती है;
(ख) उसके परिणामस्वरूप इस अधिनियम के उपबंधों का, प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से, गलत उपयोग या दुरूपयोग होता है;
(ग) इसमें संपूर्णत: या भागत:, वाणिज्यिक सारतत्व नहीं है या धारा 97 के अधीन उसके बारे में यह समझा जाता है कि उसमें वाणिज्यिक सारतत्व नहीं है; या
(घ) वह ऐसे साधनों द्वारा या ऐसी रीति में किया जाता है या कार्यान्वित किया जाता है, जो सामान्यतया सद्भावी प्रयोजनों के लिए अपनाए नहीं जाते हैं।
(2) ऐसे ठहराव के बारे में, जब तक कि निर्धारिती द्वारा उसके प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता है, इस तथ्य के होते हुए भी कि संपूर्ण ठहराव का मुख्य प्रयोजन कोर्इ कर फायदा अभिप्राप्त करने का नहीं है, यह उपधारणा की जाएगी कि वह कोर्इ कर फायदा अभिप्राप्त करने के मुख्य प्रयोजन के लिए किया गया है या कार्यान्वित किया गया है, यदि ठहराव में के किसी उपाय या उसके किसी भाग का मुख्य प्रयोजन कर फायदा अभिप्राप्त करने का है।
[वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा संशोधित रूप में]

