आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 94क

अधिसूचित अधिकारिता वाले क्षेत्र में अवस्थित व्यक्तियों से संव्यवहार के संबंध में विशेष अध्युपाय

धारा

धारा संख्या

94क

अध्याय शीर्षक

अध्याय X - कर वंचन के संबंध में विशेष प्रावधान

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2024 (सं.1)

अधिसूचित अधिकारिता वाले क्षेत्र में अवस्थित व्यक्तियों से संव्यवहार के संबंध में विशेष अध्युपाय

अधिसूचित अधिकारिता वाले क्षेत्र में अवस्थित व्यक्तियों से संव्यवहार के संबंध में विशेष अध्युपाय

अधिसूचित अधिकारिता वाले क्षेत्र में अवस्थित व्यक्तियों से संव्यवहार के संबंध में विशेष अध्युपाय

94क. (1) केन्द्रीय सरकार, भारत के बाहर किसी देश या राज्यक्षेत्र के साथ सूचना के प्रभावी आदान-प्रदान के अभाव को ध्यान में रखते हुए, ऐसे देश या राज्यक्षेत्र को, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी निर्धारिती द्वारा किए गए किन्हीं संव्यवहारों के संबंध में, अधिसूचित अधिकारिता वाले क्षेत्र के रूप में विनिर्दिष्ट कर सकेगी ।

(2) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, यदि कोई निर्धारिती ऐसा कोई संव्यवहार करता है, जिसमें संव्यवहार के पक्षकारों में से एक अधिसूचित अधिकारिता वाले क्षेत्र में अवस्थित कोई व्यक्ति है तो, -

(i) उस संव्यवहार के सभी पक्षकार धारा 92क के अर्थांतर्गत सहयुक्त उद्यम समझे जाएंगे ;

(ii) मूर्त या अमूर्त संपत्ति के क्रय, विक्रय या पट्टे की प्रकृति का या सेवा का उपबंध या उधार देने या धन उधार लेने का कोई संव्यवहार या ऐसा कोई अन्य संव्यवहार, जिसका संबंध निर्धारिती के लाभों, हानियों या आस्तियों से है, जिसके अंतर्गत निर्धारिती द्वारा या उसे प्रदान किए गए या प्रदान किए जाने वाले किसी फायदे, सेवा या सुविधा के संबंध में उपगत या उपगत किए जाने वाले किसी खर्च या व्यय के आबंटन या प्रभाजन के या उसके किसी अभिदाय के लिए पारस्परिक करार या ठहराव भी है, धारा 92ख के अर्थांतर्गत अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार समझा जाएगा,

और धारा 92, धारा 92क, धारा 92ख, धारा 92ग [उपधारा (2) के दूसरे परंतुक के सिवाय], धारा 92गक, धारा 92गख, धारा 92घ, धारा 92ङ और धारा के उपबंध तदनुसार लागू होंगे ।

(3) इस अधिनियम में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी,-

() किसी अधिसूचित अधिकारिता वाले क्षेत्र में अवस्थित किसी वित्तीय संस्था को किए गए किसी संदाय के संबंध में कोई कटौती इस अधिनियम के अधीन तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी, जब तक ऐसा निर्धारिती, ऐसे निर्धारिती की ओर से उक्त वित्तीय संस्था से सुसंगत सूचना की ईप्सा करने के लिए बोर्ड या उसकी ओर से कार्यरत किसी अन्य आय-कर प्राधिकारी को प्राधिकृत करने संबंधी प्राधिकार विहित प्ररूप में प्रस्तुत नहीं कर देता है ; और

() किसी अधिसूचित अधिकारिता वाले क्षेत्र में अवस्थित किसी व्यक्ति के साथ संव्यवहार से उद्भूत होने वाले किसी अन्य व्यय या मोक के संबंध में (जिसके अंतर्गत अवक्षयण भी है), कोई कटौती इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक निर्धारिती के पास इस निमित्त ऐसे अन्य दस्तावेज न हों और वह ऐसी सूचना, जो विहित की जाए, प्रस्तुत नहीं कर देता है ।

(4) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, जहां, किसी पूर्ववर्ष में, निर्धारिती को किसी अधिसूचित अधिकारिता वाले क्षेत्र में अवस्थित किसी व्यक्ति से कोई राशि प्राप्त होती है या उसे क्रेडिट की जाती है और निर्धारिती उस व्यक्ति के या फायदाग्राही स्वामी के (यदि ऐसा व्यक्ति उक्त राशि का फायदाग्राही स्वामी नहीं है) के पास उक्त राशि के होने के स्रोत के बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं देता है या निर्धारिती द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण निर्धारण अधिकारी की राय में संतोषप्रद नहीं है, वहां ऐसी राशि, उस पूर्ववर्ष के लिए निर्धारिती की आय समझी जाएगी ।

(5) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी अधिसूचित अधिकारिता वाले क्षेत्र में अवस्थित कोई व्यक्ति ऐसी कोई राशि या आय या रकम प्राप्त करने का हकदार है, जिस पर अध्याय 17ख के अधीन कर कटौती योग्य है, वहां कर की कटौती निम्नलिखित दरों में से उच्चतम दर पर की जाएगी, अर्थात् :-

() प्रवृत्त दर या दरों पर;

() इस अधिनियम से सुसंगत उपबंधों में विनिर्दिष्ट दर पर;

() तीस प्रतिशत दर पर ।

(6) इस धारा में,-

(i) "किसी अधिसूचित अधिकारिता वाले क्षेत्र में अवस्थित व्यक्ति" के अंतर्गत -

() ऐसा कोई व्यक्ति है, जो अधिसूचित अधिकारिता वाले क्षेत्र का निवासी

है ;

() ऐसा कोई व्यक्ति है, जो व्यष्टि नहीं है, जो अधिसूचित अधिकारिता वाले क्षेत्र में स्थापित है ; या

() अधिसूचित अधिकारिता वाले क्षेत्र में, उपखंड () या उपखंड () के अंतर्गत न आने वाले किसी व्यक्ति का स्थायी स्थापन है ;

(ii) "स्थायी स्थापन" का वही अर्थ है, जो धारा 92च के खंड (iiiक) में परिभाषित है ;

(iii) "संव्यवहार" का वही अर्थ है, जो धारा 92च के खंड (v) में परिभाषित है।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

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