कतिपय मामलों में द्वितीय समायोजन।
10[कतिपय मामलों में द्वितीय समायोजन।
92गड़. (1) जहां अंतरण कीमत के लिए कोर्इ प्राथमिक समायोजन,—
(i) निर्धारिती द्वारा अपनी आय की विवरणी में स्वप्रेरणा से किया गया है;
(ii) निर्धारण अधिकारी द्वारा किया गया है और निर्धारिती द्वारा स्वीकार किया गया है;
(iii) निर्धारिती द्वारा 10क[धारा 92गग के अधीन 1 अप्रैल 2017 को या उसके पश्चात् किए गए] अग्रिम कीमत करार द्वारा अवधारित है;
(iv) धारा 92गख के अधीन विरचित सुरक्षित बंदरगाह नियमों के अनुसार किया गया है; या
(v) दोहरे कराधान को परिवर्जित करने के लिए धारा 90 या धारा 90क के अधीन किए गए करार के अधीन पारस्परिक सहमति की प्रक्रिया के माध्यम से किसी निर्धारिती के संकल्प के परिणामस्वरूप उद्भूत हुआ है,
वहां निर्धारिती द्वितीय समायोजन करेगा :
परंतु इस धारा में अंतर्विष्ट कोर्इ बात लागू नहीं होगी यदि,—
(i) किसी पूर्ववर्ष में प्राथमिक समायोजन की रकम एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है; 10ख[या]
(ii) प्राथमिक समायोजन 1 अप्रैल, 2016 को या उससे पहले प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष की बाबत किया गया है।
10ख[परंतुयह और कि उस उपधारा के, जैसी कि वह वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा उसके संशोधन से पूर्व विद्यमान थी, उपबंधों के अधीन संदत्त कर, यदि कोर्इ हो के किसी प्रतिदाय का दावा और उसे अनुज्ञात नहीं किया जाएगा।]
(2) जहां अंतरण कीमत के लिए प्राथमिक समायोजन के परिणामस्वरूप निर्धारिती की, यथास्थिति, कुल आय में कोर्इ वृद्धि या हानि में कमी हुर्इ है, वहां 10खक[यथास्थिति, अतिरिक्त धन या उसके भाग]को, जो उसके सहयुक्त उद्यम के पास उपलब्ध है, यदि भारत में ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, संप्रत्याविर्त्ात नहीं हुआ है, ऐसे सहयुक्त उद्यम को निर्धारिती द्वारा किया गया अग्रिम समझा जाएगा और ऐसे अग्रिम पर ब्याज को ऐसी रीति में संगणित किया जाएगा जो विहित की जाए।
10ख[स्पष्टीकरण—शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि अतिरिक्त धन या उसके किसी भाग को निर्धारिती के किसी ऐसे सहयुक्त उद्यमों में से किसी उद्यम से, जो भारत में निवासी नहीं है, संप्रत्यावर्तित किया जा सकेगा।]
10ग[(2क) उपधारा (2) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना उस दशा में, जहां अतिरिक्त धन या उसका भाग विहित समय के भीतर संप्रत्यावर्तित नहीं किया गया है, वहां निर्धारिती अपने विकल्प पर, यथास्थिति, ऐसे अतिरिक्त धन या उसके भाग पर अठारह प्रतिशत की दर से अतिरिक्त आय-कर का संदाय कर सकेगा।
(2ख) निर्धारिती द्वारा उपधारा (2क) के अधीन इस प्रकार संदत्त अतिरिक्त धन या उसके भाग पर कर को, संप्रत्यावर्तित नहीं किए गए अतिरिक्त धन या उसके भाग की बाबत कर के अंतिम संदाय के रूप में समझा जाएगा और इस प्रकार संदत्त कर की रकम की बाबत निर्धारिती द्वारा या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उसके लिए किसी अतिरिक्त प्रत्यय का दावा नहीं किया जाएगा।
(2ग) उस रकम की बाबत, जिस पर उपधारा (2क) के उपबंधों के अनुसार कर संदत्त किया गया है, निर्धारिती को इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
(2घ) जहां उपधारा (2क) में निर्दिष्ट अतिरिक्त कर निर्धारिती द्वारा संदत्त किया गया है, वहां उससे उपधारा (1) के अधीन द्वितीय समायोजन करने की और ऐसे कर के संदाय की तारीख से उपधारा (2) के अधीन ब्याज की संगणना करने की अपेक्षा नहीं की जाएगी।]
(3) इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(i) "सहयुक्त उद्यम" का वही अर्थ होगा जो धारा 92क की उपधारा (1) और उपधारा (2) में उसका है;
(ii) "आसन्निकट कीमत" का वही अर्थ होगा जो धारा 92च के खंड (ii) में उसका है;
(iii) "अतिरिक्त धन" से प्राथमिक समायोजन में अवधारित आसन्निकट सिद्धांत और उस कीमत के, जिस पर अंतर्राष्ट्रीय संव्यवहार वास्तविक रूप से किया गया है, बीच का अंतर अभिप्रेत है;
(iv) किसी अंतरण कीमत के लिए "प्राथमिक समायोजन" से आसन्निकट कीमत के अनुसार अंतरण कीमत का अवधारण अभिप्रेत है जिसके परिणामस्वरूप निर्धारिती की, यथास्थिति, कुल आय में किसी वृद्धि या हानि में कमी हुर्इ है;
(v) "द्वितीय समायोजन" से निर्धारिती और उसके सहयुक्त उद्यम की लेखा बहियों में यह पराविर्त्ात करने के लिए कि निर्धारिती और उसके सहयुक्त उद्यम के बीच लाभों का वास्तविक आबंटन प्राथमिक समायोजन के परिणामस्वरूप अवधारित अंतरण कीमत के संगत है, जिसके द्वारा निर्धारिती के नकद खाते और वास्तविक लाभ में असंतुलन को दूर किया जाता है, समायोजन अभिप्रेत है।]
10. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।
10क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2018 से प्रतिस्थापित।
10ख. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2018 अंत:स्थापित।
10खक. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2018 से प्रतिस्थापित।
10ग. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.9.2019 से अंत:स्थापित।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

