अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार का अर्थ
अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार का अर्थ
92ख. (1) इस धारा और धारा 92, धारा 92ग, धारा 92घ और धारा 92ड़ के प्रयोजनों के लिए "अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार" से दो या अधिक सहयुक्त उद्यमों के बीच, जिनमें से कोर्इ एक या दोनों अनिवासी हैं मूर्त या अमूर्त सम्पत्ति से क्रय, विक्रय या पट्टे की प्रकृति का, या सेवाओं के उपबंध का या धन उधार देने या उधार लेने का कोर्इ संव्यवहार या ऐसा कोर्इ अन्य संव्यवहार अभिप्रेत है, जिसका ऐसे उद्यमों के लाभ, आय, हानि या आस्तियों से संबंध है, और इसके अंतर्गत ऐसे उद्यमों में से किसी एक या अधिक को दी गर्इ या दी जाने वाली प्रसुविधा, सेवा या सुविधा के संबंध में उपगत या उपगत की जाने वाली लागत या व्यय को किसी अभिदाय के आबंटन या प्रभाजन के लिए, दो या अधिक सहयुक्त उद्यमों के बीच, कोर्इ परस्पर करार या इंतजाम भी है।
(2) सहयुक्त उद्यम से भिन्न किसी व्यक्ति के साथ किसी उद्यम द्वारा किए गए संव्यवहार के बारे में उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि वह दो सहयुक्त उद्यमों के बीच किया गया संव्यवहार है, यदि ऐसे अन्य व्यक्ति या सहयुक्त उद्यम के बीच सुसंगत संव्यवहार के संबंध में कोर्इ पूर्व करार विद्यमान है या सुसंगत संव्यवहार की शर्तें मुख्यत: ऐसे किसी व्यक्ति और सहयुक्त उद्यम के बीच अवधारित की जाती हैं।
75क[स्पष्टीकरण–शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि,–
(i) "अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार" पद के अंतर्गत निम्नलिखित आएंगे,–
(क) मूर्त संपत्ति का, जिसके अंतर्गत भवन, परिवहन यान, मशीनरी, उपस्कर, औजार, संयंत्र, फर्नीचर, वस्तु या कोर्इ अन्य सामान, उत्पाद या चीज भी है, क्रय, विक्रय, अंतरण, पट्टा या उपयोग;
(ख) अमूर्त संपत्ति का, जिसके अंतर्गत भूमि का उपयोग, प्रतिलिप्यधिकार, पेटेंट, व्यापार-चिन्ह, अनुज्ञप्तियां, फ्रेंचाइज, ग्राहक सूची, विपणन चेनल, ब्रांड, वाणिज्यिक सीक्रेट, व्यवहार्य ज्ञान, औद्योगिक संपत्ति अधिकार, बाह्य डिजाइन या व्यवहार्य तथा नए डिजाइन से संबंधित अधिकारों या समरूप प्रकृति के किन्हीं अन्य कारोबारी या वाणिज्यिक अधिकारों के उपयोग के स्वामित्व या उपबंध का अंतरण भी है, क्रय, विक्रय, अंतरण, पट्टा या उपयोग;
(ग) पूंजीगत वित्तपोषण, जिसके अंतर्गत किसी प्रकार का दीर्घकालिक या अल्पकालिक उधार लेना, ब्याज पर उधार देना या प्रत्याभूति, विपणनयोग्य प्रतिभूतियों का क्रय या विक्रय या कारबार के दौरान उद्भूत किसी प्रकार का अग्रिम, संदाय या आस्थगित संदाय या प्राप्य राशियां या कोर्इ अन्य ऋण भी है;
(घ) सेवाओं का उपबंध, जिसके अंतर्गत बाजार अनुसंधान, बाजार विकास, विपणन प्रबंधन, प्रशासन, तकनीकी सेवा, मरम्मत, डिजाइन, परामर्श, अभिकरण, वैज्ञानिक अनुसंधान, विधिक और लेखांकन संबंधी सेवा भी है;
(ड़) किसी उद्यम द्वारा किसी सहयोजित उद्यम के साथ, इस तथ्य को विचार में लिए बिना कि इसका संव्यवहार के समय या किसी भावी तारीख को ऐसे उद्यमों के लाभ, आय, हानियों या आस्तियों पर प्रभाव है, पुनर्संरचना या पुनर्गठन कारबार का संव्यवहार;
(ii) "अमूर्त संपत्ति" पद के अंतर्गत निम्नलिखित आएंगे,–
(क) विपणन संबंधी अमूर्त आस्तियां, जैसे व्यापार-चिन्ह, व्यापार नाम, ब्रांड नाम, लोगो;
(ख) प्रौद्योगिकी संबंधी अमूर्त आस्तियां, जैसे प्रक्रिया पेटेंट, पेटेंट आवेदन, तकनीकी दस्तावेजीकरण, जैसे प्रयोगशाला नोट बुक, तकनीकी व्यवहार्य-ज्ञान;
(ग) कला संबंधी अमूर्त आस्तियां, जैसे साहित्यिक कृतियां और प्रतिलिप्यधिकार, संगीतात्मक रचनाएं, प्रतिलिप्यधिकार, नक्शे, उत्कीर्णन;
(घ) डाटा प्रसंस्करण संबंधी अमूर्त आस्तियां, जैसे सांपत्तिक कम्प्यूटर साफ्टवेयर, साफ्टवेयर प्रतिलिप्यधिकार, स्वचालित डाटाबेस और एकीकृत सर्किट मास्क्स और मास्टर्स;
(ड़) इंजीनियरी संबंधी अमूर्त आस्तियां, जैसे औद्योगिक डिजाइन, उत्पाद पेटेंट, व्यापार सीक्रेट, इंजीनियरी ड्राइंग और उसके सदृश, रूपरेखा, सांपत्तिक दस्तावेजीकरण;
(च) ग्राहक संबंधी अमूर्त आस्तियां, जैस ग्राहक सूची, ग्राहक संविदाएं, ग्राहक संबंध, खुले क्रयादेश;
(छ) संविदा संबंधी अमूर्त आस्तियां, जैसे अनुकूल प्रदायकर्ता, संविदाएं, अनुज्ञप्ति करार, फ्रेंचाइज करार, गैर-प्रतियोगी करार;
(ज) मानव पूंजी संबंधी अमूर्त आस्तियां, जैसे प्रशिक्षित और संगठित कार्यदल, नियोजन करार, संघीय संविदाएं;
(झ) अवस्थिति संबंधी अमूर्त आस्तियां, जैसे पट्टाधृत हित, खनिज विदोहन अधिकार, सुखाचार, वायु संबंधी अधिकार, जल संबंधी अधिकार;
(ञ) गुडविल संबंधी अमूर्त आस्तियां, जैसे संस्थागत गुडविल, वृत्तिक व्यवसाय गुडविल, वृत्तिक की व्यक्तिगत गुडविल, प्रसिद्ध व्यक्ति की गुडविल, साधारण कारबार वाले समुत्थान का मूल्य;
(ट) पद्धतियां, कार्यक्रम, प्रणालियां, प्रक्रियाएं, अभियान, सर्वेक्षण, अध्ययन, पूर्वानुमान, प्राक्कलन, ग्राहक सूची या तकनीकी डाटा;
(ठ) कोर्इ अन्य वैसी ही मद्, जो अपने भौतिक गुणों की अपेक्षा अपनी बौद्धिक अंतर्वस्तु से अपना मूल्य व्युत्पन्न करती है।]
75क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2002 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा संशोधित रूप में]

