आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 92

असन्निकट कीमत को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार से आय की संगणना

धारा

धारा संख्या

92

अध्याय शीर्षक

अध्याय X - कर वंचन के संबंध में विशेष प्रावधान

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2019 (सं.1)

असन्निकट कीमत को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार से आय की संगणना

असन्निकट कीमत को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार से आय की संगणना

अध्याय 10

कर के परिवर्जन के संबंध में विशेष उपबंध

असन्निकट कीमत को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार से आय की संगणना

92. (1) किसी अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार से होने वाली किसी आय की संगणना असन्निकट कीमत को ध्यान में रखते हुए की जाएगी।

स्पष्टीकरण–शंकाओं को दूर करने के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि किसी अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार से होने वाले किसी व्यय या ब्याज के लिए मोक का अवधारण भी असन्निकट कीमत को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।

(2) जहां किसी अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट देशी संव्यवहार में, दो या अधिक सहयुक्त उद्यम ऐसे किसी एक या अधिक उद्यमों को उपलब्ध कराए गए या उपलब्ध कराए जाने वाले किसी फायदे, सेवा या सुविधा के संबंध में उपगत किए गए या उपगत किए जाने वाले किसी खर्च या व्यय के, यथास्थिति, आबंटन या प्रभाजन के लिए या उसमें किसी अभिदाय के लिए कोर्इ पारस्परिक करार या ठहराव करते हैं वहां ऐसे किसी उद्यम को, यथास्थिति, आबंटित या प्रभाजित या उसके द्वारा अभिदाय किए गए खर्च या व्यय की अवधारण, यथास्थिति, ऐसे फायदे, सेवा या सुविधा की असन्निकट कीमत को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।

(2क) विनिर्दिष्ट देशी संव्यवहार के संबंध में व्यय या ब्याज या किसी लागत या खर्च या किसी आय के आबंटन के लिए किसी मोक की संगणना असन्निकट कीमत को ध्यान में रखते हुए की जाएगी।

(3) इस धारा के उपबंध ऐसे किसी मामले में लागू नहीं होंगे जिसमें उपधारा (1) या उपधारा (2क) के अधीन आय की संगणना या उपधारा (1) या उपधारा (2क) के अधीन किसी व्यय या ब्याज के लिए मोक का अवधारण या उपधारा (2) या उपधारा (2क) के अधीन, यथास्थिति, आबंटित या प्रभाजित या अभिदाय किए गए किसी खर्च या व्यय का अवधारण करने का प्रभाव उस पूर्ववर्ष की बाबत, जिसमें अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट देशी संव्यवहार का करार किया गया था, लेखा बहियों में की गर्इ प्रविष्टियों के आधार पर संगणित, यथास्थिति, कर से प्रभार्य आय को कम करना या हानि को बढ़ाना है।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

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