विदेशों या विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों से करार
अध्याय 9
दोहरे कराधान से राहत
विदेशों या विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों से करार
90. (1) केंद्रीय सरकार भारत से बाहर किसी देश की सरकार या भारत से बाहर विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र से,–
(क) (i) ऐसी आय की बाबत, जिस पर इस अधिनियम के अधीन आय-कर और, यथास्थिति, उस देश या विनििर्देष्ट राज्यक्षेत्र में आय-कर, दोनों का संदाय किया जा चुका है, या
(ii) पारस्परिक आर्थिक संबंधों, व्यापार और विनिधान के संवर्धन के लिए इस अधिनियम के अधीन और, यथास्थिति, उस देश या विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त तत्समान विधि के अधीन प्रभार्य आय-कर की बाबत,
राहत देने के लिए, या
(ख) इस अधिनियम के अधीन 7क[कर अपवंचन या परिवर्जन के माध्यम से अकराधान या अवनत कराधान के लिए अवसरों का सृजन किए बिना (जिसके अंतर्गत किसी अन्य देश या राज्यक्षेत्र के निवासियों के अप्रत्यक्ष फायदे के लिए इस करार में उपबंधित अनुतोषों को प्राप्त करने के उद्देश्य से संधि-खरीदारी ठहरावों के माध्यम से भी सम्मिलित है)] और, यथास्थिति, उस देश या विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में, प्रवृत्त तत्समान विधि के अधीन आय-कर के दोहरे कराधान से बचने के लिए, या
(ग) इस अधिनियम के अधीन या, यथास्थिति, उस देश या विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों में प्रवृत्त तत्समान विधि के अधीन प्रभार्य आय-कर के अपवंचन या उससे बचने को रोकने के लिए जानकारी के आदान-प्रदान या ऐसे अपवंचन या कर से बचने के मामलों के अन्वेषण के लिए, या
(घ) इस अधिनियम के अधीन और, यथास्थिति, उस देश या विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त तत्समान विधि के अधीन आय-कर की वसूली के लिए,
करार कर सकेगी और राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी जो ऐसे करार को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक हों।
(2) जहां केंद्रीय सरकार ने उपधारा (1) के अधीन, यथास्थिति, भारत के बाहर किसी देश की सरकार से या भारत के बाहर विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र से, यथास्थिति, कर की राहत देने के लिए या दोहरे कराधान से बचने के लिए करार किया है वहां ऐसे निर्धारिती के संबंध में, जिसको ऐसा करार लागू होता है, इस अधिनियम के उपबंध उस सीमा तक लागू होंगे जिस तक वे उस निर्धारिती के लिए अधिक फायदाप्रद हैं।
(2क) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, अधिनियम के अध्याय 10क के उपबंध निर्धारिती को लागू होंगे, चाहे ऐसे उपबंध उसके लिए फायदाप्रद नहीं है।
(3) इस अधिनियम या उपधारा (1) में निर्दिष्ट करार में प्रयुक्त किंतु परिभाषित न किए गए किसी पद का, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो और जो इस अधिनियम या करार के उपबंधों से असंगत न हो, वही अर्थ होगा जो उसका केंद्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त राजपत्र में जारी की गई अधिसूचना में उसका है।
(4) ऐसा कोई निर्धारिती, जो निवासी नहीं है जिसे उपधारा (1) में निर्दिष्ट करार लागू होता है, ऐसे करार के अंतर्गत तब तक किसी राहत का दावा करने का हकदार नहीं होगा जब तक उसके द्वारा उसके, यथास्थिति, भारत के बाहर के किसी देश या भारत के बाहर के विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र के निवासी होने का प्रमाणपत्र उस देश या विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र की सरकार से अभिप्राप्त नहीं कर लिया जाता है।
(5) उपधारा (4) में निर्दिष्ट निर्धारिती ऐसे अन्य दस्तावेज और सूचना भी उपलब्ध कराएगा, जो विहित किए जाए।
स्पष्टीकरण 1 – शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि किसी विदेशी कंपनी की बाबत कर का, उस दर से अधिक दर पर, जिस पर कोई देशी कंपनी प्रभार्य है, प्रभार ऐसी विदेशी कंपनी की बाबत कर का कम अनुकूल प्रभार या उद्ग्रहण नहीं समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण 2 – इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ''विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र'' से भारत से बाहर का ऐसा कोई क्षेत्र अभिप्रेत है जो केंद्रीय सरकार द्वारा उस रूप में अधिसूचित किया जाए।
स्पष्टीकरण 3 – शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि जहां उपधारा (1) के अंतर्गत किए गए किसी करार में किसी पद का प्रयोग किया गया है और वह उक्त करार या अधिनियम के अधीन परिभाषित नहीं है, किन्तु जिसका उपधारा (3) के अधीन जारी की गई अधिसूचना में अर्थ दिया गया है और तदधीन जारी की गई अधिसूचना प्रवृत्त है, वहां उस पद के अर्थ के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उस तारीख से प्रभावी है जिसको उक्त करार प्रवृत्त हुआ था।
7कक[स्पष्टीकरण 4–शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि जहां उपधारा (1)
के अधीन किए गए किसी करार में प्रयुक्त किसी पद को उक्त करार में परिभाषित किया गया है, वहां उक्त पद का वही अर्थ होगा जो करार में उसका है और जहां ऐसा पद करार में परिभाषित नहीं है, किंतु अधिनियम में परिभाषित है, वहां उसका वही अर्थ होगा जो अधिनियम में उसका है और केंद्रीय सरकार द्वारा स्पष्टीकरण, यदि कोई हो, में उसे दिया गया है।]
[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

