आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 80थथख

पाठय-पुस्तकों से भिन्न कतिपय पुस्तकों के लेखकों की स्वामिस्व आय, आदि की बाबत कटौती

धारा

धारा संख्या

80थथख

अध्याय शीर्षक

अध्याय VI - कुल आय की गणना में की जाने वाली कटौतियाँ

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2005

पाठय-पुस्तकों से भिन्न कतिपय पुस्तकों के लेखकों की स्वामिस्व आय, आदि की बाबत कटौती

पाठय-पुस्तकों से भिन्न कतिपय पुस्तकों के लेखकों की स्वामिस्व आय, आदि की बाबत कटौती

17क[पाठय पुस्तकों से भिन्न कतिपय पुस्तकों के लेखकों की स्वामिस्व आय, आदि की बाबत कटौती

80थथख. (1) जहां भारत में निवासी किसी व्यष्टि की दशा में, जो लेखक है, सकल कुल आय में किसी पुस्तक के, जो साहित्यिक, कलात्मक या वैज्ञानिक प्रकृति की कृति है, प्रतिलिप्याधिकार में उसके किन्हीं हितों को समनुदिष्ट या अनुदत्त करने के लिए किसी एकमुश्त प्रतिफल के मद्दे या ऐसी पुस्तक की बाबत स्वामिस्व या प्रतिलिप्याधिकार फीस (चाहे एकमुश्त या अन्यथा प्राप्य हो) के मद्दे उसकी वृत्ति के प्रयोग में उसके द्वारा व्युत्पन्न कोर्इ आय भी सम्मिलित है, वहां इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट रीति में संगणित ऐसी आय में से कटौती अनुज्ञात की जाएगी।

(2) इस धारा के अधीन कटौती, उपधारा (1) में निर्दिष्ट ऐसी संपूर्ण आय के या तीन लाख रुपये की रकम के, इनमें से जो भी कम हो, बराबर होगी :

परंतु जहां ऐसे स्वामिस्व या प्रतिलिप्याधिकार फीस के रूप में आय, पुस्तक में निर्धारिती के सभी अधिकारों के बदले एकमुश्त प्रतिफल नहीं है वहां ऐसी आय के संबंध में किए जाने वाले व्ययों को अनुज्ञात करने से पूर्व आय के उतने भाग को, जो पूर्ववर्ष के दौरान विक्रय की गर्इ ऐसी पुस्तकों के मूल्य के पन्द्रह प्रतिशत से अधिक हो, छोड़ दिया जाएगा :

परंतु यह और कि भारत के बाहर किसी स्रोत से उपार्जित किसी आय की बाबत, उतनी आय को इस धारा के प्रयोजन के लिए हिसाब में लिया जाएगा जो निर्धारिती द्वारा या उसकी ओर से उस पूर्ववर्ष के अंत से, जिसमें ऐसी आय उपार्जित की गर्इ है छह मास की अवधि के भीतर या ऐसी और अवधि के भीतर, जो सक्षम प्राधिकारी इस निमित्त अनुज्ञात करे, संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा के रूप में भारत में लार्इ जाती है।

(3) इस धारा के अधीन कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी, जब तक कि निर्धारिती, आय की विवरणी के साथ विहित प्ररूप और विहित रीति में, ऐसी विशिष्टियों को उल्लिखित करते हुए, जो विहित की जाएं उपधारा (1) में निर्दिष्ट निर्धारिती को, ऐसा संदाय करने के लिए उत्तरदायी किसी व्यक्ति द्वारा सम्यक् रूप से सत्यापित कोर्इ प्रमाणपत्र नहीं दे देता है।

(4) इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती भारत के बाहर किसी स्रोत से उपार्जित किसी आय की बाबत तब तक अुनज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि निर्धारिती, विहित रीति में आय की विवरणी के साथ विहित प्राधिकारी से विहित प्ररूप में एक प्रमाणपत्र नहीं दे देता है।

(5) जहां इस धारा में निर्दिष्ट किसी आय की बाबत किसी पूर्ववर्ष के लिए कटौती का दावा किया गया है और उसे अनुज्ञात किया गया है वहां ऐसी आय की बाबत कोर्इ कटौती इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन किसी निर्धारण वर्ष में अनुज्ञात नहीं की जाएगी।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,--

() "लेखक" के अंतर्गत संयुक्त (सह)लेखक भी है;

() "पुस्तक" के अंतर्गत विवरणिका, व्याख्यान, डायरी, मार्गदर्शिका (गाइड), जर्नल, पत्रिकाएं, समाचारपत्र, पुस्तिकाएं, विद्यालयों के लिए पाठय पुस्तकें, लघु ग्रंथ और इसी प्रकार के अन्य प्रकाशन, चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हों, नहीं आते हैं;

() "सक्षम प्राधिकारी" से भारतीय रिजर्व बैंक या ऐसा अन्य प्राधिकारी अभिप्रेत है जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन विदेशी मुद्रा में संदायों और व्यवहारों को विनियमित करने के लिए प्राधिकृत है;

() स्वामिस्व या प्रतिलिप्याधिकार की फीस के संबंध में, "एकमुश्त राशि" के अंतर्गत ऐसे स्वामिस्वों या प्रतिलिप्याधिकार की फीस मद्दे किया गया ऐसा अग्रिम संदाय भी है, जिसे वापस नहीं किया जाना है।]

 

17क. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2005 तथा विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा संशोधित रूप में]

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