नए कर्मकारों के नियोजन की बाबत कटौती
40[नए कर्मकारों के नियोजन की बाबत कटौती
80ञञकक. (1) जहां किसी निर्धारिती की, जो भारतीय कंपनी है, सकल कुल आय में किसी वस्तु या चीज के विनिर्माण या उत्पादन में लगे हुए किसी औद्योगिक उपक्रम से व्युत्पन्न कोर्इ लाभ और अभिलाभ सम्मिलित हैं, वहां उपधारा (2) में उल्लिखित शर्तों के अधीन रहते हुए तीन निर्धारण वर्षों के लिए जिसके अंतर्गत उस पूर्ववर्ष से सुसंगत जिसमें ऐसा नियोजन दिया गया निर्धारण वर्ष भी है के पूर्ववर्ष में, निर्धारिती द्वारा नियोजित नए नियमित कर्मकारों को संदत्त अतिरिक्त मजदूरी के तीस प्रतिशत के बराबर रकम की कटौती अनुज्ञात की जाएगी।
(2) उपधारा (1) के अधीन कोर्इ कटौती निम्नलिखित दशाओं में अनुज्ञात नहीं की जाएगी–
(क) यदि औद्योगिक उपक्रम का गठन विद्यमान उपक्रम के खंडन या पुनर्निर्माण अथवा किसी अन्य औद्योगिक उपक्रम के साथ समामेलन द्वारा हुआ है;
(ख) जब तक कि निर्धारिती आय की विवरणी के साथ धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे के स्पष्टीकरण में यथा परिभाषित लेखापाल की रिपोर्ट उसमें ऐसी विशिष्टियां, जो विहित41 की जाएं, देते हुए प्रस्तुत नहीं कर देता है;
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–
(i) ''अतिरिक्त मजदूरी'' पद से पूर्ववर्ष के दौरान नियोजित एक सौ कर्मकारों से अधिक नए नियमित कर्मकारों को संदत्त मजदूरी अभिप्रेत है :
परन्तु विद्यमान उपक्रम की दशा में, अतिरिक्त मजदूरी शून्य होगी यदि वर्ष के दौरान नियोजित नियमित कर्मकारों की संख्या में वृद्धि पूर्ववर्ती वर्ष के अंतिम दिन को ऐसे उपक्रम में नियोजित विद्यमान संख्या के दस प्रतिशत से कम है;
(ii) ''नियमित कर्मकार'' पद के अंतर्गत निम्नलिखित नहीं है–
(क) आकस्मिक कर्मकार; या
(ख) ठेकाश्रम के द्वारा नियोजित कोर्इ कर्मकार; या
(ग) पूर्ववर्ष के दौरान तीन सौ दिन से कम की अवधि के लिए नियोजित कोर्इ अन्य कर्मकार;
(iii) ''कर्मकार'' पद का वही अर्थ होगा जो औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) की धारा 242 के खंड (ध) में है।]
40. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से अंत:स्थापित।
41. रिपोर्ट के फार्म के लिए, देखिए नियम 19कख और फार्म सं. 10घक.
42. "कर्मकार" की परिभाषा कि लिए, जिसे औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 2 के खंड (ध) में परिभाषित किया गया है, देखिए परिशिष्ट एक।
[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

