उच्चतर शिक्षा हेतु लिए गए उधार पर ब्याज की बाबत कटौती
उच्चतर शिक्षा हेतु लिए गए उधार पर ब्याज की बाबत कटौती
80ड़. (1) किसी ऐसे निर्धारिती की, जो व्यष्टि है, कुल आय की संगणना करने में, इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए अपनी उच्चतर शिक्षा जारी रखने के प्रयोजन के लिए या अपने नातेदार की उच्चतर शिक्षा के प्रयोजन के लिए किसी वित्तीय संस्था या किसी अनुमोदित पूर्त संस्था से उसके द्वारा लिए गए उधार पर ब्याज के रूप में पूर्ववर्ष में उसके द्वारा संदत्त किसी रकम की कर से प्रभार्य उसकी आय में से कटौती की जाएगी।
(2) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कटौती आरम्भिक निर्धारण वर्ष और ऐसे आरंभिक निर्धारण वर्ष के ठीक बाद के सात निर्धारण वर्षों के संबंध में या निर्धारिती द्वारा उपधारा (ं1) में निर्दिष्ट ब्याज के पूर्ण रूप से संदत्त किए जाने तक, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, कुल आय की संगणना करने में अनुज्ञात की जाएगी।
(3) इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) "अनुमोदित पूर्त संस्था" से, यथास्थिति, धारा 10 के खंड (23ग) में विनिर्दिष्ट संस्था या उसके अधीन पूर्त प्रयोजनों के लिए स्थापित और विहित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित संस्था अथवा धारा 80छ की उपधारा (2) के खंड (क) में निर्दिष्ट कोर्इ संस्था अभिप्रेत है;
(ख) "वित्तीय संस्था" से कोर्इ ऐसी बैंककारी कंपनी, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसमें उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोर्इ बैंक या बैंककारी संस्था भी सम्मिलित है) या कोर्इ ऐसी अन्य वित्तीय संस्था अभिप्रेत है, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे;
(ग) "उच्चतर शिक्षा" से केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकारी द्वारा या केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकारी द्वारा ऐसा करने के लिए प्राधिकृत किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा मान्यताप्राप्त किसी विद्यालय, बोर्ड या विश्वविद्यालय से उच्चतर माध्यमिक परीक्षा या उसके समतुल्य कोर्इ परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् लिया गया कोर्इ अध्ययन पाठ्यक्रम अभिप्रेत है;
(घ) "आरंभिक निर्धारण वर्ष" से ऐसे पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष अभिप्रेत है जिसमें निर्धारिती उधार पर ब्याज चुकता करना आरंभ करता है;
(ड़) किसी व्यष्टि के संबंध में "नातेदार" से, उस व्यष्टि की पत्नी या पति और बच्चे अथवा वह छात्र अभिप्रेत है जिसका कि वह व्यष्टि विधिक संरक्षक है।
[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

