आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 80ड़

उच्चतर शिक्षा हेतु लिए गए उधार पर ब्याज की बाबत कटौती

धारा

धारा संख्या

80ड़

अध्याय शीर्षक

अध्याय VIक - कुल आय की गणना में की जाने वाली कटौतियाँ

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2009

उच्चतर शिक्षा हेतु लिए गए उधार पर ब्याज की बाबत कटौती

उच्चतर शिक्षा हेतु लिए गए उधार पर ब्याज की बाबत कटौती

86[उच्चतर शिक्षा हेतु लिए गए उधार पर ब्याज की बाबत कटौती

80ड़. (1) किसी ऐसे निर्धारिती की, जो व्यष्टि है, कुल आय की संगणना करने में, इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए अपनी उच्चतर शिक्षा जारी रखने के प्रयोजन के लिए 87[या अपने नातेदार की उच्चतर शिक्षा के प्रयोजन के लिए] किसी वित्तीय संस्था या किसी अनुमोदित पूर्त संस्था से उसके द्वारा लिए गए उधार पर ब्याज के रूप में पूर्ववर्ष में उसके द्वारा संदत्त किसी रकम की कर से प्रभार्य उसकी आय में से कटौती की जाएगी।

(2) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कटौती आरम्भिक निर्धारण वर्ष और ऐसे आरंभिक निर्धारण वर्ष के ठीक बाद के सात निर्धारण वर्षों के संबंध में या निर्धारिती द्वारा उपधारा (ं1) में निर्दिष्ट ब्याज के पूर्ण रूप से संदत्त किए जाने तक, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, कुल आय की संगणना करने में अनुज्ञात की जाएगी।

(3) इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

() "अनुमोदित पूर्त संस्था" से, यथास्थिति, धारा 10 के खंड (23) में विनिर्दिष्ट संस्था या उसके अधीन पूर्त प्रयोजनों के लिए स्थापित और 88[विहित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित] संस्था अथवा धारा 80छ की उपधारा (2) के खंड () में निर्दिष्ट कोर्इ संस्था अभिप्रेत है;

() "वित्तीय संस्था" से कोर्इ ऐसी बैंककारी कंपनी, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसमें उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोर्इ बैंक या बैंककारी संस्था भी सम्मिलित है) या कोर्इ ऐसी अन्य वित्तीय संस्था अभिप्रेत है, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा89, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे;

() "उच्चतर शिक्षा" से इंजीनियरी, मेडिकल साइंस, प्रबंधन में किसी स्नातक या स्नातकोत्तर पाठîक्रम के लिए या प्रयुक्त विज्ञान या शुद्ध विज्ञान में, जिसमें गणित और सांख्यिकी सम्मिलित है, स्नातकोत्तर पाठîक्रम के लिए पूर्णकालिक अध्ययन अभिप्रेत है;

वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.4.2010 से धारा 80ड़ की उपधारा (3) के विद्यमान खंड (ग) के स्थान पर निम्नलिखित खंड (ग) रखा जाएगा :

(ग) "उच्चतर शिक्षा" से केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकारी द्वारा या केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकारी द्वारा ऐसा करने के लिए प्राधिकृत किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा मान्यताप्राप्त किसी विद्यालय, बोर्ड या विश्वविद्यालय से उच्चतर माध्यमिक परीक्षा या उसके समतुल्य कोर्इ परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् लिया गया कोर्इ अध्ययन पाठ्यक्रम अभिप्रेत है;

() "आरंभिक निर्धारण वर्ष" से ऐसे पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष अभिप्रेत है जिसमें निर्धारिती उधार पर ब्याज चुकता करना आरंभ करता है;]

89क[() किसी व्यष्टि के संबंध में, "नातेदार" से उस व्यष्टि की पत्नी या पति और बच्चे अभिप्रेत हैं।]

वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.4.2010 से धारा 80ड़ की उपधारा (3) के विद्यमान खंड (ड़) के स्थान पर निम्नलिखित खंड (ड़) रखा जाएगा :

(ड़) किसी व्यष्टि के संबंध में "नातेदार" से, उस व्यष्टि की पत्नी या पति और बच्चे अथवा वह छात्र अभिप्रेत है जिसका कि वह व्यष्टि विधिक संरक्षक है।

 

86. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से यथा अंत:स्थापित तथा वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से संशोधित धारा 80ड़ इस प्रकार थी :

'80ड़. उच्चतर शिक्षा हेतु लिए गए उधार के चुकाने की बाबत कटौती.–(1) किसी ऐसे निर्धारिती की, जो व्यष्टि है, कुल आय की संगणना करने में, इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए, अपनी उच्चतर शिक्षा जारी रखने के प्रयोजन के लिए किसी वित्तीय संस्था या अनुमोदित पूर्त संस्था से उसके द्वारा लिए गए उधार या ऐसे उधार पर ब्याज की वापसी के रूप में उसके द्वारा पूर्ववर्ष में किए गए किसी भुगतान की रकम की, कर से प्रभार्य उसकी आय में से कटौती की जाएगी :

परन्तु ऐसी रकम जिसकी इस प्रकार कटौती की जा सकेगी चालीस हजार रुपए से अधिक नहीं होगी।

(2) उपधारा (1) में उल्लिखित कटौती, आरंभिक निर्धारण वर्ष और ऐसे आरंभिक निर्धारण वर्ष के ठीक बाद के सात निर्धारण वर्षों की बाबत या उपधारा (1) में निर्दिष्ट उधार और साथ ही उस पर ब्याज के निर्धारिती द्वारा पूर्णतया भुगतान किए जाने तक, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, कुल आय की संगणना करने में अनुज्ञात की जाएगी।

(3) इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

() "अनुमोदित पूर्त संस्था" से अभिप्रेत है, यथास्थिति, धारा 10 के खंड (23ग) में निर्दिष्ट संस्था या उसके अधीन पूर्त प्रयोजनों के लिए स्थापित और केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित संस्था अथवा धारा 80छ की उपधारा (2) के खंड () में उल्लिखित कोर्इ संस्था;

() "वित्तीय संस्था" से अभिप्रेत है कोर्इ ऐसी बैंककारी कंपनी जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसमें उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोर्इ बैंक या बैंककारी संस्था भी शामिल है) या कोर्इ ऐसी अन्य वित्तीय संस्था, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त उल्लिखित करे;

() "उच्चतर शिक्षा" से इंजीनियरी, मेडिकल साइंस, प्रबंध में किसी स्नातक या स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए या अनुप्रयुक्त विज्ञान या शुद्ध विज्ञान में, जिसमें गणित और सांख्यिकी सम्मिलित है, स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए पूर्णकालिक अध्ययन अभिप्रेत है;

() "आरम्भिक निर्धारण वर्ष" से ऐसे पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष अभिप्रेत है जिसमें निर्धारिती उधार या उस पर ब्याज चुकता करना आरम्भ करता है।

इससे पूर्व, धारा 80ड़, जिसका पाश्र्वशीर्ष सेवानिवृत्ति वार्षिकियां सुनिश्चित करने के लिए संदाय की बाबत कटौती या, वित्त (सं. 2) अधिनियम 1967, द्वारा 1.4.1968 से अंत:स्थापित की गर्इ थी। तत्पश्चात् धारा 80ड़ का वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1969 से तथा वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1984 से तथा बाद में प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 संशोधन किया गया था। यह विषय मूल धारा 80ग से संबंधित था जो कि वित्त अधिनियम 1965 द्वारा 1.4.1965 से अंत:स्थापित की गर्इ थी।'

87. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2008 से अंत:स्थापित।

88. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2008 से "केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

89. अधिसूचित संस्थाओं और परिपत्र सं. 688, तारीख 23.8.1994 के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

89क. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2008 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

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