आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 80घ

स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के संबंध में कटौती

धारा

धारा संख्या

80घ

अध्याय शीर्षक

अध्याय VI-क - कुल आय की गणना में की जाने वाली कटौतियाँ

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2004

स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के संबंध में कटौती

स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के संबंध में कटौती

51[चिकित्सा बीमा प्रीमियम की बाबत कटौती

80घ. (1) किसी निर्धारिती की, कुल आय की संगणना करने में उपधारा (2) में उल्लिखित और उसकी कर से प्रभार्य आय में से पूर्ववर्ष में उसके द्वारा चैक से संदत्त राशि की, निम्नलिखित दरों पर कटौती की जाएगी, अर्थात् :–

(i) उस दशा में, जहां ऐसी राशि कुल मिलाकर 52[दस] हजार रुपए से अधिक नहीं है, वहां ऐसी संपूर्ण राशि; और

(ii) किसी अन्य दशा में, 52[दस] हजार रुपए :

53[परन्तु जहां उपधारा (2) में उल्लिखित राशि, निर्धारिती या उसकी पत्नी या उसके पति या आश्रित माता या पिता या कुटुम्ब के किसी सदस्य के स्वास्थ्य संबंधी बीमा कराने या उसे चालू रखने के लिए भुगतान की जाती है, यदि निर्धारिती हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है और वरिष्ठ नागरिक है, वहां इस धारा के उपबंध का इस प्रकार प्रभाव होगा मानो "दस हजार रुपए" शब्दों के स्थान पर "पंद्रह हजार रुपए" शब्द रखे गए हों।]

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट राशि निम्नलिखित होगी, अर्थात् :–

() जहां निर्धारिती कोर्इ व्यष्टि है वहां निर्धारिती के स्वास्थ्य अथवा निर्धारिती की पत्नी या पति, आश्रित माता या पिता या आश्रित बच्चों के स्वास्थ्य का बीमा कराने या उसे प्रवर्तन में रखने के लिए भुगतान की गर्इ राशि;

() जहां निर्धारिती कोर्इ हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है, वहां कुटुम्ब के किसी सदस्य के स्वास्थ्य का बीमा कराने के लिए या उसे प्रवर्तन में रखने के लिए भुगतान की गर्इ राशि:

() 54[* * *]

55[परन्तु ऐसा बीमा–

() साधारण बीमा कारबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) की धारा 9 के अधीन बनाए गए भारतीय साधारण बीमा निगम द्वारा इस निमित्त बनार्इ गर्इ और केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अनुमोदित स्कीम56 के अनुसार होगा; या

() किसी अन्य बीमाकर्ता द्वारा इस निमित्त बनार्इ गर्इ और बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा इस निमित्त अनुमोदित स्कीम57 के अनुसार होगा।

58[स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजन के लिए 'वरिष्ठ नागरिक" का वही अर्थ है जो धारा 80घघख के स्पष्टीकरण में उसका है।]

 

51. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से अंत:स्थापित। वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1968 से, असुविधाग्रस्त आश्रितों के चिकित्सीय उपचार आदि की बाबत कटौती से संबंधित मूल धारा 80घ वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से अंत:स्थापित पुरानी धारा 80ख के स्थान पर पुर:स्थापित की गर्इ थी। वित्त अधिनियम, 1981 द्वारा 1.4.1982 से और वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1969 से यथा संशोधित मूल धारा 80घ, वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से लोप किए जाने के पूर्व निम्नानुसार थी :

"80घ. असुविधाग्रस्त आश्रितों के चिकित्सीय उपचार आदि की बाबत कटौती–(1) जहां कोर्इ निर्धारिती, जो भारत में निवासी है, व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है और जिसने आय-कर से प्रभार्य अपनी आय में से पूर्ववर्ष के दौरान कोर्इ व्यय किसी ऐसे व्यक्ति के चिकित्सीय उपचार (जिसमें परिचर्या भी है) के लिए उपगत किया है, जो–

() यथास्थिति, उस व्यष्टि का नातेदार है या उस हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब का सदस्य है और अपने रखरखाव या भरणपोषण के लिए ऐसे व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब से भिन्न किसी व्यक्ति पर आश्रित नहीं है; तथा

() ऐसी शारीरिक या मानसिक निर्योग्यता से ग्रस्त है, जिसके बारे में रजिस्टर्ड चिकित्सा व्यवसायी द्वारा प्रमाणित है कि वह सामान्य कार्य या लाभप्रद नियोजन में लगने की उस व्यक्ति के, (जिसे इसके पश्चात् इस धारा में असुविधाग्रस्त आश्रित कहा गया है) सामथ्र्य को काफी घटा देने का प्रभाव रखती है,

वहां निर्धारिती को पूर्ववर्ष के संबंध में उसकी कुल आय की संगणना में, उपधारा (2) में उल्लिखित रकम की कटौती, इस धारा के उपबंधों के अनुसार और अधीन रहते हुए, अनुज्ञात की जाएगी।

(2) उपधारा (1) के अधीन कटौती होगी–

(i) उस दशा में, जिसमें असुविधाग्रस्त आश्रित पूर्ववर्ष के दौरान एक सौ बयासी दिन या उससे अधिक कालावधि के लिए किसी अस्पताल में या परिचर्यागृह में या चिकित्सीय संस्था मंं या किसी ऐसी अन्य संस्था में भर्ती किया गया है जिसका कि असुविधाग्रस्त व्यक्तियों की देखरेख के लिए संस्था होना केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित हो और यथास्थिति, ऐसे अस्पताल या परिचर्यागृह या चिकित्सीय या अन्य संस्था की उसके चिकित्सीय उपचार (जिसके अंतर्गत परिचर्या भी है) के लिए फीसें और प्रभार देय हैं, चार हजार आठ सौ रुपए की राशि; या

(ii) किसी अन्य दशा में, बारह सौ रुपए की राशि।"

52. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से "छह" के स्थान प्रतिस्थापित। इससे पूर्व, "तीन" के स्थान पर "छह" वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से रखा गया था।

53. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।

54. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1987 से भूतलक्षी प्रभाव से लोप किया गया। लोप किए जाने के पूर्व, आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से यथा अंत:स्थापित खंड () निम्नानुसार था :

"() जहां निर्धारिती, गोवा राज्य और नागर हवेली एवं दमण और दीव संघ राज्यक्षेत्रों में प्रवृत्त समुदाय संपत्ति की पद्धति द्वारा शासित केवल पति और पत्नी से मिलकर बने व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय में से कोर्इ है, वहां ऐसे संगम या निकाय के किसी सदस्य के स्वास्थ्य पर अथवा ऐसे संगम या निकाय के किसी सदस्य की आश्रित संतानों के स्वास्थ्य पर बीमा प्रभावी बनाने या प्रवृत्त रखने के लिए संदत्त राशि;"

55. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व परन्तुक इस प्रकार था :

"परन्तु ऐसा बीमा, साधारण बीमा कारबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) की धारा 9 के अधीन बनाए गए भारतीय साधारण बीमा निगम द्वारा इस निमित्त बनार्इ गर्इ और केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित स्कीम के अनुसार होगा।"

56. अस्पताल में भर्ती या अधिवासी रूप में अस्पताल में भर्ती के फायदों से संबंधित स्कीम के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ सर्कुलर्स।

57. अस्पताल में भर्ती या अधिशासी रूप में अस्पताल में भर्ती के फायदों से संबंधित स्कीम के लिये देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ सर्कुलर्ज।

58. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा संशोधित रूप में]

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