आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 80क

कुल आय की संगणना करने में की जाने वाली कटौतियां

धारा

धारा संख्या

80क

अध्याय शीर्षक

अध्याय VI - कुल आय की गणना में की जाने वाली कटौतियाँ

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2005

कुल आय की संगणना करने में की जाने वाली कटौतियां

कुल आय की संगणना करने में की जाने वाली कटौतियां

8[अध्याय 6

कुल आय की संगणना करने में की जाने वाली कटौतियां

क.–साधारण

कुल आय की संगणना करने में की जाने वाली कटौतियां

80क. (1) किसी निर्धारिती की कुल आय संगणित करने में, उसकी सकल कुल आय में से वे कटौतियां, जो धारा 80ग से 9[80प] तक में विनिर्दिष्ट हैं, इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार और अधीन अनुज्ञात की जाएंगी।

(2) इस अध्याय के अधीन कटौतियों10 की संकलित रकम निर्धारिती की सकल कुल आय से किसी भी दशा में अधिक न होगी।

11[(3) जहां किसी व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की कुल आय की संगणना करने में, धारा 80छ या धारा 80छछक 11क[या धारा 80छछग] या धारा 80जज या धारा 80जजक या धारा 80जजख या धारा 80जजग या धारा 80जजघ या धारा 80झ या धारा 80झक 12[या धारा 80झख] या धारा 80ञ13 या धारा 80ञञ के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञेय है, वहां व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय के सदस्य की कुल आय की संगणना करने में उसी धारा के अधीन कोर्इ कटौती, व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की आय में ऐसे सदस्य के अंश के संबंध में नहीं की जाएगी।]

(4) 14[* * *]

 

8. अध्याय 6क, जिसमें धाराएं 80क, 80ख, 80ग, 80घ, 80ड़, 80च, 80छ, 80ज, 80झ, 80ञ, 80ट, 80ठ, 80ड, 80ढ, 80ण, 80त, 80थ, 80द, 80ध और 80न सम्मिलित हैं, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1968 से प्रतिस्थापित किया गया था। मूल अध्याय जिसमें केवल धाराएं 80क से 80घ सम्मिलित थीं, वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से अंत:स्थापित किया गया था। मूल अध्याय में धारा 80क का वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से संशोधन किया गया था और वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से एक नर्इ धारा 80ड़ अंत:स्थापित की गर्इ थी।

9. वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से ''80फफ'' के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से ''80प'' के स्थान पर ''80फफ'' और वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1969 से ''80न'' के स्थान पर ''80प'' रखा गया था।

10. ''कटौतियां'' पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

11. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से उपधारा (3) के स्थान पर प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (3) कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1971 द्वारा 1.4.1972 से, वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से, प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1974 से, वित्त अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1975 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से, वित्त अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.4.1978 से, वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1980 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.4.1981 से, वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1983 से, वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1983/1.4.1984 से, वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से, वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से और वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से यथा संशोधित।

11क. निर्वाचन और अन्य संबंधित विधियां (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 11.9.2003 से अंत:स्थापित।

12. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।

13. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1989 से भूतलक्षी प्रभाव से अब इसका लोप कर दिया गया है।

14. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1979 से लोप किया गया। मूलत: उपधारा (4), वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.4.1977 से अंत:स्थापित की गर्इ थी।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2005 तथा विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा संशोधित रूप में]

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