आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 80ण

कतिपय विदेशी उद्यमों से स्वामिस्व आदि के संबंध में कटौती

धारा

धारा संख्या

80ण

अध्याय शीर्षक

अध्याय VIक - कुल आय की गणना में की जाने वाली कटौतियाँ

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2015

कतिपय विदेशी उद्यमों से स्वामिस्व आदि के संबंध में कटौती

कतिपय विदेशी उद्यमों से स्वामिस्व आदि के संबंध में कटौती

82[83कतिपय विदेशी उद्यमों से स्वामिस्व आदि के संबंध में कटौती

8480ण. 85[जहां किसी निर्धारिती की, जो भारतीय कंपनी है 86[या (कंपनी से भिन्न) ऐसा कोर्इ व्यक्ति है जो भारत में निवासी है] सकल कुल आय में] वह आय सम्मिलित है 87[जिसे निर्धारिती द्वारा भारत के बाहर 88[***] किसी पेटेंट, आविष्कार, डिजाइन या रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिद्द प्रयोग89 के प्रतिफलस्वरूप किसी विदेशी राज्य की सरकार या विदेशी उद्यम89 से प्राप्त किया गया हो] 90[और ऐसी आय भारत में संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में प्राप्त की जाती है या भारत से बाहर संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में संपरिवर्तित किए जाने पर निर्धारिती द्वारा या उसकी ओर से, विदेशी मुद्रा में संदाय और संव्यवहारों के विनियमन के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अनुसार भारत में लार्इ जाती है, 91[वहां निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में, इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए, भारत में इस प्रकार प्राप्त की गर्इ या लार्इ गर्इ आय के–

(i)  1 अप्रैल, 2001 को प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए चालीस प्रतिशत;

(ii)  1 अप्रैल, 2002 को प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए तीस प्रतिशत;

(iii)  1 अप्रैल, 2003 को प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए बीस प्रतिशत;

(iv)  1 अप्रैल, 2004 को प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए दस प्रतिशत,

के बराबर रकम की कटौती अनुज्ञात की जाएगी और 1 अप्रैल, 2005 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष तथा पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्षों के संबंध में कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी]] :

92[***]

93[परन्तु यह 94[***] कि ऐसी आय भारत में पूर्ववर्ष की समाप्ति से छह मास की अवधि के भीतर या 95[ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर जो सक्षम प्राधिकारी इस संबंध में अनुज्ञात करे], प्राप्त की जाती है:]

96[परन्तु यह और कि इस धारा के अंतर्गत कोर्इ कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि निर्धारिती आय की विवरणी के साथ विहित फार्म97 में यह प्रमाणित करते हुए यह प्रमाणपत्र नहीं दे देता कि कटौती का इस धारा के उपबंधों के अनुसार सही दावा किया गया है।]

98[स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,

(i)  ‘‘संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा’’ का अर्थ है ऐसी विदेशी मुद्रा जो तत्समय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा में संदाय और संव्यवहार को विनियमित करने के लिए तत्समय प्रवृत्त विधि के प्रयोजनों के लिए संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा मानी गर्इ है;

99[(ii)  ‘‘विदेशी उद्यम’’ से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो अनिवासी है;]]

1[(iii)  “भारत के बाहर सेवाएं देने या देने का करार पार्इ गर्इ सेवाओं” के अंतर्गत भारत से दी गर्इ सेवाएं होंगी किंतु भारत में दी गर्इ सेवाएं नही होंगी;]

2[(iv)  ‘‘सक्षम प्राधिकारी’’ का अर्थ है भारतीय रिजर्व बैंक या ऐसा अन्य प्राधिकारी, जिसे विदेशी मुद्रा में संदाय और संव्यवहार को विनियमित करने के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन प्राधिकृत किया गया है।]

(2) 3[***]]

 

82.  वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1971 द्वारा 1.4.1972 से प्रतिस्थापित। यह प्रसंग मूलत: धारा 85ग से संबंधित था, जिसे वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से अंत:स्थापित किया गया था। धारा 80ण, धारा 85ग के स्थान पर अंत:स्थापित की गर्इ थी जिसे वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1968 से हटा दिया गया था। धारा 80ण बाद में वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1969 से संशोधित की गर्इ थी।

83.  तारीख 30.4.1979 का परिपत्र सं. 253, तारीख 23.3.1995 का परिपत्र सं. 700, और तारीख 20.12.1995 का परिपत्र सं. 731 भी देखें।

84.  सुसंगत केस लॉज देखिए

85.  वित्त अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1975 से “(1) जहां किसी निर्धारिती की, जो भारतीय कंपनी है या (कंपनी से भिन्न) ऐसा कोर्इ व्यक्ति है, जो भारत का निवासी है” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

86.  वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से अंत:स्थापित।

87.  वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से “जिसे निर्धारिती द्वारा” शब्दों से आरंभ होने वाले और “उस सरकार या उद्यम से प्राप्त किया गया हो” शब्दों से समाप्त होने वाले भाग के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व कोट किया गया भाग वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से संशोधित किया गया था।

88.  ‘‘मुख्य आयुक्त या महानिदेशक द्वारा इस निमित्त अनुमोदित करार के अधीन;’’ शब्दों का वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से लोप किया गया। इससे पूर्व, ये शब्द वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से ‘‘इस निमित्त बोर्ड द्वारा अनुमोदित करार के अधीन’’ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित किए गए थे।

89.  ‘‘विदेशी उद्यम’’ और ‘‘प्रयोग’’ पदों के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए

90.  वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1988 से ‘‘और ऐसी आय भारत में संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में प्राप्त की जाती है, वहां निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए, भारत में इस प्रकार प्राप्त की गर्इ या लार्इ गर्इ आय के पचास प्रतिशत के बराबर रकम की कटौती अनुज्ञात की जाएगी’’ (जैसी कि यह वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा किए गए संशोधन के पश्चात् विद्यमान थी) शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित। इस पूर्व धारा का यह भाग वित्त अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1972 से भूतलक्षी प्रभाव से और बाद में वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से संशोधित किया गया था।

91.  वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से ‘‘वहां निर्धारिती की’’ से प्रारम्भ होने वाले और ‘‘पचास प्रतिशत के बराबर रकम की कटौती अनुज्ञात की जाएगी।’’ शब्दों से समाप्त होने वाले शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित। इसके प्रतिस्थापन से पूर्व कोट किया भाग निम्नलिखित रूप में है :

‘‘निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए, भारत में इस प्रकार प्राप्त की गर्इ या लार्इ गर्इ आय के पचास प्रतिशत के बराबर रकम की कटौती अनुज्ञात की जाएगी।’’

92.  वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से लोप किया गया। लोप किए जाने से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से यथा प्रतिस्थापित परंतुक निम्नलिखित रूप में था :

‘‘परन्तु यह तब जबकि इस धारा में निर्दिष्ट करार के अनुमोदन के लिए, यथास्थिति, मुख्य आयुक्त या महानिदेशक को आवेदन विहित प्ररूप में सत्यापित करके उस निर्धारण वर्ष के अक्तूबर के प्रथम दिन से पहले कर दिया गया हो जिसके संबंध में अनुमोदन पहली बार मांगा जाना है :

परन्तु यह और  कि ऐसे करार की दशा में, जो 1972 के अप्रैल के प्रथम दिन से पहले केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया है या 1989 के अप्रैल के प्रथम दिन से पहले इस धारा के अधीन कटौती के प्रयोजनों के लिए बोर्ड द्वारा अनुमोदित किया गया है, यथास्थिति, मुख्य आयुक्त या महानिदेशक का अनुमोदन आवश्यक नहीं होगा और करार के अनुमोदन के लिए 1989 के अप्रैल के प्रथम दिन से ठीक पहले बोर्ड के समक्ष लंबित प्रत्येक आवेदन निपटाए जाने के लिए मुख्य आयुक्त या महानिदेशक को अंतरित हो जाएगा :’’

93.  वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से अंत:स्थापित।

94.  वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से ‘‘भी’’ शब्द का लोप किया गया।

95.  वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से ‘‘जहां मुख्य आयुक्त’’ शब्दों से आरंभ होने वाले और ‘‘इस निमित्त अनुज्ञात करे’’ शब्दों से समाप्त होने वाले भाग के स्थान पर प्रतिस्थापित। इसके प्रतिस्थापन से पूर्व प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से यथासंशोधित उक्त भाग निम्नलिखित रूप में था :–

“जहां मुख्य आयुक्त या आयुक्त का (ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे) यह समाधान हो जाता है कि निर्धारिती ऐसे कारणों से, जो उसके नियंत्रण के बाहर हैं, छह मास की उक्त अवधि के भीतर ऐसा करने में असमर्थ है, वहां ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर, जो मुख्य आयुक्त या आयुक्त इस निमित्त अनुज्ञात करे।”

96.  वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से अंत:स्थापित।

97.  नियम 29कक और प्ररूप सं. 10जक देखिए

98.  वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से निम्नलिखित स्पष्टीकरण के स्थान पर प्रतिस्थापित, जिसे इससे पूर्व, वित्त अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1972 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित किया गया था।

99.  वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से प्रतिस्थापित।

1.  वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से अंत:स्थापित।

2.  वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से अंत:स्थापित।

3.  वित्त अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1975 से लोप किया गया।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा संशोधित रूप में]

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