आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 79

कतिपय कंपनियों की दशा में हानियों का अग्रनीत किया जाना और उनका मुजरा किया जाना

धारा

धारा संख्या

79

अध्याय शीर्षक

अध्याय VI - आय का एकत्रीकरण और हानि समायोजन या अग्रेषण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2021

कतिपय कंपनियों की दशा में हानियों का अग्रनीत किया जाना और उनका मुजरा किया जाना

कतिपय कंपनियों की दशा में हानियों का अग्रनीत किया जाना और उनका मुजरा किया जाना

80-81[कतिपय कंपनियों की दशा में हानियों का अग्रनीत किया जाना और उनका मुजरा किया जाना

79. (1) इस अध्याय में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी कंपनी की दशा में, जो ऐसी कंपनी नहीं है, जिसमें जनता सारवान् रूप से हितबद्ध है, पूर्ववर्ष में शेयरधृति में कोई परिवर्तन हुआ है, वहां किसी भी ऐसी हानि को, जो उस पूर्ववर्ष के किसी पूर्ववर्ष में उपगत हुई थी, तब तक अग्रनीत नहीं किया जाएगा या पूर्ववर्ष की आय के प्रति उसका मुजरा तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक कि पूर्ववर्ष के अंतिम दिन को कंपनी के वे शेयर, जो इक्यावन प्रतिशत से अन्यून मतदान शक्ति वाले थे, ऐसे व्यक्तियों द्वारा फायदाप्रद रूप से धारित है, न रहे हों, जो उस वर्ष या उन वर्षों के, जिसमें या जिनमें हानि उपगत हुई थी, अंतिम दिन कंपनी के ऐसे शेयरों को फायदाप्रद रूप से धारण करते थे, जो इक्यावन प्रतिशत से अन्यून मतदान शक्ति वाले थे:

परंतु यदि धारा 80झकग में यथानिर्दिष्ट किसी पात्र स्टार्ट-अप की दशा में पूर्वोक्त शर्त को पूरा भी नहीं किया जाता है, पूर्ववर्ती वर्ष से पूर्व किसी वर्ष में उपगत हानि को फिर भी पूर्ववर्ती वर्ष की आय के विरुद्ध अग्रनीत करने और मुजरा करने के लिए अनुज्ञात किया जाएगा, यदि ऐसी कंपनी के सभी शेयरधारक, जो उस वर्ष या वर्षों के, जिनमें हानि उपगत हुई थी, अंतिम दिन मतदान शक्ति वाले शेयर धारण करते थे, ऐसे पूर्ववर्ती वर्ष के अंतिम दिन और यदि ऐसी हानि उस वर्ष, जिसमें ऐसी कंपनी निगमित हुई है, से प्रारंभ होने वाले सात वर्ष के दौरान ऐसी हानि उपगत हुई है, उन शेयरों को धारण करना जारी रखेंगे।

(2) इस उपधारा (1) में अंतर्विष्ट कोई बात,—

(क) उस दशा में लागू नहीं होगी, जहां उक्त मतदान शक्ति और शेयर धारण में कोई परिवर्तन किसी शेयरधारक की मृत्यु के परिणामस्वरूप या शेयरधारक के किसी नातेदार को उपहार के माध्यम से शेयरों के अंतरण के मद्दे हुआ हो;

(ख) किसी भारतीय कंपनी, जो किसी विदेशी कंपनी के समामेलन या निर्विलयन के परिणामस्वरूप किसी विदेशी कंपनी की समनुषंगी है, इस शर्त के अधीन रहते हुए कि समामेलित या निर्विलियत विदेशी कंपनी के इक्यावन प्रतिशत शेयर समामेलित या परिणामिक विदेशी कंपनी के शेयरधारक बने रहेंगे, के शेयरधारण में किसी परिवर्तन को लागू नहीं होगी;

(ग) किसी कंपनी को लागू नहीं होगी, जहां अधिकारिता रखने वाले प्रधान आयुक्त या आयुक्त को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करने के पश्चात् दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (2016 का 31) के अधीन अनुमोदित संकल्प योजना के अनुसरण में किसी पूर्ववर्ष में शेयरधारण में कोई परिवर्तन होता है;

(घ) इस धारा में अंतर्विष्ट कोई बात किसी कंपनी को और उसकी समनुषंगियों को और ऐसी समनुषंगी की समनुषंगी को लागू नहीं होगी, जहां,—

(i) केंद्रीय सरकार द्वारा कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 241 के अधीन किए गए आवेदन पर अधिकरण ने ऐसी कंपनी के निदेशक बोर्ड को निलंबित कर दिया है और नए निदेशकों की नियुक्ति की है, जिन्हें केंद्रीय सरकार द्वारा उक्त अधिनियम की धारा 242 के अधीन नामनिर्दिष्ट किया गया है; और

(ii) ऐसी कंपनी और उसकी समनुषंगियों तथा ऐसी समनुषंगी की समनुषंगी कंपनी के शेयरधारण में कोई परिवर्तन पूर्ववर्ष में अधिकारिता रखने वाले प्रधान आयुक्त या आयुक्त को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करने के पश्चात् कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 242 के अधीन अधिकरण द्वारा अनुमोदित संकल्प योजना के परिणामस्वरूप हुआ है।

वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2022 से धारा 79 की उपधारा (2) के खंड (घ) के पश्चात् खंड (ड़) अतंस्थापित किया जाएगा

(ङ) किसी कंपनी को इस परिमाण तक कि शेयर धृति में परिवर्तन पूर्व वर्ष के दौरान धारा 47 के खंड (viiकग) और खंड (viiकघ) के स्पष्टीकरण में निर्दिष्ट पुन:स्थापन के मद्दे होता है।

स्पष्टीकरण—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—

(i) कोई कंपनी किसी अन्य कंपनी की समनुषंगी होगी यदि ऐसी अन्य कंपनी, कंपनी की साम्या शेयर पूंजी के आधे से अधिक अभिहित मूल्य को धारण करती है;

(ii) "अधिकरण" का वही अर्थ होगा, जो कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 के खंड (90) में उसका है।]

 

80-81. वित्त (सं 2) अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2020 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 79 निम्न प्रकार थी

"79. कतिपय कंपनियों की दशा में हानियों का अग्रनीत किया जाना और उनका मुजरा किया जाना.—इस अध्याय में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी,—

() किसी कंपनी की दशा में, जो ऐसी कंपनी नहीं है, जिसमें जनता सारवान् रूप से हितबद्ध है और जो खंड () में निर्दिष्ट किसी कंपनी से भिन्न है, पूर्ववर्ष में शेयरधृति में कोई परिवर्तन हुआ है, वहां किसी भी ऐसी हानि को, जो उस पूर्ववर्ष के किसी पूर्ववर्ष में उपगत हुई थी, तब तक अग्रनीत नहीं किया जाएगा या पूर्ववर्ष की आय के प्रति उसका मुजरा तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक कि पूर्ववर्ष के अंतिम दिन को कंपनी के वे शेयर, जो इक्यावन प्रतिशत से अन्यून मतदान शक्ति वाले थे, ऐसे व्यक्तियों द्वारा फायदाप्रद रूप से धारित है, न रहे हों, जो उस वर्ष या उन वर्षों के, जिसमें या जिनमें हानि उपगत हुई थी, अंतिम दिन कंपनी के ऐसे शेयरों को फायदाप्रद रूप से धारण करते थे, जो इक्यावन प्रतिशत से अन्यून मतदान शक्ति वाले थे;

() किसी कंपनी की दशा में, जो ऐसी कंपनी नहीं है, जिसमें जनता सारवान् रूप से हितबद्ध है किन्तु जो इस अधिनियम की धारा 80झकग में यथानिर्दिष्ट पात्र स्टार्ट अप है, पूर्ववर्ष से पूर्व किसी वर्ष में उपगत हानि को अग्रनीत किया जाएगा और पूर्ववर्ष की आय के प्रति उसका मुजरा किया जाएगा, यदि ऐसी कंपनी के सभी शेयर धारकों ने, जो उस वर्ष या उन वर्षों के, जिसमें या जिनमें ऐसी हानि उपगत हुई थी, अंतिम दिन को मतदान शक्ति वाले शेयरों को धारण कर रहे थे:

(i) ऐसे पूर्ववर्ष के अंतिम दिन उन शेयरों को धारण करना जारी रखा था; और

(ii) ऐसी हानि उन सात वर्षों की अवधि के दौरान उपगत हुई है, जो उस वर्ष से आरंभ हुई थी, जिसमें ऐसी कंपनी को निगमित किया गया था:

परंतु इस धारा में अंतर्विष्ट कोई बात उस दशा में लागू नहीं होगी जहां उक्त मत देने की शक्ति और शेयरधृति में पूर्ववर्ष में कोई परिवर्तन, किसी शेयर धारक की मृत्यु या ऐसा दान करने वाले शेयर धारक द्वारा शेयरधारक के नातेदार को किसी दान के माध्यम से शेयरों के अंतरण के फलस्वरूप होता है:

परंतु यह और कि इस धारा की कोई बात किसी ऐसी भारतीय कंपनी के, जो विदेशी कंपनी के समामेलन या निर्विलयन के परिणामस्वरूप किसी विदेशी कंपनी की समनुषंगी है, इस शर्त के अधीन रहते हुए कि समामेलित या निर्विलीन विदेशी कंपनी के इक्यावन प्रतिशत शेयरधारक, समामेलित या परिणामी विदेशी कंपनी के शेयरधारक बने रहते है, शेयरधृति में किसी परिवर्तन को लागू नहीं होगी:

परंतु यह भी कि इस धारा की कोई बात, किसी कंपनी को लागू नहीं होगी जहां दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता के अधीन अनुमोदित किसी संकल्प के अनुसरण में अधिकारिता रखने वाले प्रधान आयुक्त या आयुक्त को युक्तियुक्त अवसर प्रदान करने के पश्चात् किसी पूर्ववर्ष में शेयर धारण में कोई परिवर्तन होता है।"

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

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