आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 74

"पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन हानियां

धारा

धारा संख्या

74

अध्याय शीर्षक

अध्याय VI - आय का एकत्रीकरण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2000

"पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन हानियां

"पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन हानियां

91["पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन हानियां

74. (1) जहां किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में, "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन संगणना का अंतिम परिणाम निर्धारिती की हानि है 92[* * *] वहां संपूर्ण हानि, इस अध्याय के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए अगले निर्धारण वर्ष के लिए अग्रनीत की जाएगी, और–

() उसका मुजरा उस निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन हुर्इ आय के, यदि कोर्इ हो, प्रति किया जाएगा; और

() यदि उस हानि का मुजरा पूर्र्णत: इस प्रकार नहीं किया जा सकता है तो हानि की ऐसी रकम, जिसका मुजरा इस प्रकार नहीं किया जा सका है, अगले निर्धारण वर्ष के लिए अग्रनीत की जाएगी और आगे भी इसी प्रकार की जाती रहेगी।

(2) कोर्इ भी हानि, उस निर्धारण वर्ष के, जिसके लिए उस हानि की संगणना पहली बार की गर्इ थी, ठीक बाद के आठ निर्धारण वर्षों से अधिक के लिए इस धारा के अधीन अग्रनीत नहीं की जाएगी।

(3) यदि कोर्इ हानि 1 अप्रैल, 1987 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पूर्वतर निर्धारण वर्ष के संबंध में "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन संगणित की गर्इ है और 1अप्रैल, 1988 के पूर्व विद्यमान इस धारा के उपबंधों के अनुसार अग्रनीत की गर्इ है तो 1 अप्रैल, 1988 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी उत्तरवर्ती निर्धारण वर्ष में उस हानि के बारे में निम्नलिखित रूप में कार्रवार्इ की जाएगी,–

() जहां तक उस हानि का संबंध अल्पकालिक पूंजी आस्तियों से है, वह उपधारा (1) और (2) के उपबंधों के अनुसार अग्रनीत और मुजरा की जाएगी;

() जहां तक ऐसी हानि का संबंध दीर्घकालिक पूंजी आस्तियों से है, उसमें से धारा 48 की उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट कटौतियां कम कर दी जाएंगी और कम करके प्राप्त रकम, उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार अग्रनीत और मुजरा की जाएगी, किंतु ऐसा अग्रनयन उस निर्धारण वर्ष के, जिसके लिए उस हानि की संगणना पहली बार की गर्इ थी, ठीक बाद के चौथे निर्धारण वर्ष से आगे अनुज्ञात नहीं किया जाएगा।]

 

91. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से प्रतिस्थापित। पूर्व में, धारा 74 वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1962 द्वारा 1.4.1962 से प्रतिस्थापित की गर्इ थी और वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1968 से तथा वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से संशोधित की गर्इ थी।

92. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से "और यह हानि धारा 71 के उपबंधों के अनुसरण में आय के किसी अन्य शीर्ष के अधीन आय के प्रति संपूर्णत: मुजरा नहीं की जा सकती या नहीं की गर्इ है, उतनी हानि जिसका मुजरा नहीं किया गया है या जहां उसके पास किसी अन्य शीर्ष के अंतर्गत कोर्इ आय नहीं है" शब्दों का लोप किया गया।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

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