आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 72कक

कुछ दशाओं में बैंककारी कंपनी के समामेलन की स्कीम में संचयित हानि और शेष अवक्षयण मोक के अग्रनयन और मुजरा करने से संबंधित उपबंध

धारा

धारा संख्या

72कक

अध्याय शीर्षक

अध्याय VI - आय का एकत्रीकरण और हानि समायोजन या अग्रेषण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2024 (सं.1)

कुछ दशाओं में बैंककारी कंपनी के समामेलन की स्कीम में संचयित हानि और शेष अवक्षयण मोक के अग्रनयन और मुजरा करने से संबंधित उपबंध

कुछ दशाओं में बैंककारी कंपनी के समामेलन की स्कीम में संचयित हानि और शेष अवक्षयण मोक के अग्रनयन और मुजरा करने से संबंधित उपबंध

79क[कतिपय मामलों में संचयित हानियों को अग्रनीत करने और उनका मुजरा करने तथा समामेलन की स्कीम में शेष अवक्षयण का मोक—

72कक. जब,—

79कक[(i) निम्नलिखित के साथ एक या अधिक बैंककारी कंपनी,—

(क) केंद्रीय सरकार द्वारा बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 45 की उपधारा (7) के अधीन मंजूर की गई और प्रवर्तन में लाई गई किसी स्कीम के अधीन किसी अन्य बैंककारी संस्था ; या

(ख) किसी सामरिक विनिवेश के परिणामस्वरूप किसी अन्य बैंककारी संस्था या किसी कंपनी, जिसमें उस पूर्व वर्ष, जिसके दौरान सामरिक विनिवेश किया जाता है, के अंत से पांच वर्ष की अवधि के भीतर समामेलन किया जाता है ; या ]

(ii)   केंद्रीय सरकार द्वारा, यथास्थिति, बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 9 या बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1980 (1980 का 40) की धारा 9 या दोनों के अधीन प्रवर्तन में लाई गई किसी स्कीम के अधीन एक या अधिक तत्स्थानी नए बैंक या बैंकों का किसी अन्य तत्स्थानी नए बैंक के साथ समामेलन हुआ है; या

(iii)  केंद्रीय सरकार द्वारा साधरण बीमा कारबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) की धारा 16 के अधीन मंजूर की गई और प्रवर्तन में लाई गई किसी स्कीम के अधीन एक या अधिक सरकारी कंपनी या कंपनियों का किसी अन्य सरकारी कंपनी के साथ समामेलन हुआ है,

तब धारा 2 के खंड (1ख) के उपखंड (i) से उपखंड (iii) या धारा 72क में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसी बैंककारी कंपनी या कंपनियों या समामेलित तत्स्थानी नए बैंक या नए बैंकों या समामेलित सरकारी कंपनी या कंपनियों की संचयित हानि और शेष अवक्षयण को, उस पूर्ववर्ष के लिए, जिसमें समामेलन की स्कीम को प्रवर्तन में लाया गया था, यथास्थिति, ऐसी बैंककारी संस्था या 79खख[कंपनी या] समामेलित तत्स्थानी नए बैंक या समामेलित सरकारी कंपनी का मोक या अवक्षयण समझा जाएगा और हानि तथा अवक्षयण के लिए मोक को अग्रनीत किए जाने और मुजरा के संबंध में अधिनियम के अन्य उपबंध तदनुसार लागू होंगे।

स्पष्टीकरण—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—

(i)  ''संचयित हानि'' से समामेलित बैंककारी कंपनी या कंपनियों या समामेलित तत्स्थानी नए बैंक या बैंकों या समामेलित सरकारी कंपनी या कंपनियों की ''कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन उतनी हानि (जो किसी सट्टा कारबार में हुई कोई हानि नहीं है) अभिप्रेत है, जितनी के लिए ऐसी समामेलित बैंककारी कंपनी या कंपनियां या समामेलित तत्स्थानी नया बैंक या नए बैंक या समामेलित सरकारी कंपनी या कंपनियां धारा 72 के उपबंधों के अधीन अग्रनीत और मुजरा किए जाने के लिए हकदार होती, यदि समामेलन नहीं हुआ होता;

(ii)   ''बैंककारी कंपनी'' का वही अर्थ होगा जो उसका बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 के खंड (ग) में है;

(iii)  ''बैंककारी संस्था'' का वही अर्थ होगा जो उसका बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 45 की उपधारा (15) में है;

(iv)  ''तत्स्थानी नया बैंक'' का वही अर्थ होगा, जो उसका, यथास्थिति, बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 2 के खंड (घ) या बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1980 (1980 का 40) की धारा 2 के खंड (ख) में है;

(v)  ''साधारण बीमा कारबार'' का वही अर्थ होगा जो उसका साधारण बीमा कारबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) की धारा 3 के खंड (छ) में है;

(vi)  ''सरकारी कंपनी'' से कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 के खंड (45) में यथापरिभाषित सरकारी कंपनी अभिप्रेत है, जो साधारण बीमा कारबार में लगी हुई है और जो साधारण बीमा कारबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) की धारा 4 या धारा 5 या धारा 16 के प्रवर्तन द्वारा अस्तित्व में आई है;

79गग[(viक) "सामरिक विनिवेश" पद का वही अर्थ होगा, जो धारा 72क की उपधारा (1) के खंड (घ) के स्पष्टीकरण के खंड (iii) में उसका है ;]

(vii)  ''शेष अवक्षयण'' से समामेलित बैंककारी कंपनी या कंपनियों या समामेलित तत्स्थानी नए बैंक या बैंकों या समामेलित सरकारी कंपनी या कंपनियों का अवक्षयण के लिए उतना मोक अभिप्रेत है, जो अनुज्ञात होने के लिए शेष रहता है और जिसे ऐसी बैंककारी कंपनी या कंपनियों या समामेलित तत्स्थानी नए बैंक या बैंकों या समामेलित सरकारी कंपनी या कंपनियों को अनुज्ञात किया गया होता, यदि समामेलन नहीं हुआ होता।]

 

 

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप मेंें]

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