आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 71

दूसरे से आय के खिलाफ एक सिर से नुकसान के बंद सेट

धारा

धारा संख्या

71

अध्याय शीर्षक

अध्याय VI - आय का एकत्रीकरण और हानि समायोजन या अग्रेषण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2005

दूसरे से आय के खिलाफ एक सिर से नुकसान के बंद सेट

दूसरे से आय के खिलाफ एक सिर से नुकसान के बंद सेट

64[एक शीर्ष से होने वाली हानि का अन्य शीर्ष से होने वाली आय के प्रति मुजरा किया जाना

6571. (1) जहां किसी निर्धारण वर्ष की बाबत किसी ऐसी संगणना का, जो ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष से भिन्न आय के किसी शीर्ष के अधीन की गर्इ है, अंतिम परिणाम हानि है और ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन निर्धारिती की कोर्इ आय नहीं है वहां वह, इस अध्याय के उपबंधों के अधीन रहते हुए इसका हकदार होगा66 कि वह ऐसी हानि की रकम का मुजरा अपनी उस आय के प्रति, यदि कोर्इ हो, करा ले जो किसी अन्य शीर्ष के अधीन उस निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय है।

(2) जहां किसी निर्धारण वर्ष की बाबत, किसी ऐसी संगणना का, जो ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष से भिन्न आय के किसी शीर्ष के अधीन की गर्इ है, अंतिम परिणाम हानि है और निर्धारिती की ऐसी आय है जो ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन निर्धारणीय है वहां, ऐसी हानि का मुजरा इस अध्याय के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उसकी उस आय के प्रति, यदि कोर्इ हो, किया जा सकेगा जो आय के किसी शीर्ष के अधीन जिसके अंतर्गत ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष है (चाहे वह अल्पकालिक पूंजी आस्ति से या किसी अन्य पूंजी आस्ति से संबंधित हो), उस निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय है।

66क[(2) उपधारा (1) या उपधारा (2) में की किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में, "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन संगणना का शुद्ध परिणाम हानि है और निर्धारिती की "वेतन" शीर्ष के अधीन निर्धारणीय आय है, वहां निधारिती ऐसी हानि का मुजरा ऐसी आय के प्रति कराने का हकदार नहीं होगा।]

(3) जहां किसी निर्धारण वर्ष की बाबत, किसी ऐसी संगणना का, जो ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन की गर्इ है, अंतिम परिणाम हानि है और निर्धारिती की कोर्इ ऐसी आय है जो आय के किसी अन्य शीर्ष के अधीन निर्धारणीय है, वहां निर्धारिती ऐसी हानि का मुजरा अन्य शीर्ष के अधीन आय के प्रति कराने का हकदार नहीं होगा।]

67[(4) जहां, 1 अप्रैल, 1995 और 1 अप्रैल, 1996 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्षों की बाबत ''गृह संपत्ति से आय'' शीर्ष के अधीन ऐसी संगणना का अंतिम परिणाम हानि है वहां ऐसी हानि पहले उपधारा (1) और (2) के अंतर्गत मुजरा की जाएगी और उसके पश्चात् धारा 71क में निर्दिष्ट हानि, सुसंगत निर्धारण वर्ष में उस धारा के उपबंधों के अनुसार मुजरा की जाएगी।]

 

64. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन के पूर्व धारा 71 वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1962 द्वारा 1.4.1962 से और वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1968 से यथासंशोधित की गयी थी।

65. परिपत्र सं. 14-डी (XXV-27), तारीख 2.8.1967, परिपत्र सं. 26 (LXXVI-3), तारीख 7.7.1955, परिपत्र सं. 104, तारीख 19.2.1973 और परिपत्र सं. 587, तारीख 11.12.1990 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

66. ''हकदार होगा'' पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

66क. वित्त (सं.2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से अंत:स्थापित।

67. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन के पूर्व, वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से यथा अंत:स्थापित उपधारा (4) निम्नानुसार थी :

'(4) उपधारा (1) और उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी संपत्ति के संबंध में [जो धारा 23 की उपधारा (2) के खंड (क) के उपखंड (i) में निर्दिष्ट संपत्ति से भिन्न है] किसी निर्धारण वर्ष की बाबत ''गृह संपत्ति से आय'' शीर्ष के अधीन संगणना का अंतिम परिणाम हानि है और निर्धारिती की कोर्इ ऐसी आय है जो आय के किसी अन्य शीर्ष के अधीन निर्धारणीय है, वहां निर्धारिती ऐसी हानि का मुजरा अन्य शीर्ष के अधीन आय के प्रति कराने का हकदार नहीं होगा।'

 

 

[वित्त अधिनियम, 2005 तथा विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा संशोधित रूप में]

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