आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 70

आय का एक ही सिर के नीचे एक अन्य स्रोत से आय के खिलाफ एक स्रोत से नुकसान के बंद सेट

धारा

धारा संख्या

70

अध्याय शीर्षक

अध्याय VI - आय का एकत्रीकरण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2000

आय का एक ही सिर के नीचे एक अन्य स्रोत से आय के खिलाफ एक स्रोत से नुकसान के बंद सेट

आय का एक ही सिर के नीचे एक अन्य स्रोत से आय के खिलाफ एक स्रोत से नुकसान के बंद सेट

मुजरा किया जाना या अग्रनीत किया जाना और मुजरा किया जाना

68[आय के एक ही शीर्ष के अधीन एक स्रोत से होने वाली हानि का दूसरे स्रोत से होने वाली आय के प्रति मुजरा किया जाना।

6970. 70[* * *] इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, जहां 71[* * *] आय के किसी शीर्ष के अधीन आने वाले किसी स्रोत की बाबत किसी निर्धारण वर्ष के लिए अंतिम परिणाम हानि है, वहां निर्धारिती इसका हकदार होगा कि वह ऐसी हानि की रकम मुजरा उसी शीर्ष के अधीन किसी अन्य स्रोत से होने वाली अपनी आय के प्रति करा ले।

72[* * *]

 

68. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1962 द्वारा 1.4.1962 से प्रतिस्थापित।

69. परिपत्र सं. 14-डी(XXV-27), तारीख 2.8.1967 परिपत्र सं. 26 (LXXVI-3), तारीख 7.7.1955, परिपत्र सं. 104, तारीख 19.2.1973 और परिपत्र सं. 587, तारीख 11.12.1990 भी देखें। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

सुसंगत केस लाज़ के लिये देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टू इन्कम टैक्स एक्ट।

70. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "(1)" का लोप किया गया।

71. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "पूंजी अभिलाभ से भिन्न" का लोप किया गया।

72. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से लोप किया गया। लोप किए जाने के पूर्व उपधारा (2) निम्नानुसार थी:

"(2) (i) जहां किसी अल्पकालिक पूंजी आस्ति की बाबत धारा 48 से धारा 55 के अधीन किसी वर्ष के लिए की गर्इ संगणना का परिणाम हानि है, वहां निर्धारिती किसी अन्य पूंजी आस्ति के संबंध में निर्धारण वर्ष के लिए की गर्इ वैसी ही संगणना के अंतर्गत आय, यदि कोर्इ हो, के विरुद्ध अपनी हानि की रकम का मुजरा कराने का हकदार होगा। (ii) जहां किसी अल्पकालिक पूंजी आस्ति से भिन्न पूंजी आस्ति की बाबत धारा 48 से धारा 55 के अधीन किसी निर्धारण वर्ष के लिए की गर्इ संगणना का परिणाम हानि है, वहां निर्धारिती अल्पकालिक पूंजी आस्ति से भिन्न किसी अन्य पूंजी के संबंध में निर्धारण वर्ष के लिए की गर्इ वैसी ही संगणना के अंतर्गत आय, यदि कोर्इ हो, के विरुद्ध अपनी हानि की रकम का मुजरा कराने का हकदार होगा।"

 

 

[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

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