भारत में निवास
भारत में निवास
106. इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए,–
(1) कोर्इ व्यक्ति किसी पूर्ववर्ष में भारत में निवासी तब कहा जाता है जबकि वह,–
(क) उस वर्ष में कुल मिलाकर एक सौ बयासी या अधिक दिनों की कालावधि या कालावधियों तक भारत में रहा हो; या
(ख) 11[* * *]
(ग) उस वर्ष के पूर्ववर्ती चार वर्षों के भीतर कुल मिलाकर तीन सौ पैंसठ या अधिक दिनों की कालावधि या कालावधियों तक भारत में होते हुए उस वर्ष कुल मिलाकर साठ या अधिक दिनों की कालावधि या कालावधियों तक भारत में रहा हो।
12[स्पष्टीकरण.–ऐसे व्यष्टि की दशा में,–
(क) जो भारत का नागरिक है, 13[जो वाणिज्य पोत परिवहन अधिनियम, 1958 (1958 का 44) की धारा 3 के खंड (18) में यथापरिभाषित भारतीय पोत14 के कर्मीदल के सदस्य के रूप में या] भारत से बाहर नियोजन के प्रयोजनों के लिए किसी पूर्ववर्ष में भारत छोड़ देता है, उपखंड (ग) के उपबंध उस वर्ष के संबंध में इस प्रकार लागू होंगे मानो उसमें ''साठ दिन'' शब्दों के स्थान पर ''एक सौ बयासी दिन'' शब्द प्रतिस्थापित किए गए थे;
(ख) जो भारत का नागरिक है या धारा 115ग के खंड(ड़) के स्पष्टीकरण के अर्थ में भारतीय मूल का व्यक्ति है, जो भारत के बाहर रहते हुए किसी पूर्ववर्ष में भारत में आता है, उपखंड (ग) के उपबंध उस वर्ष के संबंध में इस प्रकार लागू होंगे मानो उसमें आने वाले ''साठ दिन'' शब्दों के स्थान पर "एक सौ 15[बयासी] दिन" प्रतिस्थापित किए गए थे।]
(2) कोर्इ हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब, फर्म या अन्य व्यक्तियों का संगम हर दशा में किसी पूर्ववर्ष में भारत में निवासी कहा जाता है सिवाय उस दशा में जिसमें उस वर्ष के दौरान उसके कामकाज16 का नियंत्रण और प्रबंध16 संपूर्णत:16 भारत के बाहर स्थित रहा है।
(3) कोर्इ कंपनी किसी पूर्ववर्ष में भारत में निवासी, तब कही जाती है, यदि,–
(i) वह एक भारतीय कंपनी है; या
(ii) उस वर्ष के दौरान उसके कामकाज का नियंत्रण और प्रबंध संपूर्णत: भारत में स्थित रहा है।
(4) हर अन्य व्यक्ति प्रत्येक दशा में किसी पूर्ववर्ष में भारत में निवासी कहा जाता है सिवाए उस दशा के जिसमें उस वर्ष के दौरान उसके कामकाज का नियंत्रण और प्रबंध संपूर्णत: भारत के बाहर स्थित रहा है।
(5) यदि कोर्इ व्यक्ति आय के किसी स्रोत की बाबत निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में भारत में निवासी है तो वह अपनी आय के स्रोतों में से हर एक की बाबत निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में भारत में निवासी समझा जाएगा।
(6) किसी व्यक्ति के बारे में यह कि वह किसी पूर्ववर्ष में ''साधारणतया निवासी नहीं है'' तब कहा जाता है जबकि वह व्यक्ति,–
(क) ऐसा व्यक्ति है जो उस वर्ष के पूर्ववर्ती दस पूर्ववर्षों में से नौ में भारत में निवासी न रहा हो या उस वर्ष के पूर्ववर्ती सात पूर्ववर्षों के दौरान ऐसी कालावधि तक अथवा ऐसी कालावधियों तक जो कुल मिलाकर सात सौ तीस दिन या उससे अधिक की हो, भारत में न रहा हो; या
(ख) ऐसा हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है जिसका कर्ता उस वर्ष के पूर्ववर्ती दस पूर्ववर्षों में से नौ में भारत में निवासी न रहा हो या उस वर्ष के पूर्ववर्ती सात पूर्ववर्षों के दौरान किसी कालावधि तक या ऐसी कालावधियों तक जो कुल मिलाकर सात सौ तीस दिन या उससे अधिक हो, भारत में न रहा हो।
10. सुसंगत केस लाज़ के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
11. वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1983 से लोप किया गया।
12. प्रत्यक्ष कर विधि (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1990 से प्रतिस्थापित। वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1979 से यथा अंत:स्थापित और बाद में वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1983 से यथा संशोधित मूल स्पष्टीकरण निम्नानुसार था :
'स्पष्टीकरण.–ऐसे व्यक्ति की दशा में, जो भारत का नागरिक है,–
(क) भारत से बाहर नियोजन के प्रयोजनों के लिए किसी पूर्ववर्ष में भारत छोड़ देता है, उपखंड (ग) के उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो उसमें आने वाले "साठ" शब्दों के स्थान पर "एक सौ बयासी" शब्द प्रतिस्थापित किये गए हों;
(ख) जो भारत के बाहर रहते हुए किसी पूर्ववर्ष में भारत में आता है, उपखंड (ग) के उपबंध उस वर्ष के संबंध में इस प्रकार लागू होंगे मानो उसमें आने वाले "साठ दिन" शब्दों के स्थान पर "नब्बे दिन" शब्द प्रतिस्थापित किये गए हों।'
13. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1990 से अंत:स्थापित।
14. वाणिज्य पोत परिवहन अधिनियम, 1958 की धारा 3 के खंड (18) में "भारतीय पोत" को निम्नानुसार परिभाषित किया गया है :
'(18) "भारतीय पोत" से इस अधिनियम के अधीन पोत के रूप में रजिस्ट्रीकृत पोत अभिप्रेत है और इसमें इस अधिनियम के प्रारंभ पर भारत के किसी भाग में रजिस्ट्रीकृत कोर्इ ऐसा पोत सम्मिलित है जिसे धारा 22 की उपधारा (2) के परन्तुक के अधीन भारतीय पोत के रूप में मान्यताप्राप्त है।'
15. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से "पचास" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
16. "कामकाज", "नियंत्रण और प्रबंध" और "संपूर्णत:" पदों/शब्दों के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.
[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

