आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 58

नियमों बनाने के लिए सेंट्रल बोर्ड की पावर

धारा

धारा संख्या

58

अध्याय शीर्षक

IV - सामान्य प्रावधान

अधिनियम

भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934

वर्ष

नियमों बनाने के लिए सेंट्रल बोर्ड की पावर

केंद्रीय मंडल की विनियम बनाने की शक्ति;

[केंद्रीय मंडल की विनियम बनाने की शक्ति।

58.(1) केन्द्रीय मंडल, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से [राजपत्र में [अधिसूचना द्वारा] इस अधिनियम के अनुरूप विनियम बना सकेगा, जिससे उन सभी विषयों के लिए प्रावधान किया जा सके जिनके लिए इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए प्रावधान आवश्यक या सुविधाजनक है।

(2) विशिष्टतया तथा पूर्वगामी उपबंध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :-

()  
  से [***]
(ड़)  
()   केंद्रीय मंडल का कार्य किस प्रकार संचालित किया जाएगा तथा उसकी बैठकों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया;
()   स्थानीय मंडलों का कार्य संचालन तथा ऐसे मंडलों को शक्तियों और कार्यों का हस्तांतरण;
()   केंद्रीय मंडल की शक्तियों और कार्यों का प्रत्यायोजन  [***] बैंक के उप-गवर्नरों, निदेशकों या अधिकारियों को सौंपना;
()   केंद्रीय मंडल की समितियों का गठन, केंद्रीय मंडल की शक्तियों और कार्यों का ऐसी समितियों को प्रत्यायोजन, तथा ऐसी समितियों में कार्य का संचालन;
()   बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए कर्मचारी वर्ग और सेवानिवृत्ति निधि का गठन और प्रबंधन;
()   वह तरीका और रूप जिसमें बैंक पर बाध्यकारी अनुबंध निष्पादित किए जा सकेंगे;
()   बैंक की आधिकारिक मुहर का प्रावधान और इसके उपयोग का तरीका और प्रभाव;
()   बैंक की आधिकारिक मुहर का प्रावधान और इसके उपयोग का तरीका और प्रभाव;
()   बैंक के निदेशकों का पारिश्रमिक;
()   अनुसूचित बैंकों के बैंक के साथ संबंध तथा अनुसूचित बैंकों द्वारा बैंक को प्रस्तुत किए जाने वाली विवारणी ;
()   [बैंकों (डाकघर बचत बैंकों सहित)]  के लिए समाशोधन गृहों का विनियमन;
[(तत)   बैंकों के बीच या धारा 45-झ के खंड () में निर्दिष्ट बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं के बीच इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से निधि अंतरण का विनियमन, जिसके अंतर्गत ऐसी शर्तें निर्धारित करना है जिनके अधीन बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाएं ऐसे निधि अंतरण में भाग लेंगी, ऐसे निधि अंतरण का तरीका और ऐसे निधि अंतरण में प्रतिभागियों के अधिकार और दायित्व;]
()   वे परिस्थितियां जिनमें, तथा वे शर्तें और सीमाएं जिनके अधीन भारत सरकार के किसी खोए, चोरी हुए, कटे-फटे या अपूर्ण करेंसी नोट या बैंक नोट का मूल्य वापस किया जा सकेगा; तथा
[ (थक)   धारा 45जेडडी की उपधारा (2) के अंतर्गत आर्थिक पॉलिसी समिति के सदस्यों को देय पारिश्रमिक और अन्य भत्ते;
(थख)   धारा 45य छ की उपधारा (2) के अधीन सचिव के कार्य;
(थग)   धारा 45यझ की उपधारा (12) के अधीन आर्थिक पॉलिसी समिति की प्रक्रिया, बैठकों के संचालन का तरीका और संबंधित मामले;
(थघ)   धारा 45यञ की उपधारा (2) के अधीन दस्तावेज़ के विवरण और प्रकाशन की आवृत्ति;
(थङ)   धारा 45 यड की उपधारा (2) के अंतर्गत प्रकाशित की जाने वाली आर्थिक पॉलिसी प्रतिवेदन का प्रारूप और विषय-वस्तु; ]
()   सामान्यतः, बैंक के व्यवसाय के कुशल संचालन के लिए।

 [(3) इस धारा के अधीन बनाया गया कोई विनियमन ऐसी पूर्वतर या पश्चातवर्ती तारीख से प्रभावी होगा, जो विनियमन में विनिर्दिष्ट की जाए।

(4) प्रत्येक विनियम, केन्द्रीय मंडल द्वारा बनाए जाने के पश्चात यथाशीघ्र, केन्द्रीय सरकार को भेजा जाएगा और वह सरकार उसकी एक प्रति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखवाएगी। यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी। यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस विनियम में कोई परिवर्तन करने पर सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा या उसका कोई प्रभाव नहीं होगा, जैसा भी मामला हो। किन्तु ऐसा कोई भी परिवर्तन या निष्प्रभावीकरण उस विनियम के अधीन पहले की गई किसी बात की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।

[(5)] इस धारा के अधीन बनाए गए सभी विनियमों की प्रतियां जनता को भुगतान करने पर उपलब्ध होंगी।.


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