कटौतियां
कटौतियां
57. ''अन्य स्रोतों से आय'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना निम्नलिखित कटौतियां करने के पश्चात् की जाएंगी, अर्थात् :–
(i) धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न लाभांशों या प्रतिभूतियों पर ब्याज की दशा में ऐसी कोर्इ युक्तियुक्त राशि जो निर्धारिती की ओर से ऐसे लाभांश या ब्याज वसूल करने के प्रयोजन के लिए बैंककार या अन्य व्यक्ति को कमीशन या पारिश्रमिक स्वरूप संदत्त की गर्इ है;
(iक) उस प्रकार की आय की दशा में जो धारा 2 के खंड (24) के उपखंड (x) में दी गर्इ है और जो ''अन्य स्रोतों से आय'' शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य है जहां तक हो सके, धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (vक) के उपबंधों के अनुसार कटौतियां;
(ii) इस प्रकार की आय की दशा में जो धारा 56 की उपधारा (2) के खंड (ii) और खंड (iii) में निर्दिष्ट की गर्इ है, यावत्शक्य धारा 30 के खंड (क) के उपखंड (ii) और खंड (ग), धारा 31 और धारा 32 की उपधारा (1) और (2) के उपबंधों के अनुसार तथा धारा 38 के उपबंधों के अधीन कटौतियां;
(iiक) कुटुम्ब पेंशन की प्रकृति की आय की दशा में ऐसी आय के तैंतीस सही एक बटा तीन प्रतिशत के बराबर राशि की या पंद्रह हजार रुपए की, इनमें से जो भी कम हो, कटौती।
स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, ''कुटुम्ब पेंशन'' से अभिप्रेत है किसी कर्मचारी की मृत्यु की दशा में उसके कुटुम्ब के किसी व्यक्ति को नियोजक द्वारा नियमित रूप से संदेय मासिक रकम;
(iii) ऐसा कोर्इ अन्य व्यय (जो पूंजीगत व्यय की प्रकृति का नहीं) जो ऐसी आय पैदा करने या अर्जित करने के प्रयोजन के लिए संपूर्णत: और अनन्यत: उपगत या किया गया हो;
(iv) धारा 56 की उपधारा (2) के खंड (viii) में निर्दिष्ट प्रकृति की आय की दशा में, ऐसी आय के पचास प्रतिशत के बराबर किसी राशि की कटौती और इस धारा के किसी अन्य खंड के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
स्पष्टीकरण.–[वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया।]
[वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

