कटौतियां
कटौतियां
7757. "अन्य स्रोतों से आय" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना निम्नलिखित कटौतियां करने के पश्चात् की जाएगी, अर्थात् :–
(i) 77क[धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न] लाभांशों 78[या प्रतिभूतियों पर ब्याज] की दशा में ऐसी कोर्इ युक्तियुक्त राशि जो निर्धारिती की ओर से ऐसे लाभांश 79[या ब्याज] वसूल करने के प्रयोजन के लिए बैंककार या अन्य व्यक्ति को कमीशन या पारिश्रमिक स्वरूप संदत्त की गर्इ है;
80[(iक) उस प्रकार की आय की दशा में जो धारा 2 के खंड (24) के उपखंड (x) में दी गर्इ है और जो "अन्य स्रोतों से आय" शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य है जहां तक हो सके, धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (vक) के उपबंधों के अनुसार कटौतियां;]
(ii) इस प्रकार की आय की दशा में जो धारा 56 की उपधारा (2) के खंड (ii) और खंड (iii) में निर्दिष्ट की गर्इ है, यावत्शक्य धारा 30 के खंड (क) के उपखंड (ii) और खंड (ग), धारा 31 और धारा 32 की 81[उपधारा (1) 82[* * *] और (2)] के उपबंधों के अनुसार तथा 83[धारा 38] के उपबंधों के अधीन कटौतियां;
84[(iiक) कुटुम्ब पेंशन की प्रकृति की आय की दशा में ऐसी आय के तैंतीस सही एक बटा तीन प्रतिशत के बराबर राशि की या 85[पंद्रह] हजार रुपए की, इनमें से जो भी कम हो, कटौती।]
स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "कुटुम्ब पेंशन" से अभिप्रेत है किसी कर्मचारी की मृत्यु की दशा में उसके कुटुम्ब के किसी व्यक्ति को नियोजक द्वारा नियमित रूप से संदेय मासिक रकम;
(iii) ऐसा कोर्इ अन्य व्यय (जो पूंजीगत व्यय की प्रकृति का नहीं) जो ऐसी आय पैदा करने या अर्जित करने के प्रयोजन86 के लिए संपूर्णत: और अनन्यत: उपगत या किया गया हो:
87[* * *]
स्पष्टीकरण.–88[वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया।]
77. परिपत्र सं. 156, तारीख 23.12.1974, परिपत्र सं. 594, तारीख 27.2.1991, परिपत्र सं. 648, तारीख 30.3.1993 और परिपत्र सं. 677, तारीख 28.1.1994 भी देखिये। ब्यौरे के लिए, देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
सुसंगत केस लाज़ के लिये देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
77क. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से अंत:स्थापित।
78. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
79. यथोक्त द्वारा अन्त:स्थापित।
80. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से अंत:स्थापित।
81. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से "उपधारा (1) और (2)" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
82. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से ", (1क)" का लोप किया गया।
83. यथोक्त द्वारा "धारा 34 और 38" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
84. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1990 से अंत:स्थापित।
85. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से "बारह" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
86. 'प्रयोजन' पद के अर्थ के लिए, देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
87. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से परन्तुक का लोप किया गया। लोप से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.6.1976 से यथा अंत:स्थापित और बाद में वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1989 से भूतलक्षी प्रभाव से प्रतिस्थापित परन्तुक इस प्रकार था :
"परन्तु खंड (i) या खंड (iii) की कोर्इ बात निर्धारिती के मामले में जो विदेशी कंपनी हो धारा 115क की उपधारा (1) के खंड (क) या खंड (कक) या खंड (कख) में निर्दिष्ट आय की संगणना में लागू नहीं होगी।"
88. लोप से पहले स्पष्टीकरण इस प्रकार था :
"स्पष्टीकरण.–इस धारा और धारा 58 के प्रयोजनों के लिए 'विदेशी कंपनी' का वही अर्थ होगा जो उसका धारा 80ख में है।"
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा संशोधित रूप में]

