आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 54ज

नर्इ आस्ति अर्जित करने या पूंजी अभिलाभ की रकम का निक्षेप या विनिधान करने के लिए समय का विस्तार

धारा

धारा संख्या

54ज

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2011

नर्इ आस्ति अर्जित करने या पूंजी अभिलाभ की रकम का निक्षेप या विनिधान करने के लिए समय का विस्तार

नर्इ आस्ति अर्जित करने या पूंजी अभिलाभ की रकम का निक्षेप या विनिधान करने के लिए समय का विस्तार

8[नर्इ आस्ति अर्जित करने या पूंजी अभिलाभ की रकम का निक्षेप या विनिधान करने के लिए समय का विस्तार

54ज. धारा 54, धारा 54ख, धारा 549[* * *] 10[, 54ड़ग] और धारा 54च में किसी बात के होते हुए भी, जहां मूल आस्ति का अंतरण किसी विधि के अधीन अनिवार्य अर्जन के रूप में है और ऐसे अर्जन के लिए दिलायी गर्इ प्रतिकर रकम निर्धारिती द्वारा ऐसे अंतरण की तारीख को प्राप्त नहीं की जाती है, वहां, निर्धारिती द्वारा नर्इ आस्ति अर्जित करने के लिए, यथास्थिति, उन धाराओं में निर्दिष्ट अवधि अथवा ऐसे प्रतिकर के संबंध में, जो ऐसे अंतरण की तारीख को प्राप्त नहीं होता है, पूंजी अभिलाभ की रकम का निक्षेप या विनिधान करने के लिए उन धाराओं के अधीन निर्धारिती को उपलब्ध अवधि की ऐसा प्रतिकर प्राप्त करने की तारीख से गणना की जाएगी :

परन्तु जहां मूल आस्ति के अंतरण की बाबत प्रतिकर किसी विधि के अधीन अनिवार्य अर्जन के रूप में, 1 अप्रैल, 1991 से पूर्व प्राप्त होता है, वहां पूर्वोक्त अवधि या अवधियों का, यदि वे समाप्त हो गर्इ हों, विस्तार 31 दिसम्बर, 1991 तक होगा।]

 

8. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से अंत:स्थापित।

9. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1992 से "54ड़" का लोप किया गया।

10. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2001 से, "54ड़क, 54ड़ख" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पहले कोट किए गए अंक और अक्षर वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से अंत:स्थापित किए गए थे।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2011 द्वारा संशोधित रूप में]

© कॉपीराइट. टैक्समैन पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड

फ़ुटनोट