औद्योगिक उपक्रम को शहरी क्षेत्र से किसी विशेष आर्थिक जोन में स्थानान्तरित करने की दशा में आस्तियों के अंतरण पर पूंजी अभिलाभों की छूट
औद्योगिक उपक्रम को शहरी क्षेत्र से किसी विशेष आर्थिक जोन में स्थानान्तरित करने की दशा में आस्तियों के अंतरण पर पूंजी अभिलाभों की छूट
54छक. (1) धारा 54छ में की किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी पूंजी आस्ति के, जो किसी शहरी क्षेत्र में स्थित ऐसे औद्योगिक उपक्रम के कारबार के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त मशीनरी या संयंत्र या भवन या भूमि है या भवन या भूमि में के कोर्इ अधिकार हैं अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ पर, जो किसी विशेष आर्थिक जोन में चाहे वह किसी शहरी क्षेत्र में या किसी अन्य क्षेत्र में विकसित हो ऐसे औद्योगिक उपक्रम के स्थानांतरण के अनुक्रम में या उसके परिणामस्वरूप हुए हैं और निर्धारिती ने उस तारीख से, जिसको अंतरण हुआ था, एक वर्ष या उसके तीन वर्ष पश्चात् की अवधि के भीतर,–
(क) उस विशेष आर्थिक जोन में, जिसमें उक्त उपक्रम स्थानांतरित किया गया है, औद्योगिक उपक्रम के कारबार के प्रयोजनों के लिए मशीनरी या संयंत्र क्रय किया है;
(ख) विशेष आर्थिक जोन में उसने अपने कारबार के प्रयोजनों के लिए भवन या भूमि का अर्जन किया है या भवन का सन्निर्माण किया है;
(ग) मूल आस्ति को स्थानांतरित किया है और ऐसे उपक्रम के स्थापन को ऐसे विशेष आर्थिक जोन में अंतरित किया है; और
(घ) केंद्रीय सरकार द्वारा इस धारा के प्रयोजनों के लिए विरचित किसी स्कीम में विनिर्दिष्ट किसी अन्य प्रयोजनों पर व्यय उपगत किए हैं,
वहां पूंजी अभिलाभ को ऐसे पूर्ववर्ष की, जिसमें अंतरण हुआ था, आय के रूप में आय-कर से प्रभारित करने की बजाय उस पर उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए इस धारा के निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार कार्यवाही की जाएगी, अर्थात्,–
(i) यदि पूंजी अभिलाभ की राशि खंड (क) से (घ) में वर्णित सभी या किन्हीं प्रयोजनों के संबंध में उपगत लागत और व्ययों से (ऐसी लागत और व्ययों को इस धारा में इसके पश्चात् नर्इ आस्ति कहा गया है) अधिक है तो पूंजी अभिलाभ और नर्इ आस्ति की लागत के बीच के अंतर को धारा 45 के अधीन पूर्ववर्ष की आय के रूप में प्रभारित किया जाएगा; और नर्इ आस्ति की बाबत, यथास्थिति, उसके क्रय किए जाने, अर्जित किए जाने, सन्निर्मित किए जाने या अंतरित किए जाने से तीन वर्ष की अवधि के भीतर उसके अंतरण से उद्भूत किसी पूंजी अभिलाभ की संगणना के प्रयोजन के लिए लागत शून्य होगी; या
(ii) यदि पूंजी अभिलाभ की रकम, नर्इ आस्ति की लागत के बराबर या उससे कम है तो पूंजी अभिलाभ धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं किया जाएगा और किसी नर्इ आस्ति की बाबत यथास्थिति उसके क्रय किए जाने, अर्जित किए जाने, सन्निर्मित किए जाने या अंतरित किए जाने से तीन वर्ष की अवधि के भीतर उसके अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ की संगणना के प्रयोजन के लिए पूंजी लागत में से पूंजी अभिलाभ की रकम को घटा दिया जाएगा।
स्पष्टीकरण.–इस उपधारा में,–
(क) "विशेष आर्थिक जोन" का वही अर्थ है जो इसका विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 के खण्ड (यक) में है;
(ख) "शहरी क्षेत्र" से किसी नगर निगम या नगरपालिका की सीमाओं के भीतर आने वाला ऐसा क्षेत्र अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार, जनसंख्या, उद्योग संकेन्द्रण क्षेत्र, क्षेत्र की समुचित योजना की आवश्यकता और अन्य सुसंगत कारकों को ध्यान में रखते हुए, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए शहरी क्षेत्र घोषित कर सकेगी।
(2) पूंजी अभिलाभ की वह रकम, जो निर्धारिती द्वारा उपधारा (1) के खंड (क) से (घ) में वर्णित सभी या किन्हीं प्रयोजनों के संबंध में उस तारीख से, जिसको मूल आस्ति का अंतरण हुआ था, पूर्व एक वर्ष के भीतर उपगत लागत और व्ययों के मद्दे प्रभाजित नहीं की जाती है या जिसका धारा 139 के अधीन आय को विवरणी दिए जाने की तारीख से पूर्व पूर्वोक्त सभी या किन्हीं प्रयोजनों के लिए उसके द्वारा उपयोग नहीं किया जाता है, उसके द्वारा ऐसी विवरणी दिए जाने के पूर्व उसके द्वारा किसी ऐसे बैंक या ऐसी संस्था, जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाए, के खाते में निक्षिप्त की जाएगी (ऐसा निक्षेप धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी दिए जाने के लिए निर्धारिती की दशा में किसी भी दशा में लागू नियत तारीख के अपश्चात् नहीं किया जाए) और उसका उपयोग इस निमित्त किसी ऐसी स्कीम जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विरचित करे, के अनुसार किया जाएगा और ऐसी विवरणी के साथ ऐसे निक्षेप का सबूत होगा; और, उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, निर्धारिती द्वारा पूर्वोक्त सभी या किन्हीं प्रयोजनों के लिए पहले उपयोग की गर्इ रकम, यदि कोर्इ हो, और इस प्रकार निक्षिप्त की गर्इ रकम जोड़कर नर्इ आस्ति की लागत समझी जाएगी :
परंतु यदि इस उपधारा के अधीन निक्षिप्त रकम का उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर उस उपधारा के खंड (क) से (घ) में वर्णित सभी या किन्हीं प्रयोजनों के लिए पूर्णत: या भागत: उपयोग नहीं किया जाता है तो,–
(i) इस प्रकार उपयोग न की गर्इ रकम धारा 45 के अधीन उस पूर्ववर्ती वर्ष की, जिसमें मूल आस्ति के अंतरण की तारीख से तीन वर्ष की अवधि समाप्त होती है, आय के रूप में प्रभारित की जाएगी; और
(ii) निर्धारिती ऐसी रकम, पूर्वोक्त स्कीम के अनुसार निकालने के लिए हकदार होगा।
[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

