आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 54च

निवास गृह में विनिधान की दशा में कतिपय पूंजी आस्तियों के अंतरण पर पूंजी लाभ का प्रभारित न किया जाना

धारा

धारा संख्या

54च

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2024 (सं.1)

निवास गृह में विनिधान की दशा में कतिपय पूंजी आस्तियों के अंतरण पर पूंजी लाभ का प्रभारित न किया जाना

निवास गृह में विनिधान की दशा में कतिपय पूंजी आस्तियों के अंतरण पर पूंजी लाभ का प्रभारित न किया जाना

निवास गृह में विनिधान की दशा में कतिपय पूंजी आस्तियों के अंतरण पर पूंजी लाभ का प्रभारित न किया जाना

54च. (1) उपधारा (4) के उपबंधों के अधीन रहते हुए जहां, किसी निर्धारिती की दशा में, जो एक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है पूंजी अभिलाभ किसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के, जो निवास गृह नहीं है (जिसे धारा में इसके पश्चात् मूल आस्ति कहा गया है), अंतरण से उद्भूत होता है और निर्धारिती ने, जिस तारीख को अंतरण हुआ था उस तारीख से एक वर्ष पूर्व या दो वर्ष की अवधि के पश्चात् भारत में कोई निवास गृह (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् नई आस्ति कहा गया है) क्रय किया है या उस तारीख के पश्चात् तीन वर्षों की कालावधि के भीतर सन्निर्मित किया है, वहां पूंजी अभिलाभ के संबंध में कार्रवाई इस धारा के निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार की जाएगी, अर्थात् :–

() यदि नई आस्ति की लागत मूल आस्ति की बाबत शुद्ध प्रतिफल से कम नहीं है तो ऐसा संपूर्ण पूंजी अभिलाभ धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं किया जाएगा;

() यदि नई आस्ति की लागत मूल आस्ति की बाबत शुद्ध प्रतिफल से कम है तो पूंजी अभिलाभ का उतना भाग जिसका संपूर्ण पूंजी अभिलाभ से वही अनुपात है जो नई आस्ति की लागत का शुद्ध प्रतिफल से है, धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं किया जाएगा :

परन्तु इस उपधारा की कोई बात वहां लागू नहीं होगी जहां–

() निर्धारिती–

(i) मूल आस्ति के अंतरण की तारीख को नई आस्ति से भिन्न एक से अधिक निवास गृह का स्वामी है; या

(ii) मूल आस्ति के अंतरण की तारीख के पश्चात्, एक वर्ष की अवधि के भीतर नई आस्ति से भिन्न कोई निवास गृह खरीदता है; या

(iii) मूल आस्ति के अंतरण की तारीख के पश्चात्, तीन वर्ष की अवधि के भीतर नई आस्ति से भिन्न कोई निवास गृह बनाता है; और

() ऐसे निवास गृह से, जो मूल आस्ति के अंतरण की तारीख को स्वामित्व वाले एक निवास गृह से भिन्न है, आय, ''गृह संपत्ति से आय'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य है।

वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा 1.4.2024 से धारा 54च की उपधारा (1) में पहले पंरतुक के पश्चात् और स्पष्टीकरण से पूर्व निम्नलिखित पंरतुक अंत:स्थापित किया जाएगा ।

परंतु यह और कि जहां नई आस्ति की लागत दस करोड़ रुपए से अधिक हो जाती है, वहां दस करोड़ रुपए से अधिक की रकम को इस उपधारा के प्रयोजन के लिए हिसाब में नहीं लिया जाएगा ।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–

पूंजी आस्ति के अंतरण के संबंध में ''शुद्ध प्रतिफल'' से अभिप्रेत है पूंजी आस्ति के अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या होने वाले प्रतिफल का पूर्ण मूल्य जो ऐसे अंतरण के संबंध में पूर्णत: और अनन्यत: किए गए किसी व्यय को घटाकर आए।

(2) जहां निर्धारिती मूल आस्ति के अंतरण की तारीख के पश्चात् दो वर्ष की अवधि के भीतर नई आस्ति से भिन्न कोई निवास गृह खरीदता है या ऐसी तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर नई आस्ति से भिन्न कोई निवास गृह बनाता है जिसकी आय ''गृह संपत्ति से आय'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य है, वहां मूल आस्ति के अंतरण से उद्भूत होने वाले पूंजी अभिलाभ की रकम को जो उपधारा (1) के, यथार्स्थिति, खंड() या खंड () में यथा उपबंधित नई आस्ति की लागत के आधार पर धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं की गई है उस पूर्ववर्ष के लिए जिसमें ऐसा निवास गृह खरीदा या बनाया गया है, दीर्घकालिक पूंजी आस्तियों के संबंध में ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय समझा जाएगा।

(3) जहां नई आस्ति, उसके विक्रय या निर्माण की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर अंतरित की जाती है, वहां मूल आस्ति के कारण होने वाले पूंजी अभिलाभ की रकम, जो उपधारा (1) के, यथास्थिति, खंड () या खंड ()में, यथा, उपबंधित नई आस्ति की लागत के आधार पर धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं की गई है उस पूर्ववर्ष के लिए जिसमें ऐसी नई आस्ति अंतरित की जाती है, दीर्घकालिक पूंजी आस्तियों के संबंध में ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय समझी जाएगी।

(4) शुद्ध प्रतिफल की रकम, जो निर्धारिती द्वारा उस तारीख के पूर्व जिसको मूल आस्ति का अंतरण किया गया है, एक वर्ष के भीतर बनाई गई नई आस्ति खरीदने के लिए विनियोजित नहीं की जाती है या जिसका उसके द्वारा उपयोग धारा 139 के अधीन आय की विवरणी देने के तारीख के पूर्व नई आस्ति के क्रय या निर्माण के लिए नहीं किया जाता है, ऐसे विवरणी देने से पूर्व उसके द्वारा किसी ऐसे बैंक या संस्था में खाते में निक्षेप की जाएगी ऐसा निक्षेप किसी भी दशा में, धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन उस निर्धारिती की दशा में आय की विवरणी देने के लिए लागू निश्चित तारीख तक किया जाएगा जो ऐसी स्कीम में बताई जाए और ऐसी स्कीम के अनुसार उसका उपयोग किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त बनाए तथा ऐसी विवरणी के साथ ऐसे निक्षेप का सबूत होगा और उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिये, वह रकम, यदि कोई हो, जिसका नई आस्ति के क्रय या निर्माण के लिए निर्धारिती द्वारा पहले ही उपयोग किया जा चुका है, 1[इस प्रकार निक्षिप्त रकम सहित नई आस्ति] की लागत समझी जाएगी :

परन्तु यदि इस उपधारा के अधीन जमा रकम का उपयोग उपधारा (1) में बताई गई अवधि के भीतर नई आस्ति के क्रय या निर्माण के लिए पूर्णत: या भागत: नहीं किया जाता है, तो–

(i) वह रकम जिससे–

() मूल आस्ति के अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभ की रकम, जो उपधारा (1) के, यथास्थिति, खंड ()या खंड () में यथा उपबंधित नई आस्ति की लागत के आधार पर धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं की गई है;

ऐसी रकम से अधिक है

() जो उस समय इस प्रकार प्रभारित नहीं की गई होती, यदि निर्धारिती द्वारा उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर नई आस्ति के क्रय या निर्माण के लिए वस्तुत: उपयोग की गई रकम नई आस्ति की लागत होती,

धारा 45 के अधीन उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में प्रभारित की जाएगी जिसमें मूल आस्ति के अंतरण की तारीख से तीन वर्ष की अवधि समाप्त होती है; और

(ii) निर्धारिती पूर्वोक्त स्कीम के अनुसार उपयोग में न लाई गई रकम वापस लेने का हकदार होगा।

वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा 1.4.2024 से धारा 54च की उपधारा (4) में पंरतुक के पश्चात् निम्नलिखित पंरतुक अंत:स्थापित किया जाएगा ।

परंतु यह और कि इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए दस करोड़ रुपए से अधिक शुद्ध प्रतिफल को हिसाब में नहीं लिया जाएगा ।

स्पष्टीकरण.–[वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से लोप किया गया।]

 

1. वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा 1.4.2024 से "इस प्रकार निक्षिप्त रकम सहित नई आस्ति" शब्दों के स्थान पर "उपधारा (1) के दूसरे परंतुक के अधीन रहते हुए इस प्रकार निक्षिप्त रकम सहित नई आस्ति" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

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