आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 54ड़क

दीर्घकालिक पूंजी आस्तियों के अंतरण पर पूंजी अभिलाभों का विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों में विनिधान की दशा में प्रभारित न किया जाना

धारा

धारा संख्या

54ड़क

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2024 (सं.1)

दीर्घकालिक पूंजी आस्तियों के अंतरण पर पूंजी अभिलाभों का विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों में विनिधान की दशा में प्रभारित न किया जाना

दीर्घकालिक पूंजी आस्तियों के अंतरण पर पूंजी अभिलाभों का विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों में विनिधान की दशा में प्रभारित न किया जाना

दीर्घकालिक पूंजी आस्तियों के अंतरण पर पूंजी अभिलाभों का विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों में विनिधान की दशा में प्रभारित न किया जाना

54ड़क. (1) जहां पूंजी अभिलाभ 1 अप्रैल, 2000 से पूव दीर्घकालिक पूंजी आस्तियों के अंतरण से होता है (इस प्रकार अंतरित पूंजी आस्ति को इस धारा में मूल आस्ति कहा गया है) और निर्धारिती ने ऐसे अंतरण की तारीख के पश्चात् छह मास की अवधि के भीतर किसी भी समय धारा 10 के खंड (23घ) में निर्दिष्ट किसी म्युचुअल फंड की यूनिटों किसी पब्लिक कंपनी के बंधपत्रों, डिबेंचरों, शेयरों में या] जिसे बोर्ड राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे (ऐसी आस्तियों को इस धारा में विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियां कहा गया है) संपूर्ण शुद्ध प्रतिकता या उसके किसी भाग का विनिधान किया है, वहां पूंजी अभिलाभों के बारे में इस धारा के निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी, अर्थात्–

() यदि विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों की लागत मूल आस्ति की बाबत शुद्ध प्रतिफल से कम नहीं है, तो ऐसा सम्पूर्ण पूंजी अभिलाभ धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं किया जाएगा;

() यदि विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों की लागत मूल आस्ति की बाबत शुद्ध प्रतिफल से कम है, तो उतने पूंजी अभिलाभ जो सम्पूर्ण पूंजी अभिलाभ से उतने अनुपात में है जो विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों के अर्जन की लागत का शुद्ध प्रतिफल से है, धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं किया जाएगा।

(2) जहां विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियां अर्जन की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर किसी समय धन में अंतरित या परिवर्तित (अंतरण से भिन्न) की जाती हैं, तो उपधारा (1) के खंड () या खंड ()में उपबंधित रूप में ऐसी विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों की लागत के आधार पर धारा 45 के अधीन प्रभारित मूल आस्तियों के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ की राशि उस पूर्ववर्ष की जिसमें विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियां धन में अंतरित या परिवर्तित (अंतरण से भिन्न) की जाती हैं, दीर्घकालिक पूंजी आस्तियों से संबंधित ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय समझी जाएगी।

स्पष्टीकरण.–जहां मूल आस्ति अंतरित की जाती है और निर्धारिती मूल आस्ति की बाबत शुद्ध प्रतिफल को पूर्णत: या भागत: किन्हीं विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों में विनिहित कर देता है, वहां यह समझा जाएगा कि उसने ऐसी विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों को (अंतरण से भिन्न) उस तारीख को, जिसको ऐसा उधार या अग्रिम धन लिया जाए, धन में बदल लिया है।

(3)1[xxx]

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए—

() किन्हीं विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों के संबंध में ''लागत'' से वह रकम अभिप्रेत है जो मूल आस्ति के अंतरण के फलस्वरूप प्राप्त या प्रोद्भूत शुद्ध प्रतिफल में से ऐसी विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों में विनिहित है;

() पूंजी आस्ति के अंतरण के संबंध में ''शुद्ध प्रतिफल'' से पूंजी आस्ति के अंतरण के फलस्वरूप प्राप्त या प्रोद्भूत प्रतिफल का पूरा मूल्य अभिप्रेत है जिसमें से ऐसे अंतरण के संबंध में पूर्णत: और अनन्यत: उपगत प्रतिफल कम कर दिया जाए।

 

1. वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा 1.4.2023 से लोप किया गया। लोप से पूर्व उपधारा (3) निम्न प्रकार थी:

"(3) जहां विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों की लागत उपधारा (1) के खंड () या खंड () के प्रयोजनार्थ हिसाब में ली गई है, वहां ऐसी लागत के संदर्भ में रिबेट धारा 88 के अधीन अनुज्ञात नहीं की जाएगी।"

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

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