निवास के लिए उपयोग में लार्इ गर्इ संपत्ति के विक्रय पर लाभ
निवास के लिए उपयोग में लार्इ गर्इ संपत्ति के विक्रय पर लाभ
8654. 87[(1)] 88[89[उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां ऐसे निर्धारिती90 की दशा में जो एक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है] पूंजी अभिलाभ ऐसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से पैदा होता है 91[***] और जो ऐसे भवनों या उनसे लगी भूमि91क है और जो ऐसा वास-गृह है, जिसकी आय, ‘‘गृह संपत्ति से आय’’ शीर्ष के अधीन प्रभार्य है (जिसे इस धारा में आगे मूल आस्ति कहा गया है) तथा निर्धारिती ने 92[उस तारीख के, जिसको अंतरण हुआ है, एक वर्ष पूर्व या दो वर्ष पश्चात् 92क[भारत में एक निवास गृह क्रय93 किया है] या उस तारीख के पश्चात् तीन वर्षों की कालावधि के भीतर सन्निर्मित किया है] वहां], पूंजी अभिलाभ पर उस पूर्ववर्ष के लिए जिसमें अंतरण हुआ था आय के रूप में आय-कर प्रभारित किए जाने के बजाय, उसके संबंध में इस धारा के निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार कार्रवार्इ की जाएगी, अर्थात्–
(i) यदि पूंजी अभिलाभ की रकम 94[इस प्रकार खरीदे गए या बनाए गए 95[वास-गृह] की लागत से अधिक है (जिसे इस धारा के आगे नर्इ आस्ति कहा गया है)] तो पूंजी अभिलाभ की राशि और नर्इ आस्ति का अंतर धारा 45 के अधीन पूर्ववर्ष की आय के रूप में प्रभारित किया जाएगा; और नर्इ आस्ति की बाबत, उसके क्रय या निर्माण जो भी हो के तीन वर्ष की अवधि के भीतर उसके अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभ की संगणना करने के प्रयोजन के लिए लागत शून्य होगी; या
(ii) यदि पूंजी अभिलाभ की रकम नर्इ आस्ति की लागत के बराबर या उससे कम है, तो पूंजी अभिलाभ धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं किया जाएगा; और नर्इ आस्ति की बाबत यथास्थिति उसके क्रय या निर्माण के संबंध में तीन वर्ष की अवधि के भीतर उसके अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभ की संगणना करने के प्रयोजन के लिए पूंजी अभिलाभ की रकम में से लागत घटा दी जाएगी।
96[***]
97[(2) पूंजी अभिलाभ की रकम, जो निर्धारिती द्वारा उस तारीख के पूर्व जिसको मूल आस्ति का अंतरण किया गया है, एक वर्ष के भीतर किए गए नर्इ आस्ति के क्रय में नहीं लगार्इ जाती है या जिसका उसके द्वारा उपयोग धारा 139 के अधीन, आय की विवरणी देने की तारीख के पूर्व नर्इ आस्ति के क्रय या निर्माण के लिए नहीं किया जाता है, ऐसी विवरणी देने के पूर्व उसके द्वारा किसी ऐसे बैंक या संस्था में खाते में जमा की जाएगी [ऐसी जमा किसी भी दशा में धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन उस निर्धारिती की दशा में आय की विवरणी देने के लिए लागू निश्चित तारीख तक की जाएगी] जो ऐसी स्कीम में बतार्इ जाए और ऐसी स्कीम98 के अनुसार उसका उपयोग किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त बनाए तथा ऐसी विवरणी के साथ ऐसी जमा का सबूत भी प्रस्तुत किया जाएगा और उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए वह रकम, यदि कोर्इ हो, जिसका नर्इ आस्ति के क्रय या निर्माण के लिए निर्धारिती द्वारा पहले ही उपयोग किया जा चुका है, इस प्रकार जमा रकम सहित नर्इ आस्ति की लागत समझी जाएगी :
परन्तु यदि इस उपधारा के अधीन जमा रकम का उपयोग उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर नर्इ आस्ति खरीदने या बनाने में पूर्णत: या भागत: नहीं किया जाता है, तो–
(i) इस प्रकार अप्रयुक्त रही रकम धारा 45 के अधीन उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में कर से प्रभारित की जाएगी जिसमें मूल आस्ति के अंतरण की तारीख से तीन वर्ष की अवधि समाप्त होती है; और
(ii) निर्धारिती उपरोक्त स्कीम के अनुसार ऐसी रकम को वापस लेने का हकदार होगा।
स्पष्टीकरण.–99[वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से लोप किया गया।]
86. परिपत्र सं. 471, तारीख 15.10.1986, परिपत्र सं. 520, तारीख 11.8.1988, परिपत्र सं. 538, तारीख 13.7.1989, परिपत्र सं. 672, तारीख 16.12.1993, परिपत्र सं. 667, तारीख 18.10.1993 और परिपत्र सं. 743, तारीख 6.5.1996 भी देखिये।
सुसंगत केस लाज़ देखिए।
87. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1974 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
88. वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1983 से प्रतिस्थापित।
89. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ‘‘ऐसी दशा में जहां निर्धारिती व्यष्टि हो’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित।
90. ‘‘निर्धारिती’’ और “उनसे लगी भूमि” पदों के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए।
91. वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1985 से ‘‘जिसे धारा 53 के उपबंध लागू नहीं होते हैं” शब्दों का लोप किया गया।
91क. ‘‘निर्धारिती’’ और “उनसे लगी भूमि” पदों के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए।
92. वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से, ‘‘उस तारीख के, जिसको अंतरण हुआ है, पूर्व या पश्चात् क्रय किया है” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
92क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.4.2015 से “कोर्इ निवास गृह क्रय किया है या उस तारीख के पश्चात् तीन वर्षों की कालावधि के भीतर सन्निर्मित किया है” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
93. ‘क्रय किया है’ शब्दों के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिये।
94. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1974 से भूतलक्षी प्रभाव से ‘‘नर्इ आस्ति की लागत से अधिक है’’ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
95. वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1983 से ‘गृह संपत्ति’ के स्थान पर प्रतिस्थापित।
96. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से लोप किया गया। वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1983 से यथाअंत:स्थापित मूल स्पष्टीकरण इस प्रकार था :
‘स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, ‘‘दीर्घकालिक पूंजी आस्ति’’ से ऐसी पूंजी आस्ति अभिप्रेत है जो अल्पकालिक पूंजी आस्ति नहीं है।’
97. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से प्रतिस्थापित इससे पूर्व वित्त अधिनियम 1978 द्वारा 1.4.1974 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित और वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1983 से और वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से संशोधित किया गया था।
98. देखें पूंजी अभिलाभ लेखा स्कीम, 1988-सा.का.नि. 724(इ), तारीख 22.6.1988 के पाठ के लिए तथा निक्षेप प्राप्त करने और लेखा रखने के लिए विनिर्दिष्ट बैंकों की प्राधिकृत शाखाओं की सूची के लिए सा.का.नि. 725(इ), तारीख 22.6.1988।
99. लोप से पहले स्पष्टीकरण वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से यथासंशोधित किया गया था।
[वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा संशोधित रूप में]

