आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 50ग

कतिपय दशाओं में प्रतिफल के पूर्ण मूल्य के लिए विशेष उपबंध

धारा

धारा संख्या

50ग

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2006

कतिपय दशाओं में प्रतिफल के पूर्ण मूल्य के लिए विशेष उपबंध

कतिपय दशाओं में प्रतिफल के पूर्ण मूल्य के लिए विशेष उपबंध

11[कतिपय दशाओं में प्रतिफल के पूर्ण मूल्य के लिए विशेष उपबंध

50ग. (1) जहां निर्धारिती द्वारा, किसी पूंजीगत आस्ति, जो भूमि या भवन या दोनों है, के अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या उपार्जित प्रतिफल ऐसे अंतरण की बाबत स्टाम्प शुल्क के संदाय के प्रयोजन के लिए राज्य सरकार के किसी प्राधिकारी द्वारा (जिसे इसमें इसके पश्चात् इस धारा में "स्टांप मूल्यांकन प्राधिकारी" कहा गया है) अपनाए गए या निर्धारित किए गए मूल्य से कम है तो इस प्रकार अपनाया गया या निर्धारित किया गया मूल्य धारा 48 के प्रयोजनों के लिए, ऐसे अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या उपार्जित प्रतिफल का पूरा मूल्य समझा जाएगा।

(2) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जहां–

() निर्धारिती किसी निर्धारण अधिकारी के समक्ष यह दावा करता है कि उपधारा (1) के अधीन स्टांप मूल्यांकन प्राधिकारी द्वारा अपनाया गया या निर्धारित किया गया मूल्य, अंतरण की तारीख को, संपत्ति के उचित बाजार मूल्य से अधिक है;

() उपधारा (1) के अधीन स्टांप मूल्यांकन प्राधिकारी द्वारा इस प्रकार अपनाया गया या निर्धारित किया गया मूल्य किसी अपील या पुनरीक्षण में विवादित नहीं है या किसी अन्य प्राधिकारी, न्यायालय, उच्च न्यायालय के समक्ष कोर्इ निर्देश नहीं किया गया है,

वहां निर्धारण अधिकारी, पूंजीगत आस्ति के मूल्यांकन को किसी मूल्यांकन अधिकारी को निर्दिष्ट कर सकेगा और जहां ऐसा कोर्इ निर्देश किया जाता है वहां धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27) की धारा 16क की उपधारा (2), (3), (4), (5) और (6), धारा 23क की उपधारा (1) का खंड (i) और उपधारा (6) और (7), धारा 24 की उपधारा (5), धारा 34कक, धारा 35 और धारा 37 के उपबंध, आवश्यक उपांतरणों सहित ऐसे निर्देश के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे कि वे उक्त अधिनियम की धारा 16क की उपधारा (1) के अधीन निर्धारण अधिकारी द्वारा किए गए किसी निर्देश के संबंध में लागू होते हैं।

स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "मूल्यांकन अधिकारी" का वही अर्थ है जो उसका धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27) की धारा 2 के खंड (द) में है।

(3) उपधारा (2) में अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां उपधारा (2) के अधीन अभिनिश्चित मूल्य उपधारा (1) में निर्दिष्ट स्टांप मूल्यांकन प्राधिकारी द्वारा अपनाए गए या निर्धारित किए गए मूल्य से अधिक है, वहां ऐसे प्राधिकारी द्वारा इस प्रकार अपनाया गया या निर्धारित किया गया मूल्य अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या उपार्जित प्रतिफल का पूरा मूल्य माना जाएगा।]

 

11. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा संशोधित रूप में]

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