मंदी विक्रय की दशा में पूंजी अभिलाभ की संगणना के लिए विशेष उपबंध
मंदी विक्रय की दशा में पूंजी अभिलाभ की संगणना के लिए विशेष उपबंध
50ख. (1) किसी पूर्ववर्ष में किए गए मंदी विक्रय से उद्भूत कोई लाभ या अभिलाभ, दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ के रूप में आय-कर से प्रभार्य होगा और उस पूर्ववर्ष की, जिसमें अंतरण होता है, आय समझा जाएगा :
परन्तु मंदी विक्रय के अधीन किसी ऐसी पूंजी आस्ति के अंतरण से, जो निर्धारिती के उसके अंतरण की ठीक पूर्ववर्ती तारीख से छत्तीस मास में अनधिक तक स्वामित्व वाला और उसके द्वारा धारित एक या अधिक उपक्रम हैं, उद्भूत कोई लाभ या अभिलाभ अल्पकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ समझा जाएगा।
66कक[(2) पूंजी आस्तियों के संबंध में, जो गिरावट विक्रय के माध्यम से अंतरित कोई उपक्रम या प्रभाग है,—
(i) यथास्थिति, उपक्रम में प्रभाग का "शुद्ध मूल्य" धारा 48 और धारा 49 के प्रयोजन के लिए अर्जन की लागत और उन्नयन की लागत समझी जाएगी और धारा 48 के दूसरे परंतुक में अंतर्विष्ट उपबंधों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाएगा;]
(ii) विहित रीति में संगणित, अंतरण की तारीख को पूंजी आस्तियों का ऋजु बाजार मूल्य, ऐसी पूंजी आस्ति के अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या उद्भूत प्रतिफल का पूर्ण मूल्य समझा जाएगा।]
(3) प्रत्येक निर्धारिती, मंदी विक्रय की दशा में, 67कक[धारा 44कघ में निर्दिष्ट विनिर्दिष्ट तारीख से पूर्व, धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे के स्पष्टीकरण में यथापरिभाषित लेखाकार की रिपोर्ट] किसी लेखाकार की, यथास्थिति, कंपनी, उपक्रम या प्रभाग के शुद्ध मूल्य की संगणना उपदर्शित करते हुए और यह प्रमाणित करते हुए कि यथास्थिति, कंपनी, उपक्रम या प्रभाग का शुद्ध मूल्य इस धारा के उपबंधों के अनुसार सही रूप से प्राप्त किया गया है, रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
स्पष्टीकरण 1.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए ''शुद्ध मूल्य'' उपक्रम या प्रभाग की कुल आस्तियों का सकल मूल्य होगा जो लेखाबहियों में अंकित ऐसे उपक्रम या प्रभाग के दायित्वों के मूल्य को कम कर के आए :
परन्तु आस्तियों के पुनर्मूल्यांकन के कारण आस्तियों के मूल्य में किसी प्रकार के परिवर्तन की शुद्ध मूल्य निकालने के प्रयोजनों के लिए उपेक्षा की जाएगी।
स्पष्टीकरण 2.–शुद्ध मूल्य की संगणना करने के लिए कुल आस्तियों का सकल मूल्य,–
(क) अवक्षयणीय आस्तियों की दशा में, धारा 43 के खंड (6) के उपखंड (ग) की मद (i) की उपमद (ग)में के उपबंधों के अनुसार अवधारित आस्ति-समूह का अवलिखित मूल्य होगा;
66कख[(कक) ऐसी पूंजी आस्ति की दशा में, किसी कारबार या वृत्ति की गुडविल है, जिसका अर्जन निर्धारिती द्वारा पूर्ववर्ती स्वामी से क्रय द्वारा नहीं किया गया है, शून्य होगा;]
(ख) ऐसी पूंजी आस्तियों की दशा में, जिनकी बाबत संपूर्ण व्यय को धारा 35कघ के अधीन कटौती के रूप में अनुज्ञात किया गया है, या अनुज्ञेय है, शून्य होगा; और
(ग) अन्य आस्तियों की दशा में, ऐसी आस्तियों का बही मूल्य होगा।
66कक. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से प्रतिस्थापित / प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (2) निम्न प्रकार थी:
"(2) किसी पूंजी आस्ति के संबंध में, जो ऐसे विक्रय के रूप में अंतरित कोई उपक्रम या प्रभाग है धारा 48 और 49 के प्रयोजनों के लिए अर्जन की लागत और सुधार की लागत, यथास्थिति, उपक्रम या प्रभाग का ''शुद्ध लाभ'' मानी जाएगी और धारा 48 के दूसरे परंतुक में अंतर्विष्ट उपबंधों पर ध्यान नहीं दिया जाएगा।"
66कख. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से अतंस्थापित।
67कक. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2020 से "आय की विवरणी के साथ विहित प्ररूप में धारा 288 के स्पष्टीकरण में यथापरिभाषित" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

