आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 49

अर्जन के कुछ ढंगों के संबंध में लागत

धारा

धारा संख्या

49

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2015

अर्जन के कुछ ढंगों के संबंध में लागत

अर्जन के कुछ ढंगों के संबंध में लागत

अर्जन के कुछ ढंगों के संबंध में लागत

5649. 57[(1)] जहां पूंजी आस्ति निम्नलिखित रीति से निर्धारिती की सम्पत्ति हो गर्इ है–

(i) हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के पूर्ण या आंशिक विभाजन पर आस्तियों के किसी वितरण पर;

(ii)  किसी दान या विल के अधीन;

(iii) ()  उत्तराधिकार, विरासत या न्यागमन58 द्वारा, या

59[() किसी फर्म, व्यष्टि-निकाय या व्यक्ति-संगम के विघटन पर अन्य आस्तियों के किसी वितरण पर जहां ऐसा विघटन 1 अप्रैल, 1987 से पहले किसी समय हुआ है, या]

()  किसी कंपनी के समापन पर आस्तियों के किसी वितरण पर, या

() किसी प्रतिसंहरणीय या अप्रतिसंहरणीय न्यास को अन्तरण के अधीन, या

()  किसी ऐसे अंतरण के अधीन जैसा धारा 47 के खण्ड (iv) 60[या खण्ड (v)] 61[या खंड (vi)] 62[या खंड (viक)] 63[63क[या खंड (viकक)] 64[या खंड (viगक) या 64क[खंड (viगख)]] 64ख[या खंड (xiii) या खंड (xiiiख) या खंड (xiv)]] में निर्दिष्ट है;

65[(iv)  यदि ऐसा निर्धारिती हिंदू अविभक्त कुटुम्ब है, तो 31 दिसम्बर, 1969 के पश्चात् किसी भी समय धारा 64 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट ढंग से,]

वहां उस आस्ति के अर्जन की लागत, जिस पर कि संपत्ति के पूर्वतन स्वामी ने उसे अर्जित किया, वह समझी जाएगी जो यथास्थिति पूर्वतन स्वामी या निर्धारिती द्वारा आस्तियों की बाबत उपगत या किए गए किसी सुधार की लागत को जोड़ कर आए।

66[स्पष्टीकरण.–इस 67[उपधारा] में निर्धारिती के स्वामित्वाधीन किसी पूंजी आस्ति के संबंध में ‘‘संपत्ति के पूर्वतन स्वामी’’ पद से पूंजी आस्ति का वह अंतिम पूर्वतन स्वामी अभिप्रेत है जिसने उसका अर्जन इस 68[उपधारा] के खंड (i) या खंड (ii) या खंड (iii) 69[या खंड (iv)] में निर्दिष्ट अर्जन के ढंग से भिन्न ढंग से किया हो।]

70[(2) जहां पूंजी आस्ति जो किसी ऐसी समामेलित कंपनी का, जो कि भारतीय कंपनी है, शेयर है, या धारा 47 के खंड (vii) में निर्दिष्ट अंतरण के प्रतिफलस्वरूप निर्धारिती की संपत्ति हो गर्इ हो, वहां उस आस्ति के अर्जन की लागत, समामेलन कंपनी में शेयर या शेयरों के अर्जन की उसकी लागत समझी जाएगी।]

71[(2क) जहां पूंजी आस्ति, जो किसी कंपनी का शेयर या डिबेंचर है, धारा 47 के खंड (x) या खंड (xक) में निर्दिष्ट अंतरण के प्रतिफलस्वरूप निर्धारिती की संपत्ति हो गर्इ है, वहां निर्धारिती को आस्ति के अर्जन की लागत ऐसे डिबेंचर, डिबेंचर-स्टाक, बंधपत्र या निक्षेप प्रमाणपत्र की, जिसकी बाबत ऐसी आस्ति निर्धारिती द्वारा अर्जित की गर्इ है, लागत का भाग समझी जाएगी।]

72[(2कक) जहां पूंजी अभिलाभ धारा 17 के खंड (2) के उपखंड (vi) में निर्दिष्ट विनिर्दिष्ट प्रतिभूति या श्रमसाध्य साधारण शेयरों के अंतरण से उद्भूत होता है, वहां ऐसी प्रतिभूति या शेयरों के अर्जन की लागत वह उचित बाजार मूल्य होगी जिसे उक्त उपखंड के प्रयोजनों के लिए हिसाब में लिया गया है।]

72क[(2ककक) जहां ऐसी पूंजी आस्ति जो सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2008 (2009 का 6) की धारा 42 में निर्दिष्ट संपरिवर्तन पर निर्धारिती की संपत्ति बन गर्इ है, वहां आस्ति के अर्जन की लागत को उसके संपरिवर्तन से ठीक पूर्व कंपनी में शेयर या शेयरों के उसे अर्जित होने की लागत समझा जाएगा।]

72ख[(2कख) जहां पूंजी अभिलाभ विनिर्दिष्ट प्रतिभूति या स्वेट साधारण शेयरों के अंतरण से उदभूत होता है वहां ऐसी प्रतिभूति या शेयरों के अर्जन की लागत वह उचित बाजार मूल्य होगी जिसको धारा 115बग की उपधारा (1) के खंड (खक) के अधीन अनुषंगी फायदों के मूल्य की संगणना करते समय ध्यान में रखा गया है।]

                  

वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा 1.4.2016 से धारा 49 की उपधारा (2कख) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा (2कखख) अंत:स्थापित की जाएगी :

(2कखख) जहां पूंजी आस्ति का, जो किसी कंपनी का शेयर है या के शेयर हैं, किसी अनिवासी निर्धारिती द्वारा धारित धारा 115कग की उपधारा (1) के खंड () में निर्दिष्ट सार्वत्रिक निक्षेपागार रसीदों के मोचन पर, ऐसे निर्धारिती द्वारा अर्जन किया जाता है, वहां शेयर या शेयरों के अर्जन की लागत उस शेयर या उन शेयरों की वह कीमत होगी जो किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में उस तारीख को, जिसको ऐसे मोचन का अनुरोध किया गया था, प्रचलित है।

स्पष्टीकरण–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, ‘‘मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज’’ का वही अर्थ होगा जो धारा 43 की उपधारा (5) के स्पष्टीकरण 1 के खंड (ii) में उसका है।

                  

72ग[(2कग) जहां पूंजी आस्ति, जो किसी कारबार न्यास की इकार्इ है, धारा 47 के खंड (xvii) में यथा निर्दिष्ट किसी अंतरण के प्रतिफलस्वरूप निर्धारिती की संपत्ति हो गर्इ है, वहां आस्ति के अर्जन की लागत, उक्त खंड में निर्दिष्ट शेयर के अर्जन की उसकी लागत समझी जाएगी।]

                  

वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा 1.4.2016 से धारा 49 की उपधारा (2कग) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा (2कघ) अंत:स्थापित की जाएगी :

(2कघ) जहां पूंजी आस्ति, जो पारस्परिक निधि की समेकित स्कीम की यूनिट या यूनिटें हैं, धारा 47 के खंड (xviii) में निर्दिष्ट अंतरण के प्रतिफलस्वरूप निर्धारिती की संपत्ति हो गर्इ है, वहां आस्ति के अर्जन की लागत को, पारस्परिक निधि की समेकित स्कीम की यूनिट या यूनिटों के उसे अर्जित होने की लागत समझा जाएगा।

                  

73[(2ख) 74[***]

(2ग) पारिणामी कंपनी में शेयरों के अर्जन की लागत वह रकम होगी, जिसका अविलयित कंपनी में निर्धारिती द्वारा धारित शेयरों के अर्जन की लागत से उसी अनुपात में संबंध है, जो अविलयित कंपनी में अंतरित आस्तियों का शुद्ध बही मूल्य का ऐसे अविलयन से ठीक पहले शुद्ध मूल्य से होता।

(2घ) किसी अविलयित कंपनी में शेयरधारक द्वारा धारित मूल शेयरों के अर्जन की लागत, उपधारा (2ग) के अधीन इस प्रकार प्राप्त रकम में से घटार्इ गर्इ समझी जाएगी।

74क[(2ड़) उपधारा (2), उपधारा (2ग) और उपधारा (2घ) के उपबंध, यथासाध्य, धारा 44घख में यथानिर्दिष्ट सहकारी बैंक के कारबार के पुनर्गठन के संबंध में भी लागू होते हैं।]

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए ‘शुद्ध मूल्य’ से अविलयन से ठीक पूर्व अविलयित कंपनी की लेखा-बहियों में दी गर्इ संदत्त साधारण शेयर पूंजी और साधारण आरक्षितियों का योग अभिप्रेत है।]

75[(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी जहां धारा 47 के, यथास्थिति, खंड (iv) या खंड (v) में निर्दिष्ट किसी पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ को धारा 47क के उपबंधों के आधार पर ‘‘पूंजी अभिलाभ’’ शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय समझा जाता है, वहां ऐसी आस्ति के अर्जन की अंतरिती कंपनी की लागत ऐसी लागत होगी जिसके लिए ऐसी आस्ति उसके द्वारा अर्जित की गर्इ थी।]

75क[(4) जहां पूंजी अभिलाभ किसी संपत्ति के अंतरण से उद्भूत होता है, जिसका मूल्य धारा 56 की उपधारा (2) के खंड (vii) 75ख[या खंड (viiक)] के अधीन आय-कर के अध्यधीन रहा है, वहां ऐसी संपत्ति के अर्जन की लागत वह मूल्य समझी जाएगी जो उक्त खंड (vii) 75ख[या खंड (viiक)] के प्रयोजनों के लिए हिसाब में लिया गया है।]

 

56.  सुसंगत केस लाज़ देखिए

57.  वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से अंत:स्थापित।

58.  ‘‘न्यागमन’’ पद के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए

59.  वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से प्रतिस्थापित।

60.  वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से अंत:स्थापित।

61.  वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से अंत:स्थापित।

62.  वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से अंत:स्थापित।

63.  वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा 1.4.2016 से “या खंड (viकक) या खंड (viगक) या खंड (viगख)” शब्दों के स्थान पर “या खंड (viकक) या खंड (viकख) या खंड (viख) या खंड (viगक) या खंड (viगख) या खंड (viगग)” शब्द रखे जाएंगे।

63क. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2005 से अंत:स्थापित।

64.  वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2008 से अंत:स्थापित।

64क. वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा 1.4.2011 से “खंड (viगख)” के स्थान पर प्रतिस्थापित।

64ख. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.1999 से “या खंड (xiiiख)” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

65.  कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से अंत:स्थापित।

66.  वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से अंत:स्थापित।

67.  वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से ‘‘धारा’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित।

68.  यथोक्त द्वारा प्रतिस्थापित।

69.  कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से अंत:स्थापित।

70.  वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से अंत:स्थापित।

71.  वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.4.2008 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से यथा अंत:स्थापित, उपधारा (2क) इस प्रकार थी:

      ‘‘(2क) जहां पूंजी आस्ति, जो किसी कंपनी का शेयर या डिबेंचर है, धारा 47 के खंड (x) में निर्दिष्ट अंतरण के प्रतिफलस्वरूप निर्धारिती की संपत्ति हो गर्इ है, वहां निर्धारिती को आस्ति के अर्जन की लागत ऐसे डिबेंचर, डिबेंचर स्टाक या निक्षेप प्रमाणपत्र की, जिसकी बाबत ऐसी आस्ति निर्धारिती द्वारा अर्जित की गर्इ है, लागत का भाग समझी जाएगी।’’

72.  वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.4.2010 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2001 से अंत:स्थापित उपधारा (2कक) इस प्रकार थी :

      “(2कक) जहां पूंजी अभिलाभ शेयरों, डिबेंचरों या वारन्टों के अंतरण से उद्भूत होता है जिसका मूल्य धारा 17 के खंड (2) के अधीन परिलब्धि के मूल्य की संगणना करते समय हिसाब में लिया गया है वहां ऐसे शेयरों, डिबेंचरों या वारन्टों के अर्जन की लागत उस खंड के अधीन मूल्य होगी।”

72क. वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा 1.4.2011 से अंत:स्थापित।

72ख. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2008 से अंत:स्थापित।

72ग. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.4.2015 से अंत:स्थापित।

73.  वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से उपधारा (2ख), (2ग) और (2घ) अंत:स्थापित।

74.  वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से लोप किया गया। लोप से पूर्व, उपधारा (2ख) जो कि वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित की गर्इ थी, इस प्रकार से थी :

      ‘‘(2ख) जहां पूंजी अभिलाभ धारा 17 के खंड (2) के उपखंड (iiiक) में निर्दिष्ट खास प्रतिभूति के अंतरण से होता है, वहां ऐसी विनिर्दिष्ट प्रतिभूति के अर्जन की लागत विकल्प के प्रयोग की तारीख को उचित बाजार मूल्य होगी।’’

74क. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2008 से अंत:स्थापित।

75.  कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से अंत:स्थापित।

75क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.10.2009 से अंत:स्थापित।

75ख. वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा 1.6.2010 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा संशोधित रूप में]

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