अंतरण न समझे जाने वाले संव्यवहार
अंतरण न समझे जाने वाले संव्यवहार
647. धारा 45 में अंतर्विष्ट कोर्इ बात निम्नलिखित अन्तरणों को लागू नहीं होगी :–
(i) हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के पूर्ण या आंशिक विभाजन पर पूंजी आस्तियों का कोर्इ वितरण7;
(ii) 8[* * *]
(iii) किसी दान9 या विल या अप्रतिसंहरणीय न्यास के अधीन9 पूंजी आस्ति का कोर्इ अंतरण:
10[परन्तु यह खंड कंपनी द्वारा अपने कर्मचारियों को 11[केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त जारी मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार ऐसे कर्मचारियों को प्रस्थापित कंपनी की किसी कर्मचारी स्टाक विकल्प योजना या स्कीम] के अधीन अपने कर्मचारियों को प्रत्यक्षत: या परोक्षत: आबंटित शेयरों, डिबेंचरों या वारन्टों के रूप में पूंजीगत आस्ति के दान या अप्रतिसंहरणीय न्यास के अधीन अंतरण को लागू नहीं होगा;]
(iv) यदि कंपनी द्वारा अपनी समनुषंगी कंपनी को पूंजी आस्ति का कोर्इ अंतरण, यदि–
(क) मूल कंपनी या उसके नामनिर्देशिती समनुषंगी कंपनी की सम्पूर्ण शेयर पूंजी धारण करते हैं, और
(ख) समनुषंगी कंपनी भारतीय कंपनी है;
12[(v) किसी समनुषंगी कंपनी द्वारा नियंत्री कंपनी को पूंजी आस्ति का कोर्इ अंतरण, यदि,–
(क) समनुषंगी कंपनी की संपूर्ण शेयर पूंजी नियंत्री कंपनी द्वारा धारित है, और
(ख) नियंत्री कंपनी भारतीय कंपनी है :]
13[परन्तु खंड (iv) या खंड (v) की कोर्इ बात, 29 फरवरी, 1988 के पश्चात् व्यापार स्टाक के रूप में किसी पूंजी आस्ति के अंतरण को लागू नहीं होगी;]
14[(vi) समामेलन15 की किसी स्कीम में समामेलक कंपनी द्वारा समामेलित कंपनी की पूंजी आस्ति का कोर्इ अंतरण, यदि समामेलित कंपनी भारतीय कंपनी है;]
16[(viक) समामेलन17 की किसी स्कीम में, समामेलन विदेशी कंपनी द्वारा समामेलित विदेशी कंपनी को ऐसा पूंजी आस्ति का, जो किसी भारतीय कंपनी में धारित कोर्इ शेयर है या शेयर हैं, कोर्इ अंतरण, यदि–
(क) समामेलक विदेशी कंपनी के शेयरधारकों में से कम से कम पच्चीस प्रतिशत शेयरधारक समामेलित विदेशी कंपनी के शेयरधारक बने रहते हैं, और
(ख) ऐसे अंतरण उस देश में जिसमें समामेलक कंपनी निगमित है, पूंजी अभिलाभों पर कोर्इ कर आकृष्ट नहीं करता है;]
18[(viकक) किसी बैंककारी कंपनी की, किसी बैंककारी संस्था के साथ, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 45 की उपधारा (7) के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा मंजूर की गर्इ और प्रवर्तन में लार्इ गर्इ समामेलन की किसी स्कीम में, बैंककारी कंपनी द्वारा बैंककारी संस्था को किसी पूंजी आस्ति का कोर्इ अंतरण।
स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए,–
(i) "बैंककारी कंपनी" का वही अर्थ होगा, जो बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 के खंड (ग)19 में उसका है;
(ii) "बैंककारी संस्था" का वही अर्थ होगा, जो बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 45 की उपधारा (15)19 में उसका है;]
20[(viख) किसी अविलयन में अविलयित कंपनी द्वारा परिणामी कंपनी को, यदि परिणामी कंपनी भारतीय कंपनी है, पूंजी आस्ति का कोर्इ अंतरण;
(viग) किसी अविलयन में अविलयित विदेशी कंपनी द्वारा परिणामी विदेशी कंपनी को ऐसी किसी पूंजी का, जो किसी भारतीय कंपनी में धृत शेयर है या हैं, कोर्इ अंतरण, यदि;
(क) अविलयित विदेशी कंपनी के 21[कम से कम तीन-चौथार्इ शेयरों के मूल्य के शेयरधारक] परिणामी विदेशी कंपनी के शेयरधारक बने रहते हैं; और
(ख) ऐसा अंतरण उस देश में, जिसमें अविलयित विदेशी कंपनी निगमित है, पूंजी अभिलाभों पर कोर्इ कर आकृष्ट नहीं करता है:
परन्तु कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 391 से धारा 39422 के उपबंध इस खंड में निर्दिष्ट अविलयनों की दशा में लागू नहीं होंगे;
22क[(viगक) किसी कारबार के पुनर्गठन में पूर्वाधिकारी सहकारी बैंक द्वारा उत्तराधिकारी सहकारी बैंक को पूंजी आस्ति का कोर्इ अंतरण;
(viगख) किसी कारबार के पुनर्गठन में किसी शेयरधारक द्वारा पूर्वाधिकारी सहकारी बैंक में उसके द्वारा धारित शेयर या शेयरों के रूप में पूंजी आस्ति का कोर्इ अंतरण, यदि अंतरण उत्तराधिकार सहकारी बैंक में किसी शेयर या शेयरों के उसको आबंटन के प्रतिफल स्वरूप किया जाता है।
स्पष्टीकरण–खंड (viगक) और खंड (viगख) के प्रयोजनों के लिए, "कारबार पुनर्गठन", "पूर्वाधिकारी सहकारी बैंक" और "उत्तराधिकारी सहकारी बैंक" पदों का वही अर्थ है जो उनका धारा 44घख में है;]
(viघ) किसी अविलयन की स्कीम में परिणामी कंपनी द्वारा अविलयित कंपनी के शेयरधारकों को शेयरों का कोर्इ अंतरण या पुरोधरण यदि ऐसा अंतरण या पुरोधरण उपक्रम के अविलयन के प्रतिफलस्वरूप किया गया है;]
(vii) समामेलन की स्कीम में शेयरधारक द्वारा ऐसी पूंजी आस्ति का, जो समामेलक कंपनी में उसके द्वारा धारित कोर्इ शेयर है या हैं, कोर्इ अंतरण, यदि–
(क) वह अंतरण 22कक[समामेलित कंपनी में] किसी शेयर या किन्हीं शेयरों के उसको आबंटन के प्रतिफलस्वरूप किया गया है, और
(ख) समामेलित कंपनी भारतीय कंपनी है;]
23[(viiक) किसी अनिवासी द्वारा किसी अन्य अनिवासी को भारत के बाहर ऐसी पूंजी आस्ति का जो धारा 115कग की उपधारा (1) में निर्दिष्ट बंधपत्र या 24[ग्लोबल निक्षेपागार प्राप्तियां] हैं, कोर्इ अंतरण;]
25[(viii) भारत में किसी कृषि भूमि का 1 मार्च, 1970 के पूर्व किया गया कोर्इ अंतरण;]
26[(ix) किसी पूंजी आस्ति का जो कोर्इ कलाकृति, पुरातत्वीय, वैज्ञानिक या कलासंग्रह, पुस्तक या पांडुलिपि, रेखाचित्र, रंगचित्र, फोटोचित्र या प्रिंट है, सरकार या किसी विश्वविद्यालय या राष्ट्रीय संग्रहालय, राष्ट्रीय कला दीर्घा, राष्ट्रीय अभिलेखागार या किसी ऐसे अन्य सार्वजनिक संग्रहालय या संस्था को अंतरण जिसे केंद्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में राष्ट्रीय महत्त्व का या किसी राज्य या सभी भागों में विख्यात के रूप में अधिसूचित27 किया जाए।
स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, ''विश्वविद्यालय'' से किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित या निगमित विश्वविद्यालय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 (1956 का 3) की धारा 3 के अधीन इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये विश्वविद्यालय के रूप में घोषित संस्था भी है;]
28[(x) किसी कंपनी के 29[बंधपत्रों या] डिबेंचरों, डिबेंचर स्टाक या किसी भी रूप के निक्षेप प्रमाणपत्र का संपरिवर्तन के रूप में उस कंपनी के शेयरों का डिबेंचर में कोर्इ अंतरण;]
29क[(xक) धारा 115कग की उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट बंधपत्रों का संपरिवर्तन के रूप में किसी कंपनी के शेयरों या डिबेंचरों में कोर्इ अंतरण ;]
30[(xi) किसी व्यक्ति द्वारा (जो कंपनी न हो) पूंजीगत आस्ति जो मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज की सदस्यता हो, 31 दिसम्बर, 31[1998] को या उससे पूर्व कंपनी को कंपनी द्वारा अंतरक को आबंटित शेयरों के बदले किया गया कोर्इ अंतरण।
स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, ''मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज की सदस्यता'' पद से भारत में स्टाक एक्सचेंज की सदस्यता अभिप्रेत है जो प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) के उपबंधों के अधीन मान्यताप्राप्त है;
(xii) रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 (1986 का 1) की धारा 1832 के अधीन निर्मित और मंजूर की गर्इ स्कीम के अधीन किया गया पूंजीगत आस्ति का जो रुग्ण औद्योगिक कंपनी की भूमि हो, कोर्इ अंतरण, जहां ऐसी रुग्ण औद्योगिक कंपनी उसके कर्मकारों के सहयोग से प्रबंधित की जा रही है:
परन्तु ऐसा अंतरण उस पूर्ववर्ष से आरंभ होने वाली जिसमें उक्त कंपनी उक्त अधिनियम की धारा 1733 की उपधारा (1) के अधीन रुग्ण औद्योगिक कंपनी बन गर्इ है, और उस पूर्ववर्ष से समाप्त होने वाली अवधि के दौरान जिसमें ऐसी कंपनी का सम्पूर्ण शुद्ध मूल्य संचयी हानि के बराबर है या उससे अधिक है।
स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए ''शुद्ध मूल्य'' का वही अर्थ है जो रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 (1986 का 1) की धारा 334 की उपधारा (1) के खंड (छक) में है;]
35[(xiii) 36[फर्म द्वारा चलाए गए कारबार में किसी कम्पनी द्वारा फर्म के उत्तरवर्तन के परिणामस्वरूप किसी फर्म द्वारा किसी कम्पनी को पूंजी आस्ति या अमूर्त आस्ति का अंतरण अथवा भारत में मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज के 37[अनपरस्परीकरण या] निगमीकरण के अनुक्रम में किसी कम्पनी को पूंजी आस्ति का अंतरण जिसके परिणामस्वरूप ऐसी कंपनी व्यक्ति संगम या व्यष्टियों के निकाय की उत्तरवर्ती बन जाती है :]
परन्तु–
(क) उत्तराधिकार से ठीक पूर्व कारबार संबंधी फर्म की 38[या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि निकाय की] सब आस्तियां और दायित्व, कम्पनी की आस्तियां और दायित्व हो जाते हैं;
(ख) उत्तराधिकार से ठीक पूर्व फर्म के भागीदार कंपनी के शेयरधारक उसी अनुपात में बन जाते हैं जिसमें उनके पूंजी लेखा उत्तराधिकार की तारीख को फर्म की पुस्तकों में थे;
(ग) फर्म के भागीदार कंपनी में आबंटित शेयरों से भिन्न प्रत्यक्षत: या परोक्षत: किसी भी रूप या रीति में कोर्इ प्रतिफल या फायदा प्राप्त नहीं करते हैं; और
(घ) फर्म के भागीदारों के कंपनी में शेयरधारणों का योग कंपनी की कुल मतदान शक्ति के 50 प्रतिशत से कम न हो और उनका शेयरधारण उत्तरवर्तन की तारीख से लगातार 5 वर्ष की अवधि तक बना रहे;
39[(ड़) भारत में मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज का 40[अनपरस्परीकरण या] निगमीकरण, 40[अनपरस्परीकरण या] निगमीकरण की ऐसी स्कीम के अनुसार किया जाता है जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) की धारा 3 के अधीन स्थापित भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा अनुमोदित हो;]
40[(xiiiक) किसी पूंजी आस्ति का, जो भारत में किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज के किसी सदस्य द्वारा शेयरों के अर्जन के लिए तथा अनपरस्परीकरण या निगमीकरण की किसी स्कीम के अनुसार, जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) की धारा 3 के अधीन स्थापित भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा अनुमोदित हो उस मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में ऐसे सदस्य द्वारा अर्जित व्यापार या समाशोधन संबंधी अधिकारों के लिए धारित सदस्यता का अधिकार है, कोर्इ अंतरण;]
40क[(xiiiख) किसी प्राइवेट कंपनी या असूचीबद्ध पब्लिक कंपनी द्वारा (जिसे इस खंड में इसके पश्चात् कंपनी कहा गया है) सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2008 (2009 का 6) की धारा 56 या धारा 57 के उपबंधों के अनुसार कंपनी का सीमित दायित्व वाली भागीदारी में संपरिवर्तन होने के परिणामस्वरूप, किसी सीमित दायित्व वाली भागीदारी का किसी पूंजी आस्ति या अमूर्त आस्ति को कोर्इ अंतरण या किसी शेयर धारक द्वारा कंपनी में धारित शेयरों का कोर्इ अंतरण :
परन्तु यह कि, –
(क) संपरिवर्तन के ठीक पूर्व कंपनी की सब आस्तियां और दायित्व, सीमित दायित्व वाली भागीदारी की आस्तियां और दायित्व हो जाएं ;
(ख) संपरिवर्तन के ठीक पूर्व कंपनी के सभी शेयरधारक, सीमित दायित्व वाली भागीदारी के भागीदार बन जाएं और सीमित दायित्व वाली भागीदारी में उनके पूंजी अभिदाय और लाभ में हिस्सा बंटाने का अनुपात उसी अनुपात में होगा जो संपरिवर्तन की तारीख को कंपनी में उनके हिस्सा बंटाने का अनुपात था ;
(ग) कंपनी के शेयरधारक सीमित दायित्व वाली भागीदारी में लाभ और पूंजी अभिदाय में हिस्से से भिन्न किसी रूप में, प्रत्यक्षत: या परोक्षत: किसी भी रूप में या रीति में कोर्इ प्रतिफल या फायदा प्राप्त नहीं करते हों ;
(घ) सीमित दायित्व वाली भागीदारी में कंपनी के शेयरधारकों के लाभ में हिस्सा बंटाने के अनुपात का योग संपरिवर्तन की तारीख से पांच वर्ष की अवधि के दौरान किसी भी समय पचास प्रतिशत से कम नहीं होगा ;
(ड़) उस पूर्ववर्ष के, जिसमें संपरिवर्तन होता है, पूर्ववर्ती तीन पूर्ववर्षों में से किसी में कंपनी के कारबार का कुल विक्रय, आवर्त या सकल प्राप्तियां साठ लाख रुपए से अधिक नहीं हों ; और
(च) संपरिवर्तन की तारीख को, कंपनी के खातों में विद्यमान संचित लाभ के अतिशेष में से किसी भागीदार को संपरिवर्तन की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के लिए कोर्इ रकम, प्रत्यक्षत: या परोक्षत: संदत्त नहीं की गर्इ हो।
स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "प्राइवेट कंपनी" और "असूचीबद्ध पब्लिक कंपनी" पदों के वही अर्थ होंगे, जो सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2008 (2009 का 6) में क्रमश: उनके हैं ;]
(xiv) जहां एकमात्र स्वत्वधारी समुत्थान के कारबार का उत्तराधिकार कोर्इ कंपनी ले लेती है जिसके फलस्वरूप एकमात्र स्वत्वधारी समुत्थान कोर्इ पूंजी आस्ति या अमूर्त आस्ति कंपनी को बेच देता है या अन्यथा अंतरित कर देता है :
परन्तु–
(क) उत्तराधिकार से ठीक पूर्व कारबार संबंधी एकमात्र स्वत्वधारी समुत्थान की सब आस्तियां और दायित्व कंपनी की आस्तियां और दायित्व हो जाते हैं;
(ख) कंपनी में एकमात्र स्वत्वधारी की शेयरधारिता कंपनी में कुल मतदान शक्ति के 50 प्रतिशत से कम नहीं है और उसकी शेयरधारिता उत्तरवर्तन की तारीख से लगातार 5 वर्ष तक इस रूप में बनी रहती है; और
(ग) एकमात्र स्वत्वधारी कंपनी में शेयरों के आबंटन से भिन्न किसी भी रूप या रीति में प्रत्यक्षत: या परोक्षत: कोर्इ प्रतिफल या फायदा प्राप्त नहीं करता है;
(xv) किसी करार या समझौते के अधीन किन्हीं प्रतिभूतियों के देने की स्कीम में कोर्इ अंतरण, जो निर्धारिती ने ऐसी प्रतिभूतियों के उधारकर्ता के साथ किया है और जो इस बारे में, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) की धारा 3 के अधीन स्थापित भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड 41[या भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित भारतीय रिजर्व बैंक] द्वारा जारी किए गए मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अधीन है;]
41क[(xvi) केंद्रीय सरकार द्वारा बनार्इ गर्इ और अधिसूचित किसी स्कीम के अधीन प्रतिवर्ती बंधक के किसी संव्यवहार में किसी पूंजी आस्ति का कोर्इ अंतरण।]
6 सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
7 ''पूंजी आस्तियों का कोर्इ वितरण'' पद के अर्थ के लिए, देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
8 वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से खंड (ii) का लोप किया गया।
9 ''दान के अधीन'' पद के अर्थ के लिए, देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
10 वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से अंत:स्थापित।
11 वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2001 से ''कर्मचारी स्टाक विकल्प योजना या स्कीम'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
12 वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से अंत:स्थापित।
13 वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1988 से अंत:स्थापित।
14 वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से अंत:स्थापित।
15 ''समामेलन'' पद के अर्थ के लिए, देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
16 वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से अंत:स्थापित।
17 "समामेलन" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.
18 वित्त अधिनियम 2005 द्वारा 1.4.2005 से अंत:स्थापित।
19 बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 5(ग) और 45 के पाठ के लिए परिशिष्ट देखिए।
20 वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से खंड (viख), (viग) और (viघ) अंत:स्थापित किए गए।
21 वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2000 से ''कम से कम पचहत्तर प्रतिशत शेयरधारक'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
22 कम्पनी अधिनियम, 1956 की धारा 391 से 394 के पाठ के लिए, देखिए परिशिष्ट।
22क. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2008 से अंत:स्थापित।
22कक. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से "समामेलित कंपनी में" शब्दों के स्थान पर "समामेलित कंपनी में, उस दशा के सिवाय, जहां शेयरधारक स्वयं समामेलित कंपनी है" शब्द रखे जाएंगे।
23 वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से अंत:स्थापित।
24 वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से ''शेयर'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
25 वित्त अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1970 से अंत:स्थापित।
26 वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.4.1977 से अंत:स्थापित।
27 अधिसूचित लोक संस्था के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
28 वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
29 वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
29क. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.4.2008 से अंत:स्थापित।
30 वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से अंत:स्थापित।
31 वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1998 से भूतलक्षी प्रभाव से ''1997'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
32 रुग्ण औद्योगिक कम्पनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 की धारा 18 के पाठ के लिए, देखिए परिशिष्ट।
33 रुग्ण औद्योगिक कम्पनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 की धारा 17 के पाठ के लिए, देखिए परिशिष्ट।
34 रुग्ण औद्योगिक कम्पनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 की धारा 3(1)(छक) के पाठ के लिए, देखिए परिशिष्ट।
35 वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से खंड (xiii) से खंड (xv) अंत:स्थापित किए गए।
36 ''जहां किसी फर्म द्वारा'' शब्दों से आरम्भ और ''अन्यथा अंतरित करती है'' शब्दों से समाप्त होने वाले भाग के स्थान पर वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व कोट किया गया भाग इस प्रकार था :
''जहां किसी फर्म द्वारा किया जाने वाला कारबार किसी कम्पनी द्वारा उत्तरवर्ती के रूप में प्राप्त किया जाए जिसके फलस्वरूप फर्म कंपनी को पूंजीगत आस्ति या अमूर्त आस्ति बेचती है या अन्यथा अंतरित करती है।''
37 वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से अंत:स्थापित।
38 वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से अंत:स्थापित।
39 वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से अंत:स्थापित।
40 वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से अंत:स्थापित।
40क. वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा 1.4.2011 से अंत:स्थापित।
41 वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से अंत:स्थापित।
41क. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.4.2008 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

