स्थानांतरण के रूप में नहीं माना लेनदेन
अंतरण न समझे जाने वाले संव्यवहार
6947. धारा 45 में अंतर्विष्ट कोर्इ बात निम्नलिखित अन्तरणों को लागू नहीं होगी :--
(i) हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के पूर्ण या आंशिक विभाजन पर पूंजी आस्तियों का कोर्इ वितरण70;
[(ii) 71[* * *]
(iii) किसी दान72 या विल या अप्रतिसंहरणीय न्यास के अधीन पूंजी आस्ति का कोर्इ अंतरण;
वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से धारा 47 में खंड (iii) के पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक अन्त:स्थापित किया जाएगा :
परन्तु यह खंड कंपनी द्वारा अपने कर्मचारियों को "कर्मचारी स्टाक विकल्प योजना या स्कीम" के अधीन अपने कर्मचारियों को प्रत्यक्षत: या परोक्षत: आवंटित शेयरों, डिबेंचरों या वारन्टों के रूप में पूंजीगत आस्ति के दान या अप्रतिसंहरणीय न्यास के अधीन अंतरण को लागू नहीं होगा;
(iv) यदि कंपनी द्वारा अपनी समनुषंगी कंपनी को पूंजी आस्ति का कोर्इ अंतरण, यदि--
(क) मूल कंपनी या उसके नामनिर्देशिती समनुषंगी कंपनी की सम्पूर्ण शेयर पूंजी धारण करते हैं, और
(ख) समनुषंगी कंपनी भारतीय कंपनी है;
73-74[(v) किसी समनुषंगी कंपनी द्वारा नियंत्री कंपनी को पूंजी आस्ति का कोर्इ अंतरण, यदि,--
(क) समनुषंगी कंपनी की संपूर्ण शेयर पूंजी नियंत्री कंपनी द्वारा धारित है, और
(ख) नियंत्री कंपनी भारतीय कंपनी है :]
75[परन्तु खंड (iv) या खंड (v) की कोर्इ बात, 29 फरवरी, 1988 के पश्चात् व्यापार स्टाक के रूप में किसी पूंजी आस्ति के अंतरण को लागू नहीं होगी;]
76[(vi) समामेलन77 की किसी स्कीम में समामेलक कंपनी द्वारा समामेलित कंपनी की पूंजी आस्ति का कोर्इ अंतरण, यदि समामेलित कंपनी भारतीय कंपनी है;]
78[(viक) समामेलन की किसी स्कीम में, समामेलन विदेशी कंपनी द्वारा समामेलित विदेशी कंपनी को ऐसा पूंजी आस्ति का, जो किसी भारतीय कंपनी में धारित कोर्इ शेयर है या शेयर हैं, कोर्इ अंतरण, यदि--
(क) समामेलक विदेशी कंपनी के शेयरधारकों में से कम से कम पच्चीस प्रतिशत शेयरधारक समामेलित विदेशी कंपनी के शेयरधारक बने रहते हैं, और
(ख) ऐसे अंतरण उस देश में जिसमें समामेलक कंपनी निगमित है, पूंजी अभिलाभों पर कोर्इ कर आकृष्ट नहीं करता है;]
79[(viख) किसी अविलयन में अविलयित कंपनी द्वारा पारिणामी कंपनी को, यदि पारिणामी कंपनी भारतीय कंपनी है, पूंजी आस्ति का कोर्इ अंतरण;
(viग) किसी अविलयन में अविलयित विदेशी कंपनी द्वारा पारिणामी विदेशी कंपनी को ऐसी किसी पूंजी का, जो किसी भारतीय कंपनी में धृत शेयर है या हैं, कोर्इ अंतरण, यदि;
(क) अविलयित विदेशी कंपनी के 80[कम से कम तीन-चौथार्इ शेयरों के मूल्य के शेयरधारक] पारिणामी विदेशी कंपनी के शेयरधारक बने रहते हैं; और
(ख) ऐसा अंतरण उस देश में, जिसमें अविलयित विदेशी कंपनी निगमित है, पूंजी अभिलाभों पर कोर्इ कर आकृष्ट नहीं करता है:
परन्तु कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 391 से धारा 39481 के उपबंध इस खंड में निर्दिष्ट अविलयनों की दशा में लागू नहीं होंगे;
(viघ) किसी अविलयन की स्कीम में पारिणामी कंपनी द्वारा अविलयित कंपनी के शेयरधारकों को शेयरों का कोर्इ अंतरण या पुरोधरण यदि ऐसा अंतरण या पुरोधरण उपक्रम के अविलयन के प्रतिफल स्वरूप किया गया है;]
(vii) समामेलन की स्कीम में शेयरधारक द्वारा ऐसी पूंजी आस्ति का, जो समामेलक कंपनी में उसके द्वारा धारित कोर्इ शेयर है या हैं, कोर्इ अंतरण, यदि--
(क) वह अंतरण समामेलित कंपनी में किसी शेयर या किन्हीं शेयरों के उसको आबंटन के प्रति फलस्वरूप किया गया है, और
(ख) समामेलित कंपनी भारतीय कंपनी है;]
82[(viiक) किसी अनिवासी द्वारा किसी अन्य अनिवासी को भारत के बाहर ऐसी पूंजी आस्ति का जो धारा 115कग की उपधारा (1) में निर्दिष्ट बंधपत्र या शेयर हैं, कोर्इ अंतरण;]
83[(viii) भारत में किसी कृषि भूमि का 1970 के मार्च के प्रथम दिन के पूर्व किया गया कोर्इ अंतरण;]
84[(ix) किसी पूंजी आस्ति का जो कोर्इ कलाकृति, पुरातत्वीय, वैज्ञानिक या कलासंग्रह, पुस्तक या पांडुलिपि, रेखाचित्र, रंगचित्र, फोटोचित्र या प्रिंट है, सरकार या किसी विश्वविद्यालय या राष्ट्रीय संग्रहालय, राष्ट्रीय कला दीर्घा, राष्ट्रीय अभिलेखागार या किसी ऐसे अन्य सार्वजनिक संग्रहालय या संस्था को अंतरण जिसे केंद्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में राष्ट्रीय महत्त्व का या किसी राज्य या सभी भागों में विख्यात के रूप में अधिसूचित85 किया जाए।]
स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "विश्वविद्यालय" से किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित या निगमित विश्वविद्यालय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 (1956 का 3) की धारा 3 के अधीन इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये विश्वविद्यालय के रूप में घोषित संस्था भी है;]
86[(x) किसी कंपनी के 87[बंधपत्रों या] डिबेंचरों, डिबेंचर स्टाक या किसी भी रूप के निक्षेप प्रमाणपत्र का संपरिवर्तन के रूप में उस कंपनी के शेयरों का डिबेंचर में कोर्इ अंतरण;]
88[(xi) किसी व्यक्ति द्वारा (जो कंपनी न हो) पूंजीगत आस्ति जो मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज की सदस्यता हो, 31 दिसम्बर, 89[1998] को या उससे पूर्व कंपनी को कंपनी द्वारा अंतरक को आबंटित शेयरों के बदले किया गया कोर्इ अंतरण।
स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज की सदस्यता पद से भारत में स्टाक एक्सचेंज की सदस्यता अभिप्रेत है जो प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) के उपबंधों के अधीन मान्यताप्राप्त है;
(xii) रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 (1986 का 1) की धारा 1890 के अधीन निर्मित और मंजूर की गर्इ स्कीम के अधीन किया गया पूंजीगत आस्ति का जो रुग्ण औद्योगिक कंपनी की भूमि हो, कोर्इ अंतरण, जहां ऐसी रुग्ण औद्योगिक कंपनी उसके कर्मकारों के सहयोग से प्रबंधित की जा रही है :
परन्तु ऐसा अंतरण उस पूर्ववर्ष से आरंभ होने वाली जिसमें उक्त कंपनी अधिनियम की धारा 1790 की उपधारा (1) के अधीन रुग्ण औद्योगिक कंपनी बन गर्इ है, और उस पूर्ववर्ष से समाप्त होने वाली अवधि के दौरान जिसमें ऐसी कंपनी का सम्पूर्ण शुद्ध मूल्य संचयी हानि के बराबर है या उससे अधिक है।
स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए "शुद्ध मूल्य" का वही अर्थ है जो रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 (1986 का 1) की धारा 3 की उपधारा (1) के खंड (छक) 91में है;]
92[(xiii) जहां किसी फर्म द्वारा किया जाने वाला कारबार किसी कम्पनी द्वारा उत्तरवर्ती के रूप में प्राप्त किया जाए जिसके फलस्वरूप फर्म कंपनी को पूंजीगत आस्ति या अमूर्त आस्ति बेचती है या अन्यथा अंतरित करती है :
परन्तु--
(क) उत्तराधिकार से ठीक पूर्व कारबार संबंधी फर्म की सब आस्तियां और दायित्व, कम्पनी की आस्तियां और दायित्व हो जाते हैं;
(ख) उत्तराधिकार से ठीक पूर्व फर्म के भागीदार कंपनी के शेयरधारक उसी अनुपात में बन जाते हैं जिसमें उनके पूंजी लेखा उत्तराधिकार की तारीख को फर्म की पुस्तकों में थे;
(ग) फर्म के भागीदार कंपनी में आबंटित शेयरों से भिन्न प्रत्यक्षत: या परोक्षत: किसी भी रूप या रीति में कोर्इ प्रतिफल या फायदा प्राप्त नहीं करते हैं; और
(घ) फर्म के भागीदारों के कंपनी में शेयरधारणों का योग कंपनी की कुल मतदान शक्ति के 50 प्रतिशत से कम न हो और उनका शेयरधारण उत्तराधिकार की तारीख से लगातार 5 वर्ष की अवधि तक बना रहे;
(xiv) जहां एकमात्र स्वत्वधारी समुत्थान के कारबार का उत्तराधिकार कोर्इ कंपनी ले लेती है जिसके फलस्वरूप एकमात्र स्वत्वधारी समुत्थान कोर्इ पूंजी आस्ति या अमूर्त आस्ति कंपनी को बेच देता है या अन्यथा अंतरित कर देता है :
परन्तु--
(क) उत्तराधिकार से ठीक पूर्व कारबार संबंधी एकमात्र स्वत्वधारी समुत्थान की सब आस्तियां और दायित्व कंपनी की आस्तियां और दायित्व हो जाते हैं;
(ख) कंपनी में एकमात्र स्वत्वधारी की शेयरधारिता कंपनी में कुल मतदान शक्ति के 50 प्रतिशत से कम नहीं है और उसकी शेयरधारिता उत्तराधिकार की तारीख से लगातार 5 वर्ष तक इस रूप में बनी रहती है; और
(ग) एकमात्र स्वत्वधारी कंपनी में शेयरों के आबंटन से भिन्न किसी भी रूप या रीति में प्रत्यक्षत: या परोक्षत: कोर्इ प्रतिफल या फायदा प्राप्त नहीं करता है;
(xv) किसी करार या समझौते के अधीन किन्हीं प्रतिभूतियों के देने की स्कीम में कोर्इ अंतरण, जो निर्धारिती ने ऐसी प्रतिभूतियों के उधारकर्ता के साथ किया है और जो इस बारे में, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) की धारा 3 के अधीन स्थापित भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा जारी किए गए मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अधीन है।]
69. सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
70. "पूंजी आस्तियों का कोर्इ वितरण" पद के अर्थ के लिए, देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
71. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से खंड (ii) का लोप किया गया।
72. "दान के अधीन" पद के अर्थ के लिए, देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
73-74. वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से अंत:स्थापित।
75. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1988 से अंत:स्थापित।
76. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से अंत:स्थापित।
77. "समामेलन" शब्द के अर्थ के लिए, देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
78. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से अंत:स्थापित।
79. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से खंड (viख), (viग) और (viघ) अंत:स्थापित किए गये।
80. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2000 से "शेयरधारकों के कम से कम पचहत्तर प्रतिशत" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
81. कम्पनी अधिनियम, 1956 की धारा 391 से 394 के पाठ के लिए, देखिए परिशिष्ट एक।
82. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से अंत:स्थापित।
83. वित्त अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1970 से अंत:स्थापित।
84. वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.4.1977 से अंत:स्थापित।
85. अधिसूचित लोक संस्था के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स, ऐक्ट।
86. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1962 से अंत:स्थापित।
87. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1962 से अंत:स्थापित।
88. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से अंत:स्थापित।
89. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1998 से "1997" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
90. रुग्ण उद्योग कम्पनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 की धारा 17 और 18 के पाठ के लिए, देखिए परिशिष्ट एक।
91. रुग्ण उद्योग कम्पनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 की धारा 3(1) (छक) के लिए, देखिए परिशिष्ट एक।
92. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से खंड (xiii) से खंड (xv) अंत:स्थापित किए गए।
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

