आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 44ग

समायोजन

धारा

धारा संख्या

44ग

अध्याय शीर्षक

V-क - शिपिंग के कुछ वर्गों के संबंध में विशेष प्रावधान

अधिनियम

भारतीय आयकर अधिनियम, 1922 (निरस्त)

वर्ष

समायोजन

समायोजन

44ग  समायोजन-  इस अध्याय की कोई बात किसी स्वामी को, [उस वर्ष] के पश्चात्वर्ती वर्ष में, जिसमें इस अध्याय के अधीन उसकी ओर से कोई संदाय किया गया है, यह दावा करने से निवारित नहीं की जाएगी कि पूर्व वर्ष में उसकी कुल आय का निर्धारण किया जाए और उसके आधार पर देय कर इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अनुसार अवधारित किया जाए और यदि वह ऐसा दावा करता है तो पूर्वोक्त किसी ऐसे संदाय को कर का अग्रिम संदाय माना जाएगा और इस प्रकार संदत्त की गई राशि तथा उसके द्वारा देय पाए गए कर की राशि के बीच का अंतर, यथास्थिति, उसके द्वारा संदत्त किया जाएगा या उसे वापस कर दिया जाएगा, जैसा की निर्धारित किया जा सकता है।

 

भारतीय आयकर (संशोधन) अधिनियम, 1939 की  धारा 50 द्वारा "किसी वर्ष में" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

 

 

[जैसा कि संशोधित किया गया है]

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