आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 44कच

खुदरा कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना के लिए विशेष उपबंध

धारा

धारा संख्या

44कच

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2020

खुदरा कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना के लिए विशेष उपबंध

खुदरा कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना के लिए विशेष उपबंध

खुदरा कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना के लिए विशेष उपबंध

44कच. (1) धारा 28 से 43ग में इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, किसी माल या वस्तु में खुदरा व्यापार करने वाले निर्धारिती की दशा में, ऐसे कारबार के लेखे पूर्ववर्ष में यथास्थिति, कुल आवर्त के पांच प्रतिशत के बराबर राशि, या आय-कर विवरणी में निर्धारिती द्वारा घोषित पूर्वोक्त राशि से अधिक राशि ऐसे कारबार के लाभ और अभिलाभ समझी जाएगी जो ''कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन कराधेय होगी :

परन्तु इस उपधारा में की कोर्इ बात ऐसे निर्धारिती के संबंध में लागू नहीं होगी जिसकी कुल आवर्त पूर्ववर्ष में चालीस लाख रुपए की राशि से अधिक है।

(2) धाराएं 30 से 38 के उपबंधों के अधीन अनुज्ञेय कोर्इ कटौती के बारे में, उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, यह समझा जाएगा कि उसे पहले ही पूर्ण प्रभाव दे दिया गया है और इन धाराओं के अधीन और कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी:

परन्तु जहां निर्धारिती फर्म है वहां उसके भागीदारों का संदत्त वेतन और ब्याज की, धारा 40 के खंड () में विनिर्दिष्ट शर्तों और सीमाओं के अधीन रहते हुए, उपधारा (1) के अधीन संगणित आय में से कटौती की जाएगी।

(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट कारबार के प्रयोजन के लिए प्रयुक्त किसी आस्ति का अवलिखित मूल्य ऐसे परिकलित किया गया समझा जाएगा मानो निर्धारिती ने प्रत्येक सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए अवक्षयण की बाबत कटौती का दावा किया था और वह वस्तुत: अनुज्ञात की गर्इ थी।

(4) धारा 44कक और 44कख के उपबंध वहां तक लागू नहीं होंगे जहां तक वे उपधारा (1) में निर्दिष्ट कारबार से संबंधित है, और इन धाराओं के अधीन धनीय सीमाओं की संगणना में यथास्थिति कुल आवर्त या उक्त कारबार से आय अपवर्जित कर दी जाएगी।

(5) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, निर्धारिती उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट लाभ और अभिलाभ से कम लाभ और अभिलाभ का दावा कर सकेगा, यदि वह धारा 44कक की उपधारा (2) के अधीन अपेक्षित ऐसी लेखा पुस्तकें और अन्य दस्तावेजें रखता है और धारा 44कख के अधीन अपेक्षित अपने लेखाओं की संपरीक्षा करवाता है और ऐसी संपरीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।

(6) इस धारा की कोर्इ बात 1 अप्रैल, 2011 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू नहीं होगी।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा संशोधित रूप में]

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