आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 44कख

वृत्ति या कारबार चलाने वाले कुछ व्यक्तियों के लेखाओं की संपरीक्षा

धारा

धारा संख्या

44कख

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2024 (सं.1)

वृत्ति या कारबार चलाने वाले कुछ व्यक्तियों के लेखाओं की संपरीक्षा

वृत्ति या कारबार चलाने वाले कुछ व्यक्तियों के लेखाओं की संपरीक्षा

वृत्ति या कारबार चलाने वाले कुछ व्यक्तियों के लेखाओं की संपरीक्षा

44कख. प्रत्येक व्यक्ति जो,–

() कोई कारबार चलाता है, यदि ऐसे कारबार में उसकी, यथास्थिति, कुल बिक्री, आवर्त या सकल प्राप्तियां किसी पूर्ववर्ष में एक करोड़ रुपए से अधिक हों; 53क[***]

53ख[परंतु किसी व्यक्ति की दशा में, जिसका,—

(क) प्राप्त सभी रकमों का योग, जिसके अंतर्गत पूर्ववर्षों के दौरान विक्रय के लिए प्राप्त रकम, आवर्त या सकल प्राप्तियां, उक्त रकम के पांच प्रतिशत से अनधिक है; और

(ख) किए गए सभी संदायों का योग, जिसके अंतर्गत पूर्ववर्ष के दौरान नकद में उपगत व्यय की रकम भी है, उक्त संदाय के पांच प्रतशत से अनधिक है,

यह खंड ऐसे प्रभावी होगा, मानो, “एक करोड़ रुपए“ शब्दों के स्थान पर, 53यय[दस करोड़ रुपए] शब्द रख दिए गए थे; या,;]

53खग[परंतु यह और कि इस खंड के प्रयोजनों के लिए, किसी बैंक के नाम लिखे गए चैक द्वारा या बैंक ड्राफ्ट द्वारा, जो पाने वाले के खाते में देय नहीं है, यथास्थिति, संदाय या प्राप्ति को, नकद रूप में, यथास्थिति, संदाय या प्राप्ति समझा जाएगा।]

() कोई वृत्ति करता है, यदि ऐसी वृत्ति में उसकी सकल प्राप्तियां किसी पूर्ववर्ष में पचास लाख रुपएसे अधिक है; या

() कारबार चलाता है, यदि कारबार के लाभ और अभिलाभ, यथास्थिति, धारा 44कड़ या धारा 44खख या धारा 44खखख के अधीन ऐसे व्यक्ति के लाभ और अभिलाभ समझे जाते हैं, और उसने अपनी आय पूर्ववर्ष, में अपने कारबार के लाभ और अभिलाभ समझे जाने वाले लाभ और अभिलाभ से कम होने का दावा किया है, या

() कोई वृत्ति चलाता है यदि ऐसे वृत्ति के लाभ और अभिलाभ धारा 44कघक के अधीन ऐसे व्यक्ति के लाभ और अभिलाभ समझे जाते हैं और उसने ऐसी आय को, अपने वृत्ति के लाभ और अभिलाभ समझे जाने वाले लाभों और अभिलाभों से कम होने का दावा किया है और उसकी आय उस अधिकतम रकम से अधिक हो जाती है जो किसी पूर्ववर्ष के दौरान आय-कर से प्रभार्य नहीं है, या

() कारबार करना यदि उसके मामले में धारा 44कघ की उपधारा (4) के उपबंध लागू होते हैं और उसकी आय उस अधिकतम रकम से अधिक हो जाती है जो किसी पूर्ववर्ष में आय-कर से प्रभार्य नहीं है।

वह ऐसे पूर्ववर्ष के अपने लेखाओं को विनिर्दिष्ट तारीख से पहले लेखापाल से संपरीक्षित करवायेगा और उस तारीख को ऐसे विहित फार्म में ऐसे लेखापाल द्वारा सम्यक्त: हस्ताक्षरित और सत्यापित संपरीक्षा रिपोर्ट देगा जिसमें ऐसी विशिष्टियां दी गई हों जो विहित की जाएं :

54[परंतु यह धारा उस व्यक्ति को लागू नहीं होगी, जो धारा 44कघ की उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार पूर्ववर्ष के लिए लाभों और अभिलाभों की घोषणा करता है और कारबार में उसकी, यथास्थिति, कुल विक्रय, आवर्त या सकल प्राप्तियां दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं हैं :]

वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा 1.4.2024 से धारा 44क ख में पहले पंरतुक के स्थान पर निम्नलिखित पंरतुक प्रतिस्थापित किया जाएगा

परंतु यह धारा ऐसे व्यक्ति को लागू नहीं होगी, जो धारा 44कघ की उपधारा (1) या धारा 44कघक की उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार पूर्ववर्ष के लिए लाभों और अभिलाभों की घोषणा करता है :

परन्तु यह और कि यह धारा उस व्यक्ति को लागू नहीं होगी जिसे धारा 44ख या धारा 44खखक में निर्दिष्ट प्रकृति की आय, यथास्थिति, 1 अप्रैल, 1985 से ही या उस तारीख से ही जिसको सुसंगत धारा प्रवृत्त हुई हो, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, प्राप्त होती है :

परन्तु 55[यह भी] कि उस दशा में जहां ऐसे व्यक्ति ने किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन अपनी लेखाओं की संपरीक्षा कराने की अपेक्षा है वहां, यदि ऐसा व्यक्ति विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व ऐसी विधि के अधीन ऐसे कारबार या वृत्ति के लेखाओं की संपरीक्षा करा लेता है और उस तारीख को ऐसी संपरीक्षा की ऐसी अन्य विधि के अधीन अपेक्षित रिपोर्ट तथा इस धारा के अधीन विहित फार्म में लेखापाल एक और रिपोर्ट देता है तो, यह धारा के उपबंधों का पर्याप्त अनुपालन होगा।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

(i) ''लेखापाल'' का वही अर्थ है जो धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे दिए गए स्पष्टीकरण में है;

(ii) किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के निर्धारिती के लेखाओं के संबंध में, "विनिर्दिष्ट तारीख" से धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी प्रस्तुत करने की नियत तारीख 55क[से एक मास पहले की तारीख] अभिप्रेत है।

 

53खग. वित अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से अंतस्थापित।

53यय. वित अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से "पांच करोड़ रूपए" शब्दो के स्थान पर प्रतिस्थापित।

53क. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2020 से "या" शब्द का लोप किया गया

53ख. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2020 से अंत:स्थापित।

54. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से अंत:स्थापित।

55. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''यह और'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

55क. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2020 से अंत:स्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

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