वृत्ति या कारबार चलाने वाले कुछ व्यक्तियों के लेखाओं की संपरीक्षा
93[वृत्ति या कारबार चलाने वाले कुछ व्यक्तियों के लेखाओं की संपरीक्षा
9444कख. 95प्रत्येक व्यक्ति जो,–
(क) कोर्इ कारबार चलाता है, यदि ऐसे कारबार में उसकी, यथास्थिति, कुल बिक्री, आवर्त या सकल प्राप्तियां किसी पूर्ववर्ष में 96[* * *] चालीस लाख रुपए से अधिक हों; या
(ख) कोर्इ वृत्ति करता है, यदि ऐसी वृत्ति में उसकी सकल प्राप्तियां किसी पूर्ववर्ष में दस लाख रुपए से 97[अधिक है; या
(ग) कारबार चलाता है, यदि कारबार के लाभ और अभिलाभ, यथास्थिति, धारा 44कघ या धारा 44कड़ या धारा 44कच के अधीन ऐसे व्यक्ति के लाभ और अभिलाभ समझे जाते हैं, और उसने अपनी आय पूर्ववर्ष 98[* * *], में अपने कारबार के लाभ और अभिलाभ समझे जाने वाले लाभ और अभिलाभ से कम होने का दावा किया है,]
वह अपने पूर्ववर्ष 99[* * *] के लेखाओं को विनिर्दिष्ट तारीख से पहले लेखापाल से संपरीक्षित करवायेगा और उस तारीख 1[को] ऐसे विहित प्ररूप में ऐसे लेखापाल द्वारा सम्यक्त: हस्ताक्षरित और सत्यापित संपरीक्षा रिपोर्ट 1[देगा] जिसमें ऐसी विशिष्टियां दी गर्इ हों जो विहित की जाएं :
2[परन्तु यह धारा उस व्यक्ति को लागू नहीं होगी जिसे 3[* * *] धारा 44ख या धारा 44खख या धारा 44खखक या धारा 44खखख में निर्दिष्ट प्रकृति की आय, यथास्थिति, 1 अप्रैल, 1985 से ही या उस तारीख से ही जिसको सुसंगत धारा प्रवृत्त हुर्इ हो, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, प्राप्त होती है :
परन्तु यह और कि] उस दशा में जहां ऐसे व्यक्ति ने किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन अपनी लेखाओं की 4[* * *] संपरीक्षा कराने की अपेक्षा है वहां, यदि ऐसा व्यक्ति विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व ऐसी विधि के अधीन ऐसे कारबार या वृत्ति के लेखाओं की संपरीक्षा करा लेता है और उस तारीख 5[को] ऐसी संपरीक्षा की ऐसी अन्य विधि के अधीन अपेक्षित रिपोर्ट तथा इस धारा के अधीन विहित प्ररूप में 6[लेखापाल] एक और रिपोर्ट 5[देता] है तो, यह धारा के उपबंधों का पर्याप्त अनुपालन होगा।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(i) "लेखापाल" का वही अर्थ है जो धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे दिए गए स्पष्टीकरण में है;
7[(ii) किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के निर्धारिती के लेखाओं के संबंध में, "विनिर्दिष्ट तारीख" से अभिप्रेत निर्धारण वर्ष का अक्तूबर का इकतीसवां दिन।]]
93. वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से अंत:स्थापित।
94. देखिए परिपत्र सं. 452, तारीख 17.3.1986 और परिपत्र सं. 561, तारीख 22.5.1990। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
95. देखिए नियम 6छ। विहित आडिट रिपोर्ट निम्न प्रकार है --
(i) उस व्यक्ति की दशा में संपरीक्षा रिपोर्ट जो कारबार या वृत्ति चलाता है और जिससे अपेक्षित है कि वह अपने लेखाओं की किसी अन्य विधि के अधीन संपरीक्षा कराये: प्ररूप 3गक;
(ii) उस व्यक्ति की दशा में संपरीक्षा रिपोर्ट जो कारबार या वृत्ति चलाता है और जो जिससे यह अपेक्षित नहीं है कि वह अपने लेखाओं की किसी अन्य विधि के अधीन संपरीक्षा कराये : प्ररूप 3गख;
(iii) उपरोक्त (i) और (ii) की दशा में विहित विवरण : प्ररूप 3गघ।
96. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से "या 1 अप्रैल, 1985 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्षों में" शब्दों का लोप किया गया।
97. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से "अधिक है," के स्थान पर प्रतिस्थापित।
98. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से "या 1 अप्रैल, 1985 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्षों में" शब्दों का लोप किया गया।
99. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से "या पूर्ववर्षों" शब्दों का लोप किया गया।
1. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से 'से पूर्व करता' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
2. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1985 से 'परन्तु यह कि' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
3. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से "धारा 44कग या" शब्दों का लोप किया गया।
4. वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.7.1985 से "लेखापाल द्वारा" शब्दों का लोप किया गया।
5. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से 'से पूर्व करता' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
6. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2001 से अंत:स्थापित।
7. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2001 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पहले, वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से यथा प्रतिस्थापित तथा बाद में वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1994 से यथासंशोधित खंड (ii) इस प्रकार था :
'(ii) "विनिर्दिष्ट तारीख" से किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लेखाओं के संबंध में,–
(क) जहां निर्धारिती कोर्इ कंपनी है, निर्धारण वर्ष का नवम्बर का तीसवां दिन अभिप्रेत है;
(ख) किसी अन्य स्थिति में, निर्धारण वर्ष का अक्तूबर का इकतीसवां दिन अभिप्रेत है।"
[वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा संशोधित रूप में]

