अनियत नौवहन पर कर देयता
[अध्याय V-क
नौवहन की विशेष श्रेणियों के संदर्भ में विशेष प्रावधान
44क। अनियत नौवहन पर कर देयता--इस अध्याय के प्रावधान, इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों में किसी बात के होते हुए भी, कर के उद्ग्रहण और वसूली के प्रयोजन के लिए ऐसे किसी व्यक्ति की दशा में लागू होंगे जो [कर योग्य प्रदेशों] से बाहर निवास करता है और किसी वर्ष में [कर योग्य प्रदेशों] में किसी जहाज के स्वामी या किराये पर लेने वाले के रूप में कारबार करता है (ऐसे व्यक्ति को इस अध्याय में इसके पश्चात् प्रधान कहा गया है), जब तक कि आयकर अधिकारी का यह समाधान न हो जाए कि ऐसे प्रधान का कोई अभिकर्ता है जिससे इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन आगामी वर्ष में कर वसूल किया जा सकेगा।
भारतीय आयकर भारतीय आयकर (अतिरिक्त संशोधन) अधिनियम, 1923 की धारा 3 द्वारा अंतःस्थापित।
विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा "ब्रिटिश भारत" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[जैसा कि संशोधित किया गया है]

