आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 44क

व्यापारिक, वृत्तिक या समरूप संगम की दशा में कटौती के लिए विशेष उपबंध

धारा

धारा संख्या

44क

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2015

व्यापारिक, वृत्तिक या समरूप संगम की दशा में कटौती के लिए विशेष उपबंध

व्यापारिक, वृत्तिक या समरूप संगम की दशा में कटौती के लिए विशेष उपबंध

1[व्यापारिक, वृत्तिक या समरूप संगम की दशा में कटौती के लिए विशेष उपबंध

244क. (1) इस अधिनियम में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, जहां किसी व्यापारिक, वृत्तिक या वैसा संगम3 द्वारा 4[(जो धारा 10 के खंड (23क) में उल्लिखित संगम या संस्था से भिन्न है)] अपने सदस्यों से किसी पूर्ववर्ष के दौरान चाहे चंदे के रूप में या अन्यथा प्राप्त रकम (जो ऐसा पारिश्रमिक नहीं है जिसे सदस्यों के लिए कोर्इ विशेष सेवा किए जाने के लिए प्राप्त किया गया हो) उस व्यय से (जो इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन आय की संगणना करते समय कटौती योग्य व्यय नहीं है और जो पूंजीगत व्यय प्रकार का नहीं है) कम पड़ जाती है जो ऐसे संगम द्वारा उस पूर्ववर्ष के दौरान अपने सदस्यों के सामान्य हितों के संरक्षण के या उन्हें अग्रसर करने के प्रयोजनों के लिए खर्च किया गया है वहां इस प्रकार कम पड़ी रकम (जिसे इसमें इसके पश्चात् ‘कमी’ कहा गया है) ‘‘कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ’’ शीर्ष के अधीन सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय उस संगम की आय की संगणना करने में इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए कटौती के रूप में अनुज्ञात की जाएगी और यदि उस शीर्ष के अधीन निर्धारणीय कोर्इ आय नहीं है या अनुज्ञेय कमी ऐसी आय से अधिक हो तो पूरी कमी या उसके अतिशेष को किसी अन्य शीर्ष के अधीन सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय उस संगम की आय की संगणना करते समय कटौती के रूप में अनुज्ञात किया जाएगा।

(2) उपधारा (1) के अधीन सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए संगम की आय की संगणना करने में इस अधिनियम के किसी ऐसे अन्य उपबंध को पहले प्रभावी किया जाएगा, जिसके अधीन इससे पहले के किसी निर्धारण वर्ष की बाबत कोर्इ मोक या हानि अग्रनीत की जाती है और सुसंगत निर्धारण वर्ष की आय के प्रति मुजरा की जाती है।

(3) इस धारा के अधीन कटौती की जाने वाली कमी की राशि इस धारा के अधीन कोर्इ मोक देने से पूर्व संगणित संगम की कुल आय के आधे से किसी भी दशा में अधिक नहीं होगी।

(4) यह धारा केवल उन व्यापारिक, वृत्तिक या वैसे संगम को लागू होती है जिसकी आय या उसका कोर्इ भाग उससे जुड़े किसी संगम या संस्था को अनुदान के रूप में वितरित करने के सिवाय उसके सदस्यों में वितरित नहीं किया जाता है।]

 

1.  वित्त अधिनियम, 1964 द्वारा 1.4.1964 से अंत:स्थापित।

2.  सुसंगत केस लॉज़ देखिए

3.  ‘‘वैसा संगम’’ पद के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए

4.  वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1964 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा संशोधित रूप में]

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