वैज्ञानिक अनुसंधान पर व्यय
वैज्ञानिक अनुसंधान पर व्यय
35. (1) वैज्ञानिक अनुसंधान पर व्यय की बाबत निम्नलिखित कटौतियां अनुज्ञात की जाएंगी—
(i) कोर्इ ऐसा व्यय (जो पूंजीगत व्यय के प्रकार का न हो) जो कारबार से सम्बद्ध वैज्ञानिक अनुसंधान पर उपगत या किया गया हो।
स्पष्टीकरण.–जहां ऐसा कोर्इ व्यय कारबार के प्रारंभ होने के पूर्व (जो 1 अप्रैल, 1973 से पहले उपगत या किया गया व्यय नहीं है) ऐसे वैज्ञानिक अनुसंधान में लगे हुए कर्मचारी को [धारा 40क की उपधारा (5) के नीचे दिए गए स्पष्टीकरण 2 में परिभाषित] किसी वेतन के संदाय में या ऐसे वैज्ञानिक अनुसंधान में उपयोग की जाने वाली सामग्री के क्रय पर उपगत या खर्च किया गया है, वहां उस कारबार के प्रारम्भ के ठीक पहले के तीन वर्ष के भीतर इस प्रकार उपगत या खर्च किया गया कुल व्यय, उस विस्तार तक जहां तक विहित प्राधिकारी उसे ऐसे वैज्ञानिक अनुसंधान पर उपगत या खर्च किया गया व्यय प्रमाणित करता हो, उस पूर्ववर्ष में उपगत या खर्च किया गया व्यय समझा जाएगा जिसमें कारबार प्रारम्भ होता है;
(ii) किसी ऐसे अनुसंधान संगम को, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान करना है या किसी विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था को वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए प्रयुक्त किए जाने के लिए संदत्त किसी राशि के एक सही एक बटा दो गुणा के बराबर राशि:
परन्तु यह तब जबकि ऐसा संगम विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था इस खंड के प्रयोजनों के लिए,–
(अ) उन मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार, उस रीति से और उन शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विहित की जाएं, तत्समय अनुमोदित है; और
(आ) ऐसा संगम विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उस रूप में विनिर्दिष्ट है;
परंतु यह और कि जहां ऐसे संगम, विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था को किसी रकम का संदाय, 1 अप्रैल, 2021 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में किया जाता है वहां इस खंड के अधीन कटौती इस प्रकार संदत्त रकम के बराबर होगी;
(iiक) किसी कंपनी द्वारा उसके द्वारा वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए प्रयोग किए जाने के लिए:
परंतु यह तब जबकि,–
(अ) ऐसी कंपनी भारत में रजिस्ट्रीकृत हो,
(आ) ऐसी कंपनी का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास करने का हो,
(इ) ऐसी कंपनी इस खंड के प्रयोजनों के लिए विहित प्राधिकारी द्वारा विहित रीति में तत्समय अनुमोदित हो, और
(र्इ) ऐसी कंपनी ऐसी अन्य शर्तों को पूरा करती हो जो विहित की जाएं ;
(iii) सामाजिक विज्ञान में अनुसंधान या सांख्यिकीय अनुसंधान के लिए प्रयोग किए जाने के लिए किसी ऐसे अनुसंधान संगम, जिसका उद्देश्य सामाजिक विज्ञान में अनुसंधान या सांख्यिकी अनुसंधान करना है, या किसी विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था को;
परन्तु यह तब जबकि ऐसा संगम विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था इस खंड के प्रयोजनों के लिए–
(अ) उन मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार, उस रीति से और उन शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विहित की जाएं, तत्समय अनुमोदित है; और
(आ) ऐसा संगम विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उस रूप में विनिर्दिष्ट है।
स्पष्टीकरण–ऐसी किसी कटौती के, जिसका कि निर्धारिती किसी अनुसंधान संगम, विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था को, जिसको खंड (ii) या खंड (iii) लागू होता है, संदत्त किसी धनराशि की बाबत हकदार है, मात्र इस आधार पर इंकार नहीं किया जाएगा कि निर्धारिती द्वारा ऐसी धनराशि का संदाय करने के पश्चात् खंड (ii) या खंड (iii) में निर्दिष्ट संगम, विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था को दिया जाना अनुमोदन वापस ले लिया गया है;
(iv) निर्धारिती द्वारा चलाए जा रहे कारबार से संबंधित वैज्ञानिक अनुसंधान पर पूंजीगत प्रकार के किसी व्यय की बाबत ऐसी कटौती जो उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन अनुज्ञेय हो :
परन्तु यह कि खंड (ii)या खंड (iii) में निर्दिष्ट अनुसंधान संगम, विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था, यथास्थिति, खंड (ii) या खंड (iii)के अधीन अनुदान के अनुमोदन या उसे जारी रखे जाने के प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार को विहित फार्म में और रीति से आवेदन करेगा :
परन्तु यह और भी कि केन्द्रीय सरकार खंड (ii) या खंड (iii) के अधीन अनुमोदन करने से पूर्व अनुसंधान संगम, विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था के क्रियाकलापों की असलियत के बारे में अपना समाधान करने के लिए यदि वह आवश्यक समझे, अनुसंधान संगम, विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था से ऐसे दस्तावेज (जिसमें संपरीक्षित वार्षिक लेखा भी है) या जानकारी मंगा सकेगी और वह सरकार ऐसी जांच भी कर सकेगी जो वह इस निमित्त आवश्यक समझे :
परन्तु यह भी कि खंड (ii) या खंड (iii) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा उस तारीख से पूर्व, जिसको कराधान विधि (संशोधन) विधेयक, 2006 को राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त होती है निकाली गर्इ कोर्इ भी अधिसूचना किसी समय ऐसे निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए, जो तीन निर्धारण वर्षों से अधिक नहीं होंगे (जिसके अंतर्गत अधिसूचना निकालने की तारीख से पूर्व प्रारंभ होने वाला या वाले निर्धारण वर्ष भी हैं) प्रभावी होगी, जो अधिसूचना में विहित किए जाएं:
परंतु यह भी कि जहां कोर्इ आवेदन कराधान विधि (संशोधन) विधेयक, 2006 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने की तारीख को या उसके पश्चात् किया जाता है वहां खंड (ii) या खंड (iii) के अधीन प्रत्येक अधिसूचना या आवेदन को नामंजूर करने वाला कोर्इ आदेश उस मास के अंत से जिसमें ऐसा आवेदन केन्द्रीय सरकार को प्राप्त हुआ था, बारह मास की अवधि के भीतर, यथास्थिति, निकाली जाएगी या पारित किया जाएगा।
(2) उपधारा (1) के खण्ड (iv) के प्रयोजनों के लिए,—
(i) ऐसी दशा में, जहां ऐसा पूंजीगत व्यय 1 अप्रैल, 1967 के पूर्व उपगत किया जाता है, वहां किसी पूर्ववर्ष में उपगत पूंजीगत व्यय के 1/5 की कटौती उस पूर्ववर्ष के लिए की जाएगी और व्यय के अतिशेष की कटौती ठीक आगे के चार वर्ष पूर्व में से हर एक के लिए बराबर किस्तों में की जाएगी;
(iक) ऐसी दशा में, जहां ऐसा पूंजीगत व्यय 31 मार्च, 1967 के पश्चात् किया जाता है, वहां किसी पूर्ववर्ष में उपगत ऐसे सम्पूर्ण पूंजीगत व्यय की कटौती उस पूर्ववर्ष के लिए की जाएगी :
परन्तु किसी भूमि के, चाहे ऐसी भूमि, भूमि के रूप में या किसी संपत्ति के भागरूप अर्जित की गर्इ हो, अर्जन पर उपगत किसी व्यय की बाबत इस खण्ड के अधीन कोर्इ कटौती 29 फरवरी, 1984 के पश्चात् अनुज्ञेय नहीं होगी।
स्पष्टीकरण1.–जहां कोर्इ पूंजीगत व्यय कारबार के प्रारम्भ के पूर्व उपगत किया गया है, वहां कारबार के प्रारम्भ के ठीक पहले के तीन वर्षों के अंदर इस प्रकार उपगत व्यय का योग उस पूर्ववर्ष में उपगत किया गया समझा जाएगा जिसमें कारबार प्रारम्भ किया गया है।
स्पष्टीकरण 2.–इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए,—
(क) ''भूमि'' के अंतर्गत भूमि में कोर्इ हित भी है; और
(ख) किसी भूमि का अर्जन निर्धारिती द्वारा उस तारीख को किया गया समझा जाएगा जिसको ऐसी भूमि के उसको अंतरण की लिखत, रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16) के अधीन रजिस्टर हुर्इ या जहां उसने ऐसी भूमि का या उसके किसी भाग का कब्जा संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 (1882 का 4) की धारा 53क में निर्दिष्ट प्रकृति की संविदा के भागत: अनुपालन में लिया है या बनाए रखा है, वहां वह तारीख जिसको उसने ऐसी भूमि या भाग का कब्जा इस प्रकार लिया है या बनाए रखा है;
(ii) खण्ड (i)में की किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी ऐसी आस्ति का, जो 1 अप्रैल, 1967 के पूर्व उपगत पूंजीगत प्रकार के व्यय के रूप में है, कारबार से संबंधित वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए किसी पूर्ववर्ष में, उपयोग बंद हो जाता है और इस प्रकार बंद होने के समय आस्ति का मूल्य खण्ड (i) के अधीन पहले ही अनुज्ञात कटौतियों के योग सहित, उक्त व्यय से कम पड़ जाता है, वहां—
(क) उस पूर्ववर्ष के लिए उतनी रकम की कटौती अनुज्ञात की जाएगी जितनी ऐसी कमी के बराबर हो; और
(ख) उस खण्ड के अधीन उस पूर्ववर्ष के लिए या किसी पश्चात्वर्ती पूर्ववर्ष के लिए कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी;
(iii) यदि खण्ड (ii) में वर्णित आस्ति, अन्य प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाए गए बिना, उस वर्ष में, जिसमें उपयोग बंद होता है, बेची जाती है तो विक्रय की कीमत को ऐसे बंद होने के समय आस्ति का मूल्य माना जाएगा और यदि ऐसी आस्ति अन्य प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाए बिना, बंद होने के वर्ष से पश्चात्वर्ती किसी पूर्ववर्ष में बेची जाती है और विक्रय की कीमत उस आस्ति के ऐसे मूल्य से कम पड़ जाती है जिसे बंद होने के समय हिसाब में लिया गया था जो उस कमी के बराबर की रकम उस पूर्ववर्ष के लिए जिसमें विक्रय हुआ था कटौती के रूप में अनुज्ञात की जाएगी;
(iv) जहां किसी ऐसे व्यय की बाबत जो सम्पूर्णत: या भागत: आस्ति के रूप में है, इस धारा के अधीन उसी या किसी अन्य पूर्ववर्ष के लिए कटौती अनुज्ञात की जाती है, वहां धारा 32 की उपधारा (1) के खण्ड (ii) के अधीन कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी;
(v) जहां खण्ड (ii) में वर्णित आस्ति का ऐसे कारबार में उपयोग उस कारबार से संबंधित वैज्ञानिक अनुसंधान में उसका उपयोग बंद हो जाने के पश्चात् किया जाता है, वहां धारा 32 की उपधारा (1) के खण्ड (ii) के अधीन अवक्षयण अनुज्ञेय होगा।
(2क) जहां निर्धारिती उपधारा (1) के खण्ड (ii) में निर्दिष्ट किसी वैज्ञानिक अनुसंधान संगम या विश्वविद्यालय या महाविद्यालय या अन्य संस्था या किसी पब्लिक सेक्टर कम्पनी को ऐसे वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए जो भारत की सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विहित प्राधिकारी द्वारा इस निमित्त अनुमोदित कार्यक्रम के अधीन हाथ में लिया गया हो, प्रयुक्त किए जाने के लिए कोर्इ राशि 1 मार्च, 1984 के पूर्व संदत्त करता है, (जो ऐसी राशि है, जो इस विनिर्दिष्ट निदेश के साथ दी गर्इ है कि उस राशि का उपयोग किसी भूमि या भवन के अर्जन या किसी भवन के निर्माण के लिए नहीं किया जाएगा),—
(क) इस प्रकार संदत्त राशि के 11/3 गुणा के बराबर राशि कटौती के रूप में अनुज्ञात की जाएगी; और
(ख) उसी निर्धारण वर्ष या किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए उपधारा (1) के खण्ड (ii) के अधीन ऐसी राशि की बाबत कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए ''पब्लिक सेक्टर कम्पनी'' का वही अर्थ है जो धारा 32क की उपधारा (2ख) के नीचे स्पष्टीकरण के खण्ड (ख) में है।
(2कक) जहां निर्धारिती किसी राष्ट्रीय प्रयोगशाला या किसी विश्वविद्यालय या भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान या किसी विनिर्दिष्ट व्यक्ति को कोर्इ राशि इस विनिर्दिष्ट निदेश के साथ संदत्त करता है कि उक्त राशि का प्रयोग विहित प्राधिकारी द्वारा इस निमित्त अनुमोदित कार्यक्रम के अधीन हाथ में लिए गए वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए किया जाएगा, वहां–
(क) इस प्रकार संदत्त राशि के एक सही एक बटा दो गुणा के बराबर राशि कटौती के रूप में अनुज्ञात की जाएगी; और
(ख) ऐसी राशि की बाबत कोर्इ कटौती इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन अनुज्ञात नहीं की जाएगी :
परन्तु यह कि विहित प्राधिकारी, अनुमोदन करने के पूर्व, वैज्ञानिक अनुसंधान से संबंधित क्रियाकलापों की असलियत के बारे में अपना समाधान करेगा और प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक को अपनी रिपोर्ट ऐसे प्ररूप में जो विहित किया जाए देगा:
परंतु यह और कि जहां ऐसी राष्ट्रीय प्रयोगशाला, विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान या विनिर्दिष्ट व्यक्ति को किसी रकम का संदाय, 1 अप्रैल, 2021 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में किया जाता है, वहां इस उपधारा के अधीन कटौती इस प्रकार संदत्त रकम के बराबर होगी;
स्पष्टीकरण 1.–ऐसी कटौती से, जिसके लिए निर्धारिती किसी राष्ट्रीय प्रयोगशाला, विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान या किसी विनिर्दिष्ट व्यक्ति को इस उपधारा में निर्दिष्ट किसी कार्यक्रम के लिए संदत्त किसी राशि की बाबत हकदार है, मात्र इस आधार पर इनकार नहीं किया जाएगा कि निर्धारिती द्वारा ऐसी राशि का संदाय करने के पश्चात्–
(क) ऐसी प्रयोगशाला या विनिर्दिष्ट व्यक्ति को दिया गया अनुमोदन वापस ले लिया गया है; या
(ख) राष्ट्रीय प्रयोगशाला, विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान या विनिर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा शुरू किए गए ऐसे कार्यक्रम को दिया गया अनुमोदन वापस ले लिया गया है।
स्पष्टीकरण 2.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(क) ''राष्ट्रीय प्रयोगशाला'' से ऐसी वैज्ञानिक प्रयोगशाला अभिप्रेत है जो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद्, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद्, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन, इलैक्ट्रोनिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग या परमाणु ऊर्जा विभाग के तत्त्वावधान में राष्ट्रीय स्तर पर कार्य कर रही है और जो विहित प्राधिकारी द्वारा ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, राष्ट्रीय प्रयोगशाला के रूप में अनुमोदित हो;
(ख) ''विश्वविद्यालय'' का वही अर्थ है जो धारा 47 के खंड (ix) के स्पष्टीकरण में है;
(ग) ''भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान'' का वही अर्थ है जो प्रौद्योगिकी संस्थान अधिनियम, 1961 (1961 का 59) की धारा 3 के खंड (छ) में ''संस्थान'' का है।
(घ) ''विनिर्दिष्ट व्यक्ति'' से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो विहित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित किया जाए।
(2कख) (1) जहां जैव-प्रौद्योगिकी के कारबार में या किसी ऐसी वस्तु या चीज के, जो ग्यारहवीं अनुसूची की सूची में विनिर्दिष्ट वस्तु या चीज नहीं है, विनिर्माण या उत्पादन के किसी कारबार में लगी कंपनी वैज्ञानिक अनुसंधान पर (किसी भूमि या भवन की लागत की प्रकृति में व्यय से भिन्न) या इनहाउस अनुसंधान पर और विहित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित विकास सुविधा पर व्यय करेगी वहां इस प्रकार खर्च की राशि व्यय के एक सही एक बटा दो गुणा के बराबर राशि की कटौती की जाएगी।
परंतु जहां वैज्ञानिक अनुसंधान (जो किसी भूमि या भवन की लागत की प्रकृति का व्यय नहीं है) या आंतरिक अनुसंधान या विकास सुविधा पर कोर्इ व्यय 1 अप्रैल, 2021 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में उपगत किया जाता है, वहां इस खंड के अधीन कटौती इस प्रकार उपगत व्यय के बराबर होगी।
[स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, औषधि और भेषज के संबंध में ''वैज्ञानिक अनुसंधान पर व्यय'' के अंतर्गत क्लीनिक संबंधी औषधि परीक्षण, किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम के अधीन किसी विनियामक प्राधिकरण से अनुमोदन प्राप्त करने और पेटेन्ट अधिनियम, 1970 (1970 का 39) के अधीन किसी पेटेन्ट के लिए कोर्इ आवेदन फाइल करने में उपगत व्यय भी है।
(2) खंड (1)में वर्णित व्यय की बाबत कोर्इ कटौती इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
(3)कोर्इ भी कंपनी खंड (1) के अधीन कटौती के लिए हकदार नहीं होगी जब तक कि वह ऐसे अनुसंधान और विकास सुविधा में सहयोग के लिए विहित अधिकारी के साथ करार न करें और लेखाओं तथा उसकी संपरीक्षा रिपोर्टों को प्रस्तुत करने के संबंध में ऐसी शर्तों को ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, पूरा न करें।
(4) विहित प्राधिकारी उक्त सुविधा के अनुमोदन के संबंध में प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक को ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय के भीतर जो विहित किया जाए अपनी रिपोर्ट पेश करेगा।
(5) [***]
(6) उपधारा (1) के खंड (iiक) के उपखंड (इ) के अधीन अनुमोदित किसी कंपनी को खंड (1) में निर्दिष्ट ऐसे व्यय की बाबत, जो 31 मार्च, 2008 के पश्चात् किया जाए, कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
(2ख) (क) जहां निर्धारिती ने 1 मार्च, 1984 से पूर्व ऐसे वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए, जो भारत की सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विहित प्राधिकारी द्वारा इस निमित्त अनुमोदित कार्यक्रम के अधीन हाथ में लिया गया हो, कोर्इ व्यय (जो किसी भूमि या भवन या किसी भवन के निर्माण पर पूंजीगत व्यय की प्रकृति का नहीं है) उपगत किया है वहां इस उपधारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उस विहित प्राधिकारी द्वारा पूर्ववर्ष के दौरान उपगत व्यय के रूप में प्रमाणित व्यय की रकम के 1¼ के बराबर राशि कटौती के रूप में अनुज्ञात की जाएगी।
(ख) जहां किसी व्यय की बाबत खण्ड (क) के अधीन किसी पूर्ववर्ष के लिए कटौती अनुज्ञात की जाती है, वहां ऐसे व्यय की बाबत उसी पूर्ववर्ष के लिए या किसी अन्य पूर्ववर्ष के लिए उपधारा (1) के खण्ड (i)के अधीन या उपधारा (2) के खण्ड (iक) के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
(ग) जहां किसी ऐसे व्यय की बाबत, जो सम्पूर्णत: या भागत: आस्ति के रूप में है, इस उपधारा के अधीन किसी पूर्ववर्ष के लिए कटौती अनुज्ञात की जाती है, वहां उस आस्ति की बाबत उसी पूर्ववर्ष के लिए या किसी पश्चात्वर्ती पूर्ववर्ष के लिए धारा 32 की उपधारा (1)के खंड (ii) के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
(घ) इस उपधारा के अधीन वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए वास्तव में उपगत व्यय के आधिक्य में की गर्इ कटौती के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए गलत तौर पर की गर्इ है यदि निर्धारिती कार्यक्रम के पूरा होने के लिए विहित प्राधिकारी द्वारा अनुज्ञात अवधि के एक वर्ष के भीतर उस प्राधिकारी से उसके पूरा होने का प्रमाणपत्र नहीं देता है और धारा 155 की उपधारा (5ख) के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।
(3) यदि इस धारा के अधीन कोर्इ प्रश्न उठता है कि क्या कोर्इ क्रियाकलाप वैज्ञानिक अनुसंधान है या था और यदि है या था तो किस सीमा तक अथवा कोर्इ आस्ति, वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए उपयोग में लार्इ जा रही है या लार्इ जा रही थी, तो बोर्ड उस प्रश्न को–
(क) केंद्रीय सरकार को भेजेगा जब ऐसा प्रश्न उपधारा (1) के खंड(ii) और (iii) के अधीन किसी क्रियाकलाप के संबंध में है, और उसका विनिश्चय अंतिम होगा;
(ख) विहित प्राधिकारी को निर्दिष्ट करेगा जब ऐसा प्रश्न खंड (क) के क्रियाकलाप से भिन्न किसी क्रियाकलाप के संबंध में है, जिसका विनिश्चय अंतिम होगा।
(4) धारा 32 की उपधारा (2) के उपबंध, उपधारा(1) के खण्ड (iv) के अधीन अनुज्ञेय कटौतियों के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जिस प्रकार वे अवक्षयण के संबंध में अनुज्ञेय कटौतियों को लागू होते हैं।
(5) जहां समामेलन की किसी स्कीम में, समामेलन कम्पनी किसी ऐसी आस्ति को जो पूंजीगत या वैज्ञानिक अनुसंधान की प्रकृति की है, समामेलित कम्पनी को (जो एक भारतीय कम्पनी है) विक्रय या अन्यथा अन्तरण करती है, वहां,—
(i) समामेलन कम्पनी को उपधारा (2) के खण्ड (ii) या खण्ड (iii) के अधीन कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी; और
(ii) इस धारा के उपबंध समामेलित कंपनी को यावत्शक्य ऐसे लागू होंगे जैसे वे समामेलन कंपनी को लागू होते यदि पश्चात्कथित ने उस आस्ति का वैसा विक्रय या अन्तरण न किया होता।
[वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

