आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 34

अवक्षयण मोक और विकास रिबेट के लिए शर्तें

धारा

धारा संख्या

34

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2008

अवक्षयण मोक और विकास रिबेट के लिए शर्तें

अवक्षयण मोक और विकास रिबेट के लिए शर्तें

अवक्षयण मोक और विकास रिबेट के लिए शर्तें

34. (1) 1[* * *]

(2) 2[* * *]

(3) () धारा 33 में निर्दिष्ट कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक वस्तुत: अनुज्ञात किए जाने वाले विकास रिबेट के पचहत्तर प्रतिशत के बराबर रकम, 3[किसी पूर्ववर्ष के, जिसकी बाबत उस धारा की उपधारा (2) के अधीन कटौती अनुज्ञात की जानी है या किसी पूर्वतर पूर्ववर्ष के (जो उस वर्ष से पूर्वतर वर्ष नहीं है जिसमें पोत अर्जित किया गया था अथवा मशीनरी या संयंत्र लगाया गया था अथवा पोत, मशीनरी या संयंत्र पहली बार प्रयोग में लाया गया था)] लाभ और हानि लेखा में से डेबिट की जाती है और एक रिजर्व खाते में जमा नहीं की जाती जिसका ठीक आगे के आठ वर्षों की कालावधि के दौरान निर्धारिती द्वारा उपयोग करने से अन्यथा उस उपक्रम के कारबार के प्रयोजनों के लिए किया जाना है–

(i) लाभांश या लाभों के तौर पर वितरण के लिए; या

(ii) लाभों के रूप में भारत के बाहर प्रेषण के लिए या भारत के बाहर किसी आस्ति के सृजन के लिए :

परन्तु यह खण्ड वहां लागू नहीं होगा जहां निर्धारिती कोर्इ ऐसी कम्पनी है जो विद्युत (प्रदाय) अधिनियम, 1948 (1948 का 54)4 के अर्थ में अनुज्ञप्तिधारी (लाइसेंसी) है या जहां पोत का अर्जन या मशीनरी संयंत्र का अधिष्ठापन 1 जनवरी, 1958 के पूर्व किया गया है :

5[परन्तु यह और कि जहां पोत का अर्जन 28 फरवरी, 1966 के पश्चात् किया गया है, वहां यह खण्ड ऐसे पोत की बाबत इस प्रकार प्रभावी होगा मानो "पचहत्तर" शब्द के स्थान पर "पचास" शब्द रख दिया गया हो।]

स्पष्टीकरण.–[वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से लोप किया गया। इससे पूर्व यह वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित किया गया था।]

() यदि कोर्इ पोत, मशीनरी या संयंत्र उस पूर्ववर्ष की समाप्ति से, जिसमें यह अर्जित या प्रतिष्ठापित किया गया था, आठ वर्ष की समाप्ति से पूर्व किसी समय निर्धारिती द्वारा किसी व्यक्ति को बेचा या अन्तरित किया जाता है, तो उस पोत, मशीनरी या संयंत्र की बाबत धारा 33 के अधीन या भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) के तत्समान उपबंधों के अधीन दिए गए किसी मोक के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए गलत तौर से दिया गया है और धारा 155 की उपधारा (5) के उपबंध तदनुसार लागू होंगे :

परन्तु यह खंड वहां लागू नहीं होगा—

(i) जहां उस पोत का अर्जन या मशीनरी या संयंत्र का अधिष्ठापन 1 जनवरी, 1958 से पूर्व किया गया है; या

(ii) जहां निर्धारिती द्वारा वह पोत, मशीनरी या संयंत्र सरकार, किसी स्थानीय प्राधिकारी, किसी केंद्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा स्थापित किसी निगम को या कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में परिभाषित किसी 6सरकारी कम्पनी को बेचा या अन्यथा अन्तरित किया जाता है; या

(iii) जहां उस पोत, मशीनरी या संयंत्र का विक्रय या अन्तरण धारा 33 की उपधारा (3) या (4) में निर्दिष्ट समामेलन या उत्तरवर्तन के संबंध में किया जाता है।

 

1. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से लोप किया गया। मूल उपधारा (1), कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से संशोधित की गर्इ थी।

2. कराधान विधि (संशोधन एवं प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से लोप किया गया। मूल उपधारा (2), वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से, प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1975 से और वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.4.1981 से संशोधित की गर्इ थी।

3. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से "सुसंगत पूर्ववर्ष" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

4. "विद्युत (प्रदाय) अधिनियम, 1948 (1948 का 54) के अर्थ में अनुज्ञप्तिधारी (लाइसेंसी)" पद के अर्थ के लिए, देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

5. वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से अंत:स्थापित।

6. "सरकारी कम्पनी" की परिभाषा के लिए देखिए पूर्व पृष्ठ 1.26 पर पाद-टिप्पण 64.

 

 

[वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा संशोधित रूप में]

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