धारा 143 का संशोधन
धारा 143 का संशोधन
32. आय-कर अधिनियम की धारा 143 में, -
(क) उपधारा (1) के स्थान पर निम्नलिखित उपधाराएं रखी जाएंगी, अर्थात् :-
'(1) जहां धारा 139 के अधीन या धारा 142 की उपधारा (1) के अधीन किसी सूचना के उत्तर में कोई विवरणी दी गई है वहां ऐसी विवरणी पर कार्यवाही निम्नलिखित रीति में की जाएगी, अर्थात् :-
(क) कुल आय या हानि की संगणना निम्नलिखित समायोजन किए जाने के पश्चात् की जाएगी, अर्थात् :-
(i) विवरणी में कोई गणित संबंधी गलती ; या
(ii) कोई गलत दावा, यदि ऐसा गलत दावा विवरणी में की किसी सूचना से प्रकट होता है ; या
(ख) कर और ब्याज की, यदि कोई हो, संगणना खंड (क) के अधीन संगणित कुल आय के आधार पर की जाएगी ;
(ग) निर्धारिती द्वारा संदेय राशि या उसे देय प्रतिदाय की रकम का अवधारण खंड (ख) के अधीन संगणित कर और ब्याज, यदि कोई हो, का स्रोत पर काटे गए किसी कर, स्रोत पर संगृहीत किसी कर, संदत्त किसी अग्रिम कर, धारा 90 या धारा 90क के अधीन किसी करार के अंतर्गत अनुज्ञेय किसी राहत या धारा 91 के अधीन अनुज्ञेय किसी राहत, अध्याय 8 के भाग क के अधीन अनुज्ञेय किसी रिबेट, स्वतःनिर्धारण के आधार पर संदत्त किसी कर और कर अथवा ब्याज के रूप में अन्यथा संदत्त किसी रकम से समायोजन करने के पश्चात् किया जाएगा ;
(घ) एक संसूचना खंड (ग) के अधीन निर्धारिती द्वारा संदाय किए जाने के लिए अवधारित राशि या उसे देय प्रतिदाय की रकम विनिर्दिष्ट करते हुए तैयार की जाएगी या बनाई जाएगी और निर्धारिती को भेजी जाएगी ; और
(ङ) खंड (ग) के अधीन अवधारण के अनुसरण में निर्धारिती को देय प्रतिदाय की रकम निर्धारिती को अनुदत्त की जाएगी :
परंतु यह कि संसूचना निर्धारिती को ऐसे मामले में भी भेजी जाएगी जहां निर्धारिती द्वारा विवरणी में घोषित हानि समायोजित कर दी गई है किंतु उसके द्वारा कोई कर या ब्याज संदेय नहीं है या उसे कोई प्रतिदाय देय नहीं है :
परंतु यह और कि इस उपधारा के अधीन कोई संसूचना उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें विवरणी दी गई है, अंत से एक वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नहीं भेजी जाएगी ।
स्पष्टीकरण - इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) "विवरणी में की किसी सूचना से प्रकट गलत दावा" से विवरणी का, किसी प्रविष्टि के आधार पर, ऐसा दावा अभिप्रेत है, -
(i) जो किसी ऐसी मद के संबंध में है जो ऐसी विवरणी में की उसी मद या किसी अन्य मद की किसी अन्य प्रविष्टि से असंगत है ;
(ii) जिसकी बाबत ऐसी प्रविष्टि को सिद्ध करने के लिए दी जाने के लिए अपेक्षित सूचना इस अधिनियम के अधीन उस रूप में नहीं दी गई है ; या
(iii) जो किसी कटौती की बाबत है जहां ऐसी कटौती उस विनिर्दिष्ट कानूनी सीमा से अधिक हो जाती है जो धनराशि या प्रतिशत या अनुपात या उसके भाग के रूप में व्यक्त की जा सकती है;
(ख) विवरणी की अभिस्वीकृति उस दशा में संसूचना समझी जाएगी जहां खंड (ग) के अधीन निर्धारिती द्वारा कोई राशि संदेय नहीं है या उसे प्रतिदेय नहीं है और जहां खंड (क) के अधीन कोई समायोजन नहीं किया गया है ।
(1क) उपधारा (1) के अधीन विवरणियों पर कार्यवाही करने के प्रयोजनों के लिए, बोर्ड उक्त उपधारा के अधीन अपेक्षित रूप में निर्धारिती द्वारा संदेय कर या उसे देय प्रतिदाय का शीघ्रतापूर्वक अवधारण करने की दृष्टि से विवरणियों पर केन्द्रीकृत रूप में कार्यवाही करने के लिए स्कीम बना सकेगा ।
(1ख) जैसा अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1क) के अधीन बनाई गई स्कीम को प्रभावी रूप देने के प्रयोजन के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह निदेश दे सकेगी कि विवरणियों पर कार्यवाही किए जाने के संबंध में इस अधिनियम के कोई उपबंध लागू नहीं होंगे या ऐसे अपवादों, उपांतरणों और अनुकूलनों के साथ लागू होंगे जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं; बहरहाल, ऐसा कोई निदेश 31 मार्च, 2009 के पश्चात् जारी नहीं किया जाएगा ।
(1ग) उपधारा (1ख) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना, उपधारा (1क) के अधीन बनाई गई स्कीम के साथ, अधिसूचना के जारी किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखी जाएगी ।';
(ख) उपधारा (2) के खंड (ii) में परंतुक के स्थान पर निम्नलिखित परंतुक रखा जाएगा, अर्थात् :-
"परंतु यह कि खंड (ii) के अधीन निर्धारिती पर किसी सूचना की तामील उस वित्तीय वर्ष के अंत से जिसमें विवरणी पेश की जाती है, छह मास के अवसान के पश्चात् नहीं की जाएगी ।"।
[वित्त अधिनियम, 2008]

