कर के प्रभार के लिए विधायी उपबंध के लम्बित रहने तक अधिनियम का प्रभावी रहना
कर के प्रभार के लिए विधायी उपबंध के लम्बित रहने तक अधिनियम का प्रभावी रहना
294. यदि किसी निर्धारण वर्ष के लिए आय-कर 47[* * *] प्रभारित करने के लिए किसी केन्द्रीय अधिनियम द्वारा कोर्इ उपबंध उस निर्धारण वर्ष में अप्रैल के प्रथम दिन तक न किया गया हो तो भी यह अधिनियम, तब तक जब तक ऐसा उपबंध इस प्रकार नहीं कर दिया जाता है ऐसे प्रभाव रखेगा मानो पूर्ववर्ती निर्धारण वर्ष में प्रवृत्त उपबंध या ऐसे विधेयक में जो उस समय संसद् के समक्ष हो, प्रस्तावित उपबंधों में से, जो भी निर्धारिती के अधिक अनुकूल हैं, वे वस्तुत: प्रवृत्त थे।
47. वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से ‘या अधिकर’ शब्दों का लोप किया गया।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा संशोधित रूप में]

