आस्तियों, लेखाबहियों आदि के बारे में उपधारणा
37[आस्तियों, लेखाबहियों आदि के बारे में उपधारणा
292ग. 37क[(1)] जहां कोर्इ लेखाबहियां, अन्य दस्तावेज, धन, सोना-चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज, धारा 132 के अधीन किसी तलाशी 37ख[या धारा 133क के अधीन सर्वेक्षण] के दौरान किसी व्यक्ति के कब्जे में या नियंत्रण में पार्इ जाती हैं या जाती है, वहां इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही में यह उपधारणा की जा सकेगी कि,–
(i) ऐसी लेखाबहियां, अन्य दस्तावेज, धन, सोना-चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज ऐसे व्यक्ति की हैं या है;
(ii) ऐसी लेखाबहियों और अन्य दस्तावेजों की अन्तर्वस्तुएं सत्य हैं; और
(iii) हस्ताक्षर और ऐसी लेखाबहियों और अन्य दस्तावेजों का प्रत्येक अन्य भाग, जो तात्पर्यितत: किसी विशिष्ट व्यक्ति के हाथ का लिखा हुआ है या जिसके बारे में युक्तियुक्त रूप से यह माना जा सकता है कि वह किसी विशिष्ट व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित है या उसके हाथ का लिखा हुआ है, उसी व्यक्ति के हाथ के लिखे हुए हैं और किसी स्टांपित, निष्पादित या अनुप्रमाणित किसी दस्तावेज की दशा में यह माना जा सकेगा कि वह उस व्यक्ति द्वारा सम्यक् रूप से स्टांपित और निष्पादित या अनुप्रमाणित किया गया था जिसके द्वारा उसका इस प्रकार निष्पादित या अनुप्रमाणित किया जाना तात्पर्यित है।]
37ग[(2) जहां कोर्इ लेखा बहियां, अन्य दस्तावेज या आस्तियां धारा 132क के उपबंधों के अनुसार अध्यपेक्षा करने वाले अधिकारी को परिदत्त कर दी गर्इ हैं, वहां उपधारा (1) के उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो ऐसी लेखा बहियां, अन्य दस्तावेज या आस्तियां, जिन्हें धारा 132क की उपधारा (1) के, यथास्थिति, खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) में निर्दिष्ट व्यक्ति से अभिरक्षा में लिया गया था, धारा 132 के अधीन किसी तलाशी के दौरान उस व्यक्ति के कब्जे या नियंत्रण में पार्इ गर्इ थीं।]
37. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.10.1975 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
37क. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.10.1975 से भूतलक्षी प्रभाव से उपधारा (1) के रूप में पुन:संख्यांकित।
37ख. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.6.2002 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
37ग. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.10.1975 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा संशोधित रूप में]

