आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 288ख

संदेय रकम और शोध्य प्रतिदाय का पूर्णांकित किया जाना

धारा

धारा संख्या

288ख

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXIII - विविध

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2015

संदेय रकम और शोध्य प्रतिदाय का पूर्णांकित किया जाना

संदेय रकम और शोध्य प्रतिदाय का पूर्णांकित किया जाना

32[संदेय रकम और शोध्य प्रतिदाय का पूर्णांकित किया जाना

288ख. इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन संदेय कोर्इ रकम और शोध्य प्रतिदाय की रकम दस रुपए के निकटतम गुणज तक पूर्णांकित की जाएगी और इस प्रयोजन के लिए रुपए के ऐसे भाग को जो पैसों में है, अनदेखा किया जाएगा और उसके पश्चात् यदि ऐसी रकम दस का गुणज नहीं है तब, यदि उस रकम में अंतिम अंक पांच या उससे अधिक है तो रकम अगली उच्चतर रकम तक बढ़ा दी जाएगी जो दस का गुणज है और यदि अंतिम अंक पांच से कम है तो रकम अगली निम्नतर रकम तक घटा दी जएगी जो दस का गुणज है।]

 

32.  कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा 13.7.2006 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से संशोधित धारा 288ख इस प्रकार थी :

“288ख. कर आदि का पूर्णांकन–इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन कर की रकम (जिसके अंतर्गत स्रोत पर कटौती योग्य या अग्रिम रूप में संदेय कर भी है), ब्याज, शास्ति, जुर्माना या कोर्इ अन्य संदेय राशि, और देय प्रतिदाय की रकम, निकटतम रुपए तक पूर्णांकित की जाएगी, और इस प्रयोजन के लिए, जहां ऐसी रकम में रुपए का ऐसा भाग जो पैसों में है, वहां यदि ऐसा भाग पचास पैसे या अधिक है तो उसे बढ़ाकर एक रुपया कर दिया जाएगा और यदि ऐसा भाग पचास पैसे से कम है, तो उसे छोड़ दिया जाएगा।”

 

 

[वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा संशोधित रूप में]

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