नई धारा 115खखज और 115खखझ का अंत:स्थापन
नई धारा 115खखज और 115खखझ का अंत:स्थापन ।
28. आय-कर अधिनियम की धारा 115खखछ के पश्चात्, निम्नलिखित धारा 1 अप्रैल, 2023 से अंत:स्थापित की जाएगी, अर्थात् :—
'115खखज. आभासी डिजिटल आस्तियों से आय पर कर .-(1) जहां निर्धारिती की कुल आय में, ऐसी आभासी डिजिटल आस्ति के अंतरण से कोई आय सम्मिलित है, संदेय आय-कर—
(क) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी ऐसी आभासी डिजिटल आस्ति के अंतरण से आय पर आय-कर की तीस प्रतिशत की दर से संगणित रकम ; और
(ख) आय-कर की रकम, जिससे निर्धारिती प्रभार्य होता, यदि निर्धारिती की कुल आय में से खंड (क) में निर्दिष्ट आय से घटा दिया जाता,
का योग होगा ।
(2) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी,—
(क) (अर्जन की लागत से भिन्न, यदि कोई हो) किसी व्यय या मोक या किसी हानि के मुजरा के संबंध कोई कटौती निर्धारिती को उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट आय की संगणना करने में अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन अनुज्ञात नहीं की जाएगी ; और
(ख) उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन आभासी डिजिटल आस्ति के अंतरण से संगणित किसी हानि का कोई मुजरा, इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन संगणित आय के लिए निर्धारिती को अनुज्ञात नहीं किया जाएगा, और ऐसी हानि को पश्चातवर्ती निर्धारण वर्षों के लिए अग्रनीत करना अनुज्ञात नहीं किया जाएगा ।
(3) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, धारा 2 के खंड (47) में यथा परिभाषित ''अंतरण'' शब्द किसी आभासी डिजिटल आस्ति को लागू होगा, चाहे वह पूंजी आस्ति हो या नहीं हो।
115खखझ. कतिपय संस्थाओं की विनिर्दिष्ट आय —(1) जहां किसी निर्धारिती, जो धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) में निर्दिष्ट निधि या संस्था किसी या उपखंड (v) में निर्दिष्ट किसी न्यास या संस्था या उपखंड (vi) में निर्दिष्ट किसी विश्वविद्यालय या शैक्षिक संस्था या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट किसी अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था या धारा 11 में निर्दिष्ट किसी न्यास या संस्था के निमित्त कोई आय प्राप्त करने वाला व्यक्ति है, की आय में किसी इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, विनिर्दिष्ट आय के माध्यम से कोई आय सम्मिलित है, वहां संदेय आय-कर—
(i) विनिर्दिष्ट आय के योग पर तीस प्रतिशत की दर से संगणित आय-कर की रकम ; और
(ii) आय-कर की रकम, जिससे निर्धारिती प्रभार्य होता, यदि निर्धारिती की कुल आय को खंड (i) में निर्दिष्ट विनिर्दिष्ट आय के योग से घटा दिया जाता,
का योग होगा ।
(2) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी व्यय या मोक या किसी हानि के मुजरा के संबंध में कोई कटौती निर्धारिती को उपधारा (1) के खंड (i) में निर्दिष्ट विनिर्दिष्ट आय की संगणना करने में अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन अनुज्ञात नहीं की जाएगी ।
स्पष्टीकरण—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "विनिर्दिष्ट आय" से निम्नलिखित अभिप्रेत है,—
(क) आय के पन्द्रह प्रतिशत से अधिक संचयित या अलग रखी गई आय, जहां ऐसा संचयन अधिनियम के किन्हीं विनिर्दिष्ट उपबंधों के अधीन अनुज्ञात नहीं किया जाता है ; या
(ख) धारा 10 के खंड (23ग) के तीसरे परंतुक के स्पष्टीकरण 4 या धारा 11 की उपधारा (1ख) या उपधारा (3) में निर्दिष्ट समझी गई आय ; या
(ग) कोई आय, जो धारा 10 के खंड (23ग) के तीसरे परंतुक के खंड (ख) के उपबंधों के अतिक्रमण के कारण धारा 10 के खंड (23ग) के अधीन छूट प्राप्त नहीं है या धारा 13 की उपधारा (1) के खंड (घ) के उपबंधों के अधीन कुल आय से अपवर्जित नहीं की जाने वाली कोई आय है ; या
(घ) कोई आय, जिसे धारा 10 के खंड (23ग) के इक्कीसवें परंतुक के अधीन आय समझा जाता है या जिसे धारा 13 की उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन कुल आय से अपवर्जित नहीं किया जाता है ; या
(ङ) कोई आय, जो धारा 11 की उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन कुल आय से अपवर्जित नहीं है ।'।

