आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 279

अभियोजन का प्रधान मुख्य आयुक्त यामुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त याआयुक्त की प्रेरणा से होना

धारा

धारा संख्या

279

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXII - अपराध और मुकदमें

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2022

अभियोजन का प्रधान मुख्य आयुक्त यामुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त याआयुक्त की प्रेरणा से होना

अभियोजन का प्रधान मुख्य आयुक्त यामुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त याआयुक्त की प्रेरणा से होना

अभियोजन का प्रधान मुख्य आयुक्त यामुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त याआयुक्त की प्रेरणा से होना

279. (1) किसी व्यक्ति के विरुद्ध धारा 275क, धारा 275ख धारा 276, धारा 276क, धारा 276ख, धारा 276खख, धारा 276ग, धारा 276गग, धारा 276घ, धारा 277, धारा 277क या धारा 278 के अधीन किसी अपराध के लिए कोर्इ कार्यवाही, प्रधान आयुक्त या आयुक्त या आयुक्त (अपील) या समुचित प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी से ही की जाएगी, अन्यथा नहीं :

परन्तु, यथास्थिति, प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक, इस उपधारा के अधीन कार्यवाही संस्थित करने के लिए पूर्वोक्त आय-कर प्राधिकारियों को ऐसे अनुदेश या निदेश जारी कर सकेगा, जो वह ठीक समझे।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ''समुचित प्राधिकारी'' का वही अर्थ है जो धारा 269पक के खंड (ग) में है।

(1क) किसी व्यक्ति के विरुद्ध किसी ऐसे निर्धारण वर्ष के निर्धारण के संबंध में, जिसकी बाबत उस पर धारा 270क या धारा 271 की उपधारा (1) के खंड (iii) के अधीन आरोपित या अधिरोपणीय शास्ति, धारा 273क के अधीन आदेश द्वारा घटा दी गर्इ है या उसका अधित्यजन कर दिया गया है, धारा 276ग या धारा 277 के अधीन किसी अपराध के लिए कार्यवाही नहीं की जाएगी।

(2) इस अध्याय के अधीन किसी अपराध का प्रशमन कार्यवाही संस्थित किए जाने के पूर्व या पश्चात्, प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक द्वारा किया जा सकेगा।

(3) जहां उपधारा (1) के अधीन किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोर्इ कार्यवाही की गर्इ है, वहां धारा 116 के खंड () से () में विनिर्दिष्ट आय-कर प्राधिकािरयों में से किसी के समक्ष, ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया कोर्इ कथन या पेश किया गया कोर्इ लेखा या अन्य दस्तावेजें ऐसी कार्यवाहियों के प्रयोजन के लिए साक्ष्य के रूप में केवल इस आधार पर अग्राह्य नहीं होंगी कि ऐसा कथन या ऐसा लेखा या अन्य दस्तावेज इस विश्वास के साथ किया गया या पेश किया गया था कि अधिरोपणीय शास्ति धारा 273क के अधीन घटा दी जाएगी या अधित्याजित कर दी जाएगी या वह अपराध जिसकी बाबत ऐसी कार्यवाही की गर्इ थी, प्रशमित कर दिया जाएगा।

1[(4) केंद्रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन स्‍वीकृति अनुदत्‍त करने या उपधारा (2) के अधीन शमन करने के प्रयोजनों के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, एक स्‍कीम बना सकेगी, जिससे निम्‍नलिखित द्वारा अधिक दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही प्रदान की जा सके—

() प्रौद्योगिकी रूप से संभाव्‍य होने की सीमा तक आय-कर प्राधिकारी और निर्धारिती यह अन्‍य व्‍यक्‍ति के बीच अंतरपृष्‍ठ हटा कर;

(ख) पैमाने की अर्थव्‍यवस्‍था और कार्यात्‍मक विशेषज्ञीकरण के मध्‍यम से संसाधनों के उपयोग को अनुकूलतम करके;

(ग) गतिशील अधिकारिता के साथ टीम आधारित स्‍वीकृति या अपराधों का शमन आरंभ करके ।

(5) केन्‍द्रीय सरकार, उपधारा (4) के अधीन बनाई गई स्‍कीम को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के कोई उपबंध ऐसे अपवादों, उपांतरणों और अनुकूलनों के साथ या उनके बिना लागू होंगे, जैसे अधिसूचना में विनिर्दिष्‍ट किए जाएं :

परन्‍तु कोई भी निदेश 31 मार्च, 2022 के पश्‍चात् जारी नही किया जाएगा ।

(6) उपधारा (4) और उपधारा (5) के अधीन जारी की गई प्रत्‍येक अधिसूचना जारी किए जाने के पश्‍चात् यथाशीघ्र संसद के प्रत्‍येक सदन के समक्ष रखी जाएगी ।]

स्पष्टीकरण.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि इस अधिनियम के अधीन आदेश, अनुदेश या निदेश जारी करने की शक्ति के अंतर्गत इस धारा के अधीन अपराधों के समुचित प्रशमन के लिए अन्य आय-कर प्राधिकारियों को अनुदेश या निदेश (जिनके अंतर्गत बोर्ड का पूर्व अनुमोदन लेने के लिए निदेश या अनुदेश है) जारी करने की शक्ति सम्मिलित है, और यह समझा जाएगा कि यह शक्ति हमेशा से सम्मिलित रही है।

 

1. कराधान और अन्‍य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा 1.11.2020 से अंत:स्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

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