आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 276ग

जानबूझकर कर आदि का अपवंचन करने का प्रयास

धारा

धारा संख्या

276ग

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXII - अपराध और मुकदमें

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2012

जानबूझकर कर आदि का अपवंचन करने का प्रयास

जानबूझकर कर आदि का अपवंचन करने का प्रयास

36[जानबूझकर कर आदि का अपवंचन करने का प्रयास

276ग. (1) यदि कोर्इ व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य या अधिरोपणीय किसी कर, शास्ति या ब्याज का किसी भी रीति से जानबूझकर अपवंचन37करने का प्रयास करेगा, तो वह इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन उस पर अधिरोपणीय शास्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना–

(i) ऐसे मामले में जहां वह रकम जिसके अपवंचन करने का प्रयास किया जाता है, 37क[पच्चीस] लाख रुपए से अधिक है, कठोर कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम नहीं होगी किंतु सात वर्ष तक हो सकेगी, और जुर्माने से दण्डनीय होगा;

(ii) किसी अन्य मामले में कठोर कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास से कम नहीं होगी किंतु 37ख[दो] वर्ष तक हो सकेगी, और जुर्माने से दण्डनीय होगा।

(2) यदि कोर्इ व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन किसी कर, शास्ति या ब्याज के संदाय का किसी भी तरह जानबूझकर अपवंचन करने का प्रयास करेगा, तो वह इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंधों के अधीन उस पर अधिरोपणीय शास्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना कठोर कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास से कम नहीं होगी किंतु 37ख[दो] वर्ष तक हो सकेगी, दण्डनीय होगा और न्यायालय के विवेकानुसार जुर्माना देने के लिए भी दायी होगा।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य या अधिरोपणीय किसी कर, शास्ति या ब्याज का अपवंचन करने का जानबूझकर प्रयास करने के अंतर्गत वह मामला भी आता है, जिसमें कोर्इ व्यक्ति–

(i) अपने कब्जे या नियंत्रण में कोर्इ लेखा बहियें या अन्य दस्तावेजें रखता है (जो लेखा बहियें या अन्य दस्तावेजें इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही से सुसंगत हैं) जिनमें कोर्इ मिथ्या प्रविष्टि या कथन अंतर्विष्ट है; या

(ii) ऐसी लेखा-बहियों या अन्य दस्तावेजों में मिथ्या प्रविष्टि या कथन करता है, या करवाता है; या

(iii) ऐसी लेखा-बहियों या अन्य दस्तावेजों में से किसी सुसंगत प्रविष्टि या कथन का जानबूझकर लोप करता है या करवाता है; या

(iv) कोर्इ अन्य परिस्थिति उत्पन्न करवा देता है, जिसका प्रभाव ऐसे व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य या अधिरोपणीय किसी कर, शास्ति या ब्याज का या उनके संदाय का अपवंचन करने में समर्थ बनाना होगा।]

 

36. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से धारा 276ग के स्थान पर प्रतिस्थापित। मूल धारा 276ग कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से अंत:स्थापित की गर्इ थी।

37. "अपवंचन" पद के अर्थ के लिए, देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

37क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से "एक" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

37ख. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से "तीन" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

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